Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَإِمَّا نُرِيَنَّكَ: और (ऐ नबी!) यदि हम तुम्हें दिखा दें।
- بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ: कुछ वह (अज़ाब) जिसका हमने उनसे वादा किया है।
- أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ: या (उससे पहले) हम तुम्हें (दुनिया से) उठा लें।
- فَإِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ: तो हमारी ही ओर उनका लौटना है।
- شَهِيدٌ: गवाह, देखने वाला, निगरानी करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको दो बातों में से एक का विकल्प दे रहा है — या तो वह आपके जीवन में ही उन काफ़िरों और मुख़ालिफ़ों को वह सज़ा दिखा दे, जिसका उनसे वादा किया गया है (जैसे बद्र के युद्ध में अज़ाब आना), या फिर वह आपको उस सज़ा के दिखाए जाने से पहले ही अपने पास उठा ले। इन दोनों हालतों में से कोई भी सूरत हो, उन सबका अंजाम अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है। यानी आपके देखने या न देखने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता — उनका हिसाब, उनकी सज़ा और उनका बदला अल्लाह के ज़िम्मे है। फिर अल्लाह उनके उन सारे कामों पर गवाह है जो वे दुनिया में करते हैं — चाहे वे छुपकर करें या खुलकर, चाहे वे रात में करें या दिन में। अल्लाह की निगरानी से कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। यहाँ "ثُمَّ" (फिर) का प्रयोग "وَ" (और) के अर्थ में है, यानी यदि आपने दुनिया में उनका अज़ाब नहीं देखा, तो आख़िरत में ज़रूर देखेंगे।
फ़ायदे (उपदेश):
- नबी की तसल्ली: इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी है कि आप चिंता न करें — सज़ा का वक़्त अल्लाह के हाथ में है। आपका काम केवल पहुँचाना है, बदला लेना अल्लाह का काम है। यह हर दावत-ओ-तब्लीग़ के काम करने वाले के लिए बड़ी ताक़त की बात है।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: अल्लाह हर काम पर गवाह है। यह एहसास इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकी पर मज़बूत करता है। जब इंसान जान लेता है कि अल्लाह देख रहा है, तो वह अकेले में भी उस चीज़ से बचता है जो अल्लाह को नापसंद है।
- अंजाम का भरोसा: मोमिन को यक़ीन होता है कि ज़ालिम चाहे दुनिया में बच निकले, आख़िरत में उसका हिसाब ज़रूर होगा। यह भरोसा इंसान को सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) पर क़ायम रखता है।
- इस्लाम का पैग़ाम: इस्लाम सिखाता है कि बदला लेना अल्लाह का काम है — इंसान को चाहिए कि वह माफ़ करे, दरगुज़र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे। यही वह रास्ता है जो दिलों को साफ़ रखता है और समाज में अम्न (शांति) पैदा करता है।
📜 आयत 44-48 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 46
सूरा यूनुस आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर…सूरा आयत 46/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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