अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- उम्मत: समुदाय, समूह
- रसूल: पैगंबर, संदेशवाहक
- क़ुज़िया: फैसला किया गया, निर्णय दिया गया
- क़िस्त: न्याय, इंसाफ़
- ज़ुल्म: अत्याचार, अन्याय
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! यह अल्लाह का सार्वभौमिक नियम है कि हर उम्मत (समुदाय) के लिए उसने एक रसूल भेजा है, जैसे उसने तुम्हारे पास मुहम्मद ﷺ को भेजा। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का तकाज़ा है कि वह किसी को भी बिना चेतावनी दिए सज़ा नहीं देता। हर ज़माने में, हर क़ौम के पास अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने वाला आया, जो उन्हें सच्चे रास्ते की दावत देता रहा।
जब उनका रसूल उनके पास आया और उन्होंने उसे झुठलाया या उसकी दावत को क़ुबूल नहीं किया, तो अल्लाह ने उनके बीच पूरे न्याय के साथ फैसला सुनाया। यानी जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उन्हें अल्लाह ने अपनी फज़ल (कृपा) से नजात दी, और जिन्होंने हक़ को झुठलाया, उन्हें उसके अदल (न्याय) के अनुसार सज़ा दी। और यह फैसला इतना सटीक और निष्पक्ष होता है कि किसी पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होता — न उनके अच्छे कामों में कमी की जाती है, न बुरे कामों में ज़्यादती।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ कितना कमाल का है। वह किसी को बिना हुज्जत (प्रमाण) के सज़ा नहीं देता। हर इंसान के पास रसूल का पैग़ाम पहुँचा, और फिर उसे अपनी मर्ज़ी से रास्ता चुनने की आज़ादी दी गई। यह अल्लाह की रहमत की एक बड़ी निशानी है कि उसने किसी को अंधेरे में नहीं छोड़ा।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे दिलों में यह यक़ीन पैदा करती है कि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखता है और उसका फैसला हमेशा अदल पर होता है। हमें चाहिए कि हम अपने रसूल ﷺ की लाई हुई हिदायत को पकड़ें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है। जो लोग रसूल की दावत को क़ुबूल करते हैं, वे अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं, और जो उसे ठुकराते हैं, वे अपने नुक़सान का सामना करते हैं। अल्लाह का वादा सच्चा है — वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उसकी रहमत और अदल हर चीज़ पर छाया हुआ है।
📜 आयत 45-49 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 47
सूरा यूनुस आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है…सूरा आयत 47/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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