यूनुस · 47/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَلِكُلِّ أُمَّةٍ رَّسُولٌ ۖ فَإِذَا جَاءَ رَسُولُهُمْ قُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ۝٤٧
Wa likulli ummatir Rasoolun fa izaa jaaa`a Rasooluhum qudiya bainahum bilqisti wa hum laa yuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरमियान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • उम्मत: समुदाय, समूह
  • रसूल: पैगंबर, संदेशवाहक
  • क़ुज़िया: फैसला किया गया, निर्णय दिया गया
  • क़िस्त: न्याय, इंसाफ़
  • ज़ुल्म: अत्याचार, अन्याय

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! यह अल्लाह का सार्वभौमिक नियम है कि हर उम्मत (समुदाय) के लिए उसने एक रसूल भेजा है, जैसे उसने तुम्हारे पास मुहम्मद ﷺ को भेजा। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का तकाज़ा है कि वह किसी को भी बिना चेतावनी दिए सज़ा नहीं देता। हर ज़माने में, हर क़ौम के पास अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने वाला आया, जो उन्हें सच्चे रास्ते की दावत देता रहा।

जब उनका रसूल उनके पास आया और उन्होंने उसे झुठलाया या उसकी दावत को क़ुबूल नहीं किया, तो अल्लाह ने उनके बीच पूरे न्याय के साथ फैसला सुनाया। यानी जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उन्हें अल्लाह ने अपनी फज़ल (कृपा) से नजात दी, और जिन्होंने हक़ को झुठलाया, उन्हें उसके अदल (न्याय) के अनुसार सज़ा दी। और यह फैसला इतना सटीक और निष्पक्ष होता है कि किसी पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होता — न उनके अच्छे कामों में कमी की जाती है, न बुरे कामों में ज़्यादती।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ कितना कमाल का है। वह किसी को बिना हुज्जत (प्रमाण) के सज़ा नहीं देता। हर इंसान के पास रसूल का पैग़ाम पहुँचा, और फिर उसे अपनी मर्ज़ी से रास्ता चुनने की आज़ादी दी गई। यह अल्लाह की रहमत की एक बड़ी निशानी है कि उसने किसी को अंधेरे में नहीं छोड़ा।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे दिलों में यह यक़ीन पैदा करती है कि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखता है और उसका फैसला हमेशा अदल पर होता है। हमें चाहिए कि हम अपने रसूल ﷺ की लाई हुई हिदायत को पकड़ें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है। जो लोग रसूल की दावत को क़ुबूल करते हैं, वे अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं, और जो उसे ठुकराते हैं, वे अपने नुक़सान का सामना करते हैं। अल्लाह का वादा सच्चा है — वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उसकी रहमत और अदल हर चीज़ पर छाया हुआ है।



📜 आयत 45-49 — सूरा यूनुस

45وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ كَأَن لَّمْ يَلْبَثُوا إِلَّا سَاعَةً مِّنَ النَّهَارِ يَتَعَارَفُونَ بَيْنَهُمْ ۚ قَدْ خَسِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِلِقَاءِ اللَّهِ وَمَا كَانُوا مُهْتَدِينَ
और जिस दिन ख़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में) जमा करेगा तो गोया ये लोग (समझेगें कि दुनिया में) बस घड़ी दिन भर ठहरे और आपस में एक दूसरे को पहचानेंगे जिन लोगों ने ख़ुदा की बारगाह में हाज़िर होने को झुठलाया वह ज़रुर घाटे में हैं और हिदायत याफता न थे
46وَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ اللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ
ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर चुके हैं उनमें से बाज़ ख्वाहा तुम्हें दिखा दें या तुमको (पहले ही दुनिया से) उठा ले फिर (आख़िर) तो उन सबको हमारी तरफ लौटना ही है फिर जो कुछ ये लोग कर रहे हैं ख़ुदा तो उस पर गवाह ही है
47وَلِكُلِّ أُمَّةٍ رَّسُولٌ ۖ فَإِذَا جَاءَ رَسُولُهُمْ قُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरमियान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा
48وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा
49قُل لَّا أَمْلِكُ لِنَفْسِي ضَرًّا وَلَا نَفْعًا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۚ إِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ فَلَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक्त मुक़र्रर है-जब उन का वक्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
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अनुवाद — यूनुस 47

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Thursday, October 1, 2026

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