यूनुस · 48/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٤٨
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَتَى: कब? (समय पूछने के लिए)
  • هَذَا الْوَعْدُ: यह वादा (अर्थात् क़ियामत का दिन और अज़ाब)
  • صَادِقِينَ: सत्यवान, सच्चे (बहुवचन, अर्थात् तुम लोग)

तफ़सीर:

ये आयत मक्का के मुशरिकों का हाल बयान कर रही है। वे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ और उनके साथियों से मज़ाक़ और चुनौती के अंदाज़ में कहते थे: "वह वादा (क़ियामत का दिन और अज़ाब) कब आएगा, अगर तुम सच्चे हो?" वे इस तरह से क़ियामत के आने की जल्दी करते और उसे दूर की बात समझकर झुठलाते थे। उनका यह कहना वास्तव में अल्लाह की क़ुदरत और उसके वादे पर संदेह नहीं था, बल्कि हठधर्मिता, अहंकार और उपहास था। वे जानते थे कि क़ियामत का समय अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता, फिर भी वे इसे जल्दी से माँगते थे, जैसे कि वे उस अज़ाब को अपने ऊपर लाना चाहते हों। अल्लाह ने उनके इस रवैये का जवाब आगे की आयतों में दिया है कि यह वादा निश्चित रूप से आएगा, और जब वह आएगा तो उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाएगी।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह का वादा सत्य है और उसके आने में कोई संदेह नहीं। मुशरिकों का मज़ाक़ और चुनौती उनकी नादानी और अहंकार की निशानी थी।
  2. हमें चाहिए कि हम क़ियामत के दिन की तैयारी करें, न कि उसके आने की जल्दी करें या उसे दूर समझें। जो लोग उसे दूर समझते हैं, वे अक्सर अच्छे कर्मों में लापरवाह हो जाते हैं।
  3. यह आयत हमें सब्र और यक़ीन का पाठ पढ़ाती है। जब कोई हमारे ईमान का मज़ाक़ उड़ाए, तो हमें अपने यक़ीन पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।
  4. इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह की राह में आने वाली मुश्किलों और तंज़ का सामना करना पैग़म्बरों की सुन्नत है। हमें भी अपने ईमान पर दृढ़ रहना चाहिए, चाहे लोग हमारा मज़ाक़ ही क्यों न उड़ाएँ।


📜 आयत 46-50 — सूरा यूनुस

46وَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ اللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ
ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर चुके हैं उनमें से बाज़ ख्वाहा तुम्हें दिखा दें या तुमको (पहले ही दुनिया से) उठा ले फिर (आख़िर) तो उन सबको हमारी तरफ लौटना ही है फिर जो कुछ ये लोग कर रहे हैं ख़ुदा तो उस पर गवाह ही है
47وَلِكُلِّ أُمَّةٍ رَّسُولٌ ۖ فَإِذَا جَاءَ رَسُولُهُمْ قُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरमियान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा
48وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा
49قُل لَّا أَمْلِكُ لِنَفْسِي ضَرًّا وَلَا نَفْعًا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۚ إِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ فَلَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक्त मुक़र्रर है-जब उन का वक्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
50قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُهُ بَيَاتًا أَوْ نَهَارًا مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
48आयत

अनुवाद — यूनुस 48

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Thursday, October 1, 2026

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