यूनुस · 50/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُهُ بَيَاتًا أَوْ نَهَارًا مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ ۝٥٠
Qul ara`aitum in ataakum `azaabuhoo bayaatan aw nahaaram maazaa yasta`jilu minhul mujrimoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَيَاتًا: रात के समय, रातों-रात।
  • مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ: अपराधी (आज्ञा न मानने वाले) उस (अज़ाब) में से किस चीज़ की जल्दी कर रहे हैं?

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो अज़ाब के लिए जल्दी मचाते हैं: "बताओ तो सही, अगर अल्लाह का अज़ाब तुम्हें रात के समय आ जाए, जब तुम सो रहे हो, या दिन के समय आ जाए, जब तुम अपनी रोज़ी-रोटी के कामों में लगे हो—तो तुम किस चीज़ की जल्दी कर रहे हो?" यह प्रश्न वास्तव में उन्हें डराने और सचेत करने के लिए है। इसका अर्थ यह है कि जिस अज़ाब की तुम जल्दी मांग रहे हो, वह जब भी आएगा—चाहे रात को हो या दिन को—तुम्हारे लिए बेहद भयानक और विनाशकारी होगा। तुम अपनी इस जल्दबाज़ी पर पछताओगे, लेकिन तब पछताना बेकार होगा। यह अज़ाब अचानक आएगा, जब तुम इसके लिए तैयार न होंगे, और तब तुम्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वह समय निकल चुका होगा।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह का अज़ाब किसी भी वक़्त आ सकता है—रात में या दिन में—इसलिए इंसान को हर पल उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
  2. अज़ाब की जल्दी मांगना बुद्धिमानी नहीं है; बल्कि यह अहंकार और नासमझी की निशानी है। मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखे और उससे माफ़ी मांगे।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह अपने बंदों को मोहलत देता है, लेकिन जब पकड़ता है, तो कोई नहीं बचा सकता। इसलिए हमें हर हाल में उसकी ओर रुजू करना चाहिए।
  4. इस्लाम हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फैसले पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह बहुत क्षमाशील और दयालु है।


📜 आयत 48-52 — यूनुस

48وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा
49قُل لَّا أَمْلِكُ لِنَفْسِي ضَرًّا وَلَا نَفْعًا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۚ إِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ فَلَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक्त मुक़र्रर है-जब उन का वक्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
50قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُهُ بَيَاتًا أَوْ نَهَارًا مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
51أَثُمَّ إِذَا مَا وَقَعَ آمَنتُم بِهِ ۚ آلْآنَ وَقَدْ كُنتُم بِهِ تَسْتَعْجِلُونَ
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर ईमान लाओगे (आहा) क्या अब (ईमान लाए) हालॉकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे
52ثُمَّ قِيلَ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आख़िरत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा
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50आयत

अनुवाद — यूनुस 50

सूरा यूनुस आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो…

सूरा आयत 50/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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