Qul ara`aitum in ataakum `azaabuhoo bayaatan aw nahaaram maazaa yasta`jilu minhul mujrimoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
کہہ دو کہ بھلا دیکھو تو اگر اس کا عذاب تم پر (ناگہاں) آجائے رات کو یا دن کو تو پھر گنہگار کس بات کی جلدی کریں گے
مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ: अपराधी (आज्ञा न मानने वाले) उस (अज़ाब) में से किस चीज़ की जल्दी कर रहे हैं?
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो अज़ाब के लिए जल्दी मचाते हैं: "बताओ तो सही, अगर अल्लाह का अज़ाब तुम्हें रात के समय आ जाए, जब तुम सो रहे हो, या दिन के समय आ जाए, जब तुम अपनी रोज़ी-रोटी के कामों में लगे हो—तो तुम किस चीज़ की जल्दी कर रहे हो?" यह प्रश्न वास्तव में उन्हें डराने और सचेत करने के लिए है। इसका अर्थ यह है कि जिस अज़ाब की तुम जल्दी मांग रहे हो, वह जब भी आएगा—चाहे रात को हो या दिन को—तुम्हारे लिए बेहद भयानक और विनाशकारी होगा। तुम अपनी इस जल्दबाज़ी पर पछताओगे, लेकिन तब पछताना बेकार होगा। यह अज़ाब अचानक आएगा, जब तुम इसके लिए तैयार न होंगे, और तब तुम्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वह समय निकल चुका होगा।
फ़ायदे (सीख):
अल्लाह का अज़ाब किसी भी वक़्त आ सकता है—रात में या दिन में—इसलिए इंसान को हर पल उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
अज़ाब की जल्दी मांगना बुद्धिमानी नहीं है; बल्कि यह अहंकार और नासमझी की निशानी है। मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखे और उससे माफ़ी मांगे।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह अपने बंदों को मोहलत देता है, लेकिन जब पकड़ता है, तो कोई नहीं बचा सकता। इसलिए हमें हर हाल में उसकी ओर रुजू करना चाहिए।
इस्लाम हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फैसले पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह बहुत क्षमाशील और दयालु है।
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक्त मुक़र्रर है-जब उन का वक्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आख़िरत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।