Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لا أَمْلِكُ: मैं अधिकार नहीं रखता, मेरे वश में नहीं है।
- ضَرًّا: हानि, कष्ट, बुराई।
- نَفْعًا: लाभ, भलाई।
- أَجَلٌ: नियत समय, मृत्यु या विनाश का निश्चित काल।
- يَسْتَأْخِرُونَ: पीछे हटते हैं, देर करते हैं।
- يَسْتَقْدِمُونَ: आगे बढ़ते हैं, पहले लाते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए कि मैं स्वयं अपने लिए किसी हानि को दूर करने या किसी लाभ को प्राप्त करने का अधिकार नहीं रखता। मेरे पास जो कुछ भी है, वह केवल अल्लाह की इच्छा और उसकी मर्ज़ी से है। जब अल्लाह चाहता है तो मुझसे कोई भलाई होती है, और जब वह चाहता है तो कोई बुराई टलती है। मेरी अपनी स्थिति यह है कि मैं अपने लिए भी कुछ नहीं कर सकता, फिर मैं दूसरों के लिए क्या कर सकता हूँ? मुझे ग़ैब (छिपी हुई बातों) का ज्ञान भी नहीं है।
फिर आप उन्हें बताइए कि हर उम्मत (समुदाय) के लिए अल्लाह की ओर से एक नियत समय निर्धारित है। जब वह समय आ जाता है, तो न वह एक पल के लिए पीछे हट सकती है और न ही आगे बढ़ सकती है। यानी जब अल्लाह का फैसला आ जाता है, तो उसे टालना या जल्दी करना किसी के बस में नहीं होता। यह बात उन लोगों को समझाने के लिए कही गई है जो आपसे आज़ाब (यातना) जल्दी लाने की मांग करते थे और मज़ाक़ उड़ाते थे। उन्हें बताया जा रहा है कि अल्लाह की योजना के अनुसार हर चीज़ का एक समय है, और वह समय आकर ही रहेगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि नबी और रसूल भी अपनी ताक़त से कुछ नहीं कर सकते, बल्कि सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी से होता है। इसलिए हमें अपनी सारी उम्मीदें और भरोसा केवल अल्लाह पर रखना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन और मृत्यु, सुख और दुख — सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। इसलिए हमें किसी इंसान की ताक़त पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की रहमत और क़ुदरत पर आस्था रखनी चाहिए।
- हर उम्मत के लिए एक नियत समय होता है, यह हमें याद दिलाता है कि इस दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है। हमें अपने जीवन को अच्छे कर्मों से भरना चाहिए और अल्लाह की आज्ञा का पालन करना चाहिए, क्योंकि मौत का समय निश्चित है और उसे कोई टाल नहीं सकता।
- यह आयत हमें धैर्य और सब्र सिखाती है। जब हम किसी मुसीबत या परेशानी में हों, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि हर चीज़ का एक समय है, और अल्लाह की योजना सबसे अच्छी होती है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह के फैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चलती। इसलिए हमें अपने कर्मों को सुधारना चाहिए और अल्लाह की रहमत के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा सहारा है।
📜 आयत 47-51 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 49
सूरा यूनुस आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते…सूरा आयत 49/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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