Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَثُمَّ: क्या फिर (क्या अब)
- إِذَا مَا وَقَعَ: जब वह (अज़ाब) आ पड़े
- آمَنتُم بِهِ: तुम उस पर ईमान लाओगे
- آلْآنَ: क्या अब (इस वक़्त)
- تَسْتَعْجِلُونَ: तुम जल्दी माँग रहे थे (उसे शीघ्र लाने की माँग कर रहे थे)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इन आयात में मुशरिकीन को उस वक़्त की याद दिला रहा है जब अज़ाब उन पर आ पड़ेगा। फ़रमाता है: क्या जब अल्लाह का अज़ाब तुम पर आ जाएगा, उस वक़्त तुम ईमान लाओगे? यह ईमान उस वक़्त बिल्कुल बेकार होगा, क्योंकि ईमान का वह वक़्त ही क़बूल होता है जब इंसान दुनिया में हो और उसके पास मौका हो। लेकिन जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान लाने का कोई फ़ायदा नहीं।
फिर उनसे कहा जाएगा: "क्या अब ईमान लाते हो? हालाँकि तुम पहले इस अज़ाब को मज़ाक़ उड़ाते हुए जल्दी माँगा करते थे।" यानी जब तुम्हें मौका था, तो तुमने ईमान नहीं लाया, बल्कि उल्टा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से कहते थे कि अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब लाओ जिससे तुम हमें डराते हो। यह तुम्हारी जल्दबाज़ी और मज़ाक़ था। अब जब वह अज़ाब आ गया, तो ईमान लाने से क्या फ़ायदा?
यह बात उस वक़्त होगी जब अज़ाब आ जाएगा, चाहे वह दुनिया का अज़ाब हो या आख़िरत का। उस वक़्त ईमान लाना किसी काम नहीं आएगा, जैसा कि फ़िरऔन ने जब ग़रक़ होने लगा तो ईमान लाया, लेकिन उसका ईमान क़बूल नहीं हुआ।
फ़ायदे:
- अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा दुनिया में ज़िंदगी के दौरान खुला है, लेकिन जब अज़ाब आ जाए, तो यह दरवाज़ा बंद हो जाता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह मौके पर ही ईमान लाए और तौबा करे।
- अज़ाब को जल्दी माँगना और उसका मज़ाक़ उड़ाना बहुत बड़ी ग़लती है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़े, न कि अज़ाब की तरफ़।
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और नेक अमल का वक़्त दुनिया की ज़िंदगी है। मौत के बाद या अज़ाब के आने के बाद कोई भी अमल क़बूल नहीं होगा।
- अल्लाह तआला बहुत मेहरबान है कि वह हमें मौका देता है और अपनी रहमत से तौबा क़बूल करता है। हमें चाहिए कि इस मौके की क़द्र करें और अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेकियों से सजाएँ।
- यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो आख़िरत और अज़ाब को मज़ाक़ समझते हैं। उन्हें चाहिए कि वे इससे सबक़ लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ।
📜 आयत 49-53 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 51
सूरा यूनुस आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर…सूरा आयत 51/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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