यूनुस · 70/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ ۝٧٠
Mataa`un fiddunyaa summa ilainaa marji`uhum summa nuzeequhumul `azaabash shadeeda bimaa kaanoo yakkfuroon
📖 हिंदी अर्थ
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَاعٌ: थोड़ा सा सांसारिक सुख-सामग्री, अस्थायी लाभ।
  • مَرْجِعُهُمْ: उनका लौटना, उनका अंतिम पड़ाव।
  • نُذِيقُهُمُ: हम उन्हें चखाएँगे (यानी दंड का स्वाद देंगे)।
  • الْعَذَابَ الشَّدِيدَ: सख्त और भयंकर यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह पर झूठ बोलते हैं, उसकी आयतों को झुठलाते हैं और पैग़म्बरों को नकारते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग जो कुछ भी दुनिया में पा रहे हैं—चाहे वह धन-दौलत हो, ऐशो-आराम हो या सुख-सुविधाएँ—यह सब केवल एक बहुत ही थोड़ा और अस्थायी सामान है। यह उनका हिस्सा है जो उन्हें दुनिया में मिल गया, लेकिन यह कभी स्थायी नहीं है। जब उनकी मौत का वक़्त आएगा, तो उन्हें इस दुनिया से जाना होगा, और उनका असली और अंतिम पड़ाव हमारी ओर है। यानी मरने के बाद वे हमारे सामने हाज़िर होंगे।

फिर उसके बाद, क़यामत के दिन, हम उन्हें सख्त से सख्त अज़ाब चखाएँगे—जो कि जहन्नम की आग और उसकी तकलीफ़ें हैं। यह सज़ा उन्हें इसलिए मिलेगी क्योंकि उन्होंने कुफ़्र किया, यानी अल्लाह को नहीं माना, उसके रसूलों को झुठलाया और उसकी आयतों का इनकार किया। यह अज़ाब उनके उसी कुफ़्र और इनकार का नतीजा है, जो उन्होंने दुनिया में किया।

फ़ायदे (सबक):

  1. दुनिया की चीज़ें और सुख-सुविधाएँ बहुत ही कम और फ़ानी हैं। इन पर घमंड करना या इन्हें ही सब कुछ समझ लेना बड़ी नादानी है, क्योंकि ये चंद रोज़ की चीज़ हैं।
  2. हर इंसान को एक दिन मरना है और अपने रब के सामने हाज़िर होना है। यह यक़ीन इंसान को सही रास्ते पर चलने और गुनाहों से बचने की ताक़त देता है।
  3. कुफ़्र और इनकार की सज़ा बहुत सख्त है। अल्लाह की आयतों और उसके रसूलों को झुठलाना इंसान को जहन्नम तक पहुँचा सकता है। इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और अल्लाह की हर नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि असली कामयाबी दुनिया के अस्थायी सुखों में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसके दीन पर साबित क़दम रहने में है। जो लोग दुनिया में अल्लाह को भूलकर अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागते हैं, वे आख़िरत में बड़े नुक़सान में होंगे।


📜 आयत 68-72 — सूरा यूनुस

68قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۖ هُوَ الْغَنِيُّ ۖ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ إِنْ عِندَكُم مِّن سُلْطَانٍ بِهَٰذَا ۚ أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यू ही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो
69قُلْ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
70مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें
71۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
72فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
फिर भी अगर तुम ने (मेरी नसीहत से) मुँह मोड़ा तो मैने तुम से कुछ मज़दूरी तो न माँगी थी-मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा ही पर है और (उसी की तरफ से) मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उसके फरमाबरदार बन्दों में से हो जाऊँ
यूनुसकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
70आयत

अनुवाद — यूनुस 70

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Thursday, October 1, 2026

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