यूनुस · 69/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
قُلْ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ ۝٦٩
Qul innal lazeena yaftaroona `alal laahil kaziba laa yuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَفْتَرُونَ: झूठ गढ़ना, बदनामी करना, झूठी बातें बनाना।
  • الْكَذِبَ: झूठ, असत्य।
  • يُفْلِحُونَ: सफल होना, कामयाबी पाना, अपने लक्ष्य को प्राप्त करना।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए कि जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं—जैसे यह कहना कि अल्लाह की कोई संतान है, या उसका कोई साझीदार है, या उसके बारे में कोई और झूठी बात फैलाते हैं—वे कभी सफल नहीं हो सकते। उनका यह काम उन्हें न तो दुनिया में कोई असली कामयाबी दे सकता है और न ही आख़िरत में। वे चाहे कितना भी दिखावा कर लें या अपनी बातों को सच साबित करने की कोशिश कर लें, लेकिन अल्लाह की पकड़ और उसकी सज़ा से वे बच नहीं सकते। उनका अंजाम नुकसान और बर्बादी के सिवा कुछ नहीं है, क्योंकि सच्चाई के खिलाफ झूठ को अपनाने वाला कभी फलता-फूलता नहीं।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई और ईमानदारी ही कामयाबी की कुंजी है। जो लोग अल्लाह के बारे में झूठी बातें फैलाते हैं, वे चाहे दुनिया में कुछ भी हासिल कर लें, लेकिन असली सफलता उन्हें कभी नसीब नहीं होती।
  2. यह आयत हमें अल्लाह की पाक ज़ात के बारे में सही अक़ीदा रखने की तरबियत देती है—कि अल्लाह हर कमी और दोष से पाक है, उसकी कोई संतान नहीं, कोई साझीदार नहीं। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) हमारी नजात का ज़रिया है।
  3. इससे हमें यह भी पता चलता है कि झूठ और बदनामी—चाहे वह अल्लाह के बारे में हो या इंसानों के बारे में—कभी भी भलाई का ज़रिया नहीं बन सकती। सच्चाई पर चलने वाला ही दिल को सुकून और आख़िरत में कामयाबी पाता है।
  4. आयत में "لاَ يُفْلِحُونَ" का इस्तेमाल एक चेतावनी है कि अल्लाह की नज़र में वही कामयाब है जो उसके हुक्मों पर चले और उसकी इबादत में किसी को शरीक न करे। यह हमें अपने अक़ीदे की पवित्रता बनाए रखने की तरग़ीब देती है।


📜 आयत 67-71 — सूरा यूनुस

67هُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौशनी में देखो भालो उसमें शक़ नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
68قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۖ هُوَ الْغَنِيُّ ۖ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ إِنْ عِندَكُم مِّن سُلْطَانٍ بِهَٰذَا ۚ أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यू ही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो
69قُلْ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
70مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें
71۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
69आयत

अनुवाद — यूनुस 69

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Thursday, October 1, 2026

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