यूनुस · 71/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ ۝٧١
Watlu `alaihim naba-a-Noohin iz qaala liqawmihee yaa qawmi in kaana kabura `alaikum maqaamee wa tazkeeree bi Aayaatil laahi fa`alal laahi tawakkaltu fa ajmi`ooo amrakum wa shurakaaa`akum summa laa yakun amrukum `alaikum ghummatan summmaq dooo ilaiya wa laa tunziroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَبُرَ: भारी और कठिन लगना
  • مَقَامِي: मेरा तुम्हारे बीच ठहरना / मेरा प्रवास
  • تَذْكِيرِي: मेरा उपदेश देना और याद दिलाना
  • فَأَجْمِعُوا: पूरा इरादा कर लो / अपना मामला पक्का कर लो
  • غُمَّةً: छिपा हुआ और धुंधला मामला
  • اقْضُوا إِلَيَّ: मेरी तरफ बढ़ो / मुझे निपटाने का काम पूरा करो
  • لَا تُنظِرُونِ: मुझे मोहलत मत दो

तफसीर:

ऐ नबी! इन मक्का के मुशरिकों को हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की वह कहानी सुनाओ, जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "ऐ मेरी क़ौम! अगर तुम्हें मेरा तुम्हारे बीच रहना और अल्लाह की आयतों के ज़रिए मेरा तुम्हें उपदेश देना भारी और कठिन लग रहा है, और तुम मुझे मारने या निकालने का इरादा कर चुके हो, तो जान लो कि मैंने अल्लाह पर ही भरोसा किया है। मुझे तुम्हारी साज़िशों का कोई डर नहीं। तुम अपना पूरा इरादा पक्का कर लो, अपने ठहराए हुए साझीदारों (देवताओं) को बुला लो, फिर तुम्हारा मामला तुम पर छिपा हुआ न रहे, बल्कि उसे खुला और साफ कर लो। फिर जो कुछ तुम्हारे दिलों में है उसे मेरे साथ पूरा कर डालो और मुझे ज़रा भी मोहलत मत दो। मुझे तुम्हारी ताकत और तुम्हारी योजनाओं की कोई परवाह नहीं, क्योंकि मेरा भरोसा अल्लाह पर है, जो सबसे बड़ा और सबसे ताकतवर है।"

फ़ायदे:

  1. तवक्कुल की ताकत: यह आयत सिखाती है कि जब इंसान का भरोसा अल्लाह पर पक्का हो, तो उसे दुनिया की किसी ताकत का डर नहीं होता। अल्लाह ही सबसे बड़ा संरक्षक है।
  2. सच्चाई पर डटे रहना: हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की यह हिम्मत हमें सिखाती है कि सच्चाई और हक़ के रास्ते पर चलते हुए किसी की धमकी या विरोध से घबराना नहीं चाहिए।
  3. अल्लाह की मदद का यक़ीन: जो लोग अल्लाह के दीन की खातिर मुश्किलों का सामना करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। नूह (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने उनकी क़ौम के शदीद मुख़ालफत के बावजूद हिफ़ाज़त फरमाई।
  4. दुश्मन की साज़िशों से न डरना: मोमिन को चाहिए कि वह दुश्मनों की साज़िशों और योजनाओं से न डरे, क्योंकि अल्लाह की तदबीर सबसे बेहतर है और वही सब कुछ करने पर कादिर है।
  5. दावत में सब्र और हिम्मत: यह कहानी दावत-ए-दीन के रास्ते में आने वाली मुश्किलों को सहन करने और बिना डरे अपना पैग़ाम पहुंचाने का सबक देती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 69-73 — यूनुस

69قُلْ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
70مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें
71۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
72فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
फिर भी अगर तुम ने (मेरी नसीहत से) मुँह मोड़ा तो मैने तुम से कुछ मज़दूरी तो न माँगी थी-मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा ही पर है और (उसी की तरफ से) मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उसके फरमाबरदार बन्दों में से हो जाऊँ
73فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ وَجَعَلْنَاهُمْ خَلَائِفَ وَأَغْرَقْنَا الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
उस पर भी उन लोगों ने उनको झुठलाया तो हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में (सवार) थे (उनको) नजात दी और उनको (अगलों का) जानशीन बनाया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनको डुबो मारा
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अनुवाद — यूनुस 71

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सूरा आयत 71/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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