यूनुस · 73/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ وَجَعَلْنَاهُمْ خَلَائِفَ وَأَغْرَقْنَا الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ ۝٧٣
Fakazzaboohu fanajjainaahu wa mamm`ahoo fil fulki wa ja`alnaahum khalaaa`ifa wa aghraqnal lazeena kazzaboo bi aayaatinaa fanzur kaifa kaana `aaqibatul munzareen
📖 हिंदी अर्थ
उस पर भी उन लोगों ने उनको झुठलाया तो हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में (सवार) थे (उनको) नजात दी और उनको (अगलों का) जानशीन बनाया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनको डुबो मारा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَكَذَّبُوهُ: उन्होंने उसे (नूह अलैहिस्सलाम को) झुठलाया।
  • الْفُلْكِ: नौका (जहाज़)।
  • خَلَائِفَ: (ज़मीन में) उत्तराधिकारी, पिछले लोगों की जगह लेने वाले।
  • أَغْرَقْنَا: हमने डुबो दिया।
  • الْمُنذَرِينَ: वे लोग जिन्हें (अल्लाह के अज़ाब से) डराया गया था।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाने पर अड़ी रही और उनकी नसीहत को क़बूल नहीं किया। उन्होंने नूह अलैहिस्सलाम की दावत को नकार दिया और ईमान लाने से इनकार कर दिया। तब अल्लाह ने अपने नबी की दुआ क़बूल की और उन्हें तथा उनके साथ नौका में सवार ईमानवालों को बचा लिया। अल्लाह ने उन्हें ज़मीन में पिछले लोगों का उत्तराधिकारी बनाया, यानी उन्हें ज़मीन पर आबाद किया और उन्हें वहाँ रहने का अधिकार दिया। जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों (निशानियों) को झुठलाया था, उन्हें अल्लाह ने तूफ़ान (सैलाब) में डुबोकर हलाक कर दिया। यहाँ अल्लाह अपने नबी मुहम्मद ﷺ को सम्बोधित करते हुए कहता है कि आप देखें कि उन लोगों का अंजाम कैसा हुआ जिन्हें नूह अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के अज़ाब से डराया था, लेकिन उन्होंने न माना और सत्य को झुठलाया। उनका अंत तबाही और विनाश के सिवा कुछ नहीं था।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत बताती है कि अल्लाह अपने नबियों की हमेशा मदद करता है और उन्हें काफ़िरों के नुक़सान से बचाता है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  2. सत्य को झुठलाने वालों का अंजाम हमेशा बुरा होता है, चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
  3. इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो नबियों के पैग़ाम को सुनकर भी उसे नकारते हैं। अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल होता है, जबकि ईमानवालों को नजात (मुक्ति) मिलती है।
  4. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि मुश्किलों में अल्लाह से दुआ करनी चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। नूह अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल तक दावत दी, लेकिन जब अल्लाह का हुक्म आया, तो उन्होंने तुरंत उसकी पैरवी की और अल्लाह ने उन्हें बचा लिया।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की आयतों (निशानियों) को झुठलाना सबसे बड़ा गुनाह है, और इसका अंजाम दुनिया और आख़िरत दोनों में बुरा है।


📜 आयत 71-75 — यूनुस

71۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
72فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
फिर भी अगर तुम ने (मेरी नसीहत से) मुँह मोड़ा तो मैने तुम से कुछ मज़दूरी तो न माँगी थी-मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा ही पर है और (उसी की तरफ से) मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उसके फरमाबरदार बन्दों में से हो जाऊँ
73فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ وَجَعَلْنَاهُمْ خَلَائِفَ وَأَغْرَقْنَا الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
उस पर भी उन लोगों ने उनको झुठलाया तो हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में (सवार) थे (उनको) नजात दी और उनको (अगलों का) जानशीन बनाया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनको डुबो मारा
74ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۚ كَذَٰلِكَ نَطْبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِ الْمُعْتَدِينَ
फिर ज़रा ग़ौर तो करो फिर हमने नूह के बाद और रसूलों को अपनी क़ौम के पास भेजा तो वह पैग़म्बर उनके पास वाजेए (खुले हुए) व रौशन मौजिज़े लेकर आए इस पर भी जिस चीज़ को ये लोग पहले झुठला चुके थे उस पर ईमान (न लाना था) न लाए हम यूंही हद से गुज़र जाने वालों के दिलों पर (गोया) खुद मोहर कर देते हैं
75ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِم مُّوسَىٰ وَهَارُونَ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ بِآيَاتِنَا فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُّجْرِمِينَ
फिर हमने इन पैग़म्बरों के बाद मूसा व हारुन को अपनी निशानियाँ (मौजिज़े) लेकर फिरऔन और उस (की क़ौम) के सरदारों के पास भेजा तो वह लोग अकड़ बैठे और ये लोग थे ही कुसूरवार
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अनुवाद — यूनुस 73

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सूरा आयत 73/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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