यूनुस · 72/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ ۝٧٢
Fa in tawallaitum famaa sa altukum min ajrin in ajriya illaa `alal laahi wa umirtu an akoona minal muslimeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर भी अगर तुम ने (मेरी नसीहत से) मुँह मोड़ा तो मैने तुम से कुछ मज़दूरी तो न माँगी थी-मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा ही पर है और (उसी की तरफ से) मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उसके फरमाबरदार बन्दों में से हो जाऊँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّيْتُمْ: तुम मुँह मोड़ लो, अर्थात मेरी बात को स्वीकार करने से इनकार कर दो।
  • أَجْرٍ: बदला, पारिश्रमिक, मेहनताना।
  • أُمِرْتُ: मुझे आदेश दिया गया है।
  • الْمُسْلِمِينَ: आज्ञाकारी, अल्लाह के हुक्म के सामने सिर झुकाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे मेरी क़ौम के लोगो! यदि तुम मेरी दावत (इस्लाम की ओर बुलाने) से मुँह मोड़ लो, तो इसका नुक़सान केवल तुम्हारा ही है। मैंने तुमसे कभी कोई पारिश्रमिक या बदला नहीं माँगा, जिसे देने में तुम्हें भारीपन महसूस हो और तुम मुझसे दूर भागो। मेरा बदला और मेरा प्रतिफल तो केवल अल्लाह के पास है। वही मुझे इस कार्य का पूरा बदला देगा, चाहे तुम मुझ पर ईमान लाओ या न लाओ। मेरा काम तो केवल अल्लाह का संदेश पहुँचाना है, और मुझे यही आदेश दिया गया है कि मैं उन लोगों में से बनूँ जो अल्लाह के हुक्म के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दें, उसकी आज्ञा का पालन करें और उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें। मैं अपने आपको उसके सुपुर्द कर चुका हूँ, और यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है।

फ़ायदे (सीख):

  1. दावत और नसीहत का काम केवल अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए, न कि किसी सांसारिक लाभ या बदले के लिए। यही नबियों का तरीक़ा है।
  2. एक सच्चे दावत देने वाले को लोगों की प्रतिक्रिया से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता; उसका भरोसा अल्लाह पर होता है, और वह जानता है कि उसका इनाम अल्लाह के पास सुरक्षित है।
  3. इस्लाम का अर्थ ही है अल्लाह के आगे पूर्ण समर्पण। मुसलमान वही है जो अपने जीवन के हर पहलू में अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखे।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि दूसरों को भलाई की ओर बुलाने का काम निःस्वार्थ भाव से करना चाहिए, और किसी भी प्रकार का पारिश्रमिक लेना इस पवित्र कार्य की रूह के ख़िलाफ़ है।
  5. अल्लाह के रसूलों का अंदाज़ यही रहा है कि वे अपनी क़ौम को साफ़-साफ़ बता देते थे कि वे उनसे कोई मुआवज़ा नहीं चाहते, ताकि लोगों को यह शक न हो कि वे किसी दुनियावी मतलब के लिए दावत दे रहे हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — यूनुस

70مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें
71۞ وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ نُوحٍ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُم مَّقَامِي وَتَذْكِيرِي بِآيَاتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْتُ فَأَجْمِعُوا أَمْرَكُمْ وَشُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ أَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُوا إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ
और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो
72فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
फिर भी अगर तुम ने (मेरी नसीहत से) मुँह मोड़ा तो मैने तुम से कुछ मज़दूरी तो न माँगी थी-मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा ही पर है और (उसी की तरफ से) मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उसके फरमाबरदार बन्दों में से हो जाऊँ
73فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ وَجَعَلْنَاهُمْ خَلَائِفَ وَأَغْرَقْنَا الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
उस पर भी उन लोगों ने उनको झुठलाया तो हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में (सवार) थे (उनको) नजात दी और उनको (अगलों का) जानशीन बनाया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनको डुबो मारा
74ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۚ كَذَٰلِكَ نَطْبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِ الْمُعْتَدِينَ
फिर ज़रा ग़ौर तो करो फिर हमने नूह के बाद और रसूलों को अपनी क़ौम के पास भेजा तो वह पैग़म्बर उनके पास वाजेए (खुले हुए) व रौशन मौजिज़े लेकर आए इस पर भी जिस चीज़ को ये लोग पहले झुठला चुके थे उस पर ईमान (न लाना था) न लाए हम यूंही हद से गुज़र जाने वालों के दिलों पर (गोया) खुद मोहर कर देते हैं
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अनुवाद — यूनुस 72

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Tuesday, August 18, 2026

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