अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَعَثْنَا: हमने भेजा।
- الْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और निशानियाँ।
- نَطْبَعُ: हम मुहर लगाते हैं (अर्थात् सील कर देते हैं)।
- الْمُعْتَدِينَ: हद से बढ़ने वाले, अत्याचारी, जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
नूह (अलैहिस्सलाम) के बाद, अल्लाह तआला ने उनकी क़ौम के अलावा दूसरी क़ौमों की ओर कई रसूल भेजे — जैसे हूद, सालेह, इब्राहीम, लूत और शुऐब (अलैहिमुस्सलाम) — और हर रसूल अपनी क़ौम के पास स्पष्ट चमत्कार और ठोस प्रमाण लेकर आया, जो उसकी सच्चाई और उसके पैग़ाम की सच्चाई को साबित करते थे। लेकिन उन क़ौमों ने ईमान लाने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्होंने पहले ही सच्चाई को झुठला दिया था और अपने दिलों को अंधकार में डाल लिया था। उनका यह इनकार इसलिए नहीं था कि उनके पास सबूत की कमी थी, बल्कि इसलिए था कि उन्होंने अपनी ज़िद और हठधर्मी के कारण सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
यही हाल उन लोगों का था जिन्होंने नूह (अलैहिस्सलाम) से पहले भी रसूलों को झुठलाया था। अल्लाह तआला ने उनके कुफ़्र और सरकशी की सज़ा में उनके दिलों पर मुहर लगा दी, यानी उनके दिलों को सत्य ग्रहण करने की क्षमता से वंचित कर दिया। यही नियम हर उस व्यक्ति और क़ौम पर लागू होता है जो हद से बढ़कर अल्लाह की आयतों को झुठलाती है और अपने रसूलों की नाफ़रमानी करती है — अल्लाह उनके दिलों पर मुहर लगा देता है, जिससे वे कभी ईमान नहीं लाते।
फ़ायदे (सबक़):
- सत्य का प्रमाण स्पष्ट होना चाहिए: अल्लाह ने हर युग में रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा, ताकि किसी के पास बहाने की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की रहमत और न्याय का प्रमाण है।
- ज़िद और हठधर्मी ईमान की राह में सबसे बड़ी रुकावट है: जो लोग सच्चाई को जानने के बाद भी उसे ठुकरा देते हैं, उनके दिल धीरे-धीरे कठोर हो जाते हैं और अंततः वे ईमान की नेमत से महरूम रह जाते हैं।
- अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) बदलती नहीं: जिस तरह अतीत की ज़िद्दी क़ौमों पर अल्लाह ने मुहर लगाई, उसी तरह आज भी जो लोग हद से बढ़कर अल्लाह की निशानियों का मज़ाक उड़ाते हैं या उन्हें झुठलाते हैं, उनके दिलों पर भी मुहर लग सकती है। यह एक गंभीर चेतावनी है।
- ईमान लाने में देरी न करें: यह आयत हमें सिखाती है कि जब सत्य हमारे सामने आ जाए, तो उसे तुरंत स्वीकार करना चाहिए। देर करना और ज़िद करना इंसान को हिदायत से दूर कर सकता है।
- अल्लाह की रहमत का द्वार खुला है: यह आयत उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो अभी तक ईमान नहीं लाए हैं — जब तक दिल पर मुहर नहीं लगी है, तौबा और ईमान का दरवाज़ा खुला है। अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 72-76 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 74
सूरा यूनुस आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ज़रा ग़ौर तो करो फिर हमने नूह के बाद…सूरा आयत 74/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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