अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अल-फ़राश (الفراش): वह कीड़ा/पतंगा जो रात में आग की ओर बढ़ता है और उसमें गिरकर जल जाता है।
- अल-मब्सूस (المبثوث): बिखरा हुआ, इधर-उधर फैला हुआ, तितर-बितर।
तफ़सीर (व्याख्या):
उस दिन का दृश्य अत्यंत भयावह और हैरतअंगेज़ होगा जब लोग क़ब्रों से उठकर हश्र के मैदान की ओर भागेंगे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस दिन लोग बिखरे हुए पतंगों की तरह होंगे। जिस प्रकार पतंगे बिना किसी दिशा के इधर-उधर भटकते हैं, आग की चमक की ओर खिंचे चले जाते हैं और अंततः उसमें गिरकर जल जाते हैं, ठीक उसी प्रकार उस दिन लोग घबराहट, भय और बेचैनी में इधर-उधर भागेंगे, किसी को कोई रास्ता नहीं सूझेगा, और वे अपने कर्मों के हिसाब के लिए अल्लाह के सामने खड़े होने को मजबूर होंगे।
यह तशबीह (उदाहरण) बताती है कि उस दिन लोग कितने कमज़ोर, बेबस और परेशान होंगे। जैसे पतंगा आग की तरफ़ खुद को झोंक देता है, वैसे ही लोग उस दिन अपने अंजाम की तरफ़ बढ़ेंगे, लेकिन उनके पास कोई सहारा नहीं होगा। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया का जीवन अस्थायी है, और असली जीवन आख़िरत का है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस दिशा की ओर भाग रहे हैं। क्या हम उस दिन की तैयारी कर रहे हैं जब कोई भी किसी की मदद नहीं कर सकेगा? अल्लाह तआला ने हमें इस दिन से डराया है ताकि हम अपने कर्मों को सुधारें, नेकी की राह अपनाएँ और अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें। यह डरावना दृश्य हमें सचेत करता है कि आज हम जो भी करेंगे, उसका हिसाब उस दिन होगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, ताकि उस दिन हम पतंगों की तरह बिखरे और परेशान न हों, बल्कि अल्लाह की रहमत के साये में जन्नत के मेहमान बनें। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और उस दिन की परेशानियों से बचाए। आमीन।
📜 आयत 2-6 — अल-क़ारिया
अनुवाद — अल-क़ारिया 4
सूरा अल-क़ारिया आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन लोग (मैदाने हश्र में) टिड्डियों की तरह फैले…सूरा आयत 4/11 — अल-क़ारिया القارعة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ारिया सुनें, अल-क़ारिया अनुवाद, अल-क़ारिया mp3, अल-क़ारिया pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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