Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَرَهْطِي: मेरा क़बीला, मेरे रिश्तेदार और मेरी क़ौम के लोग।
- أَعَزُّ: अधिक प्रतिष्ठित, अधिक सम्मानित, अधिक शक्तिशाली।
- ظِهْرِيًّا: पीठ के पीछे डाल दिया, अनदेखा कर दिया, त्याग दिया।
- مُحِيطٌ: घेरने वाला, पूरी तरह से अवगत, हर चीज़ को अपने ज्ञान और शक्ति से घेरे हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! क्या मेरा क़बीला और मेरे रिश्तेदार तुम्हारी नज़र में अल्लाह से ज़्यादा इज़्ज़त वाले और ताक़तवर हैं? तुम लोग मेरी बात इसलिए नहीं मानते क्योंकि मेरा कोई ज़बरदस्त सरपरस्त तुम्हारे बीच नहीं है, और तुमने अल्लाह तआला के हुक्म को अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया है, यानी उसे बिल्कुल अनदेखा कर दिया है। न तो तुम उसके आदेशों पर अमल करते हो और न ही उसकी मनाही से बाज़ आते हो। तुमने अल्लाह के साथ यह सलूक किया कि जैसे कोई चीज़ पीठ के पीछे फेंक दी जाए और उसकी कोई परवाह न की जाए।"
फिर हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें डराते हुए कहा: "मेरा रब हर उस चीज़ को जानता है जो तुम करते हो। वह तुम्हारे सारे कर्मों को अपने ज्ञान से घेरे हुए है। उससे तुम्हारी कोई छोटी या बड़ी हरकत छिपी नहीं है। तुम्हारा कोई भी काम उसकी नज़र से बाहर नहीं है, और वह तुम्हें इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।"
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की अज़मत और उसका दर्जा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला की इज़्ज़त और अज़मत किसी भी इंसान, क़बीले या रिश्तेदारी से कहीं बढ़कर है। मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की रज़ा को हर रिश्ते और हर रिश्तेदारी पर मुक़द्दम रखे।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: अल्लाह तआला हर काम को देख रहा है और हर बात को जान रहा है। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और वह गुनाहों से बचता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को अंदर से सुधारती है और उसे नेक रास्ते पर चलाती है।
- हक़ बोलने में निडरता: हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने सच बोलने में कोई हिचकिचाहट नहीं की, चाहे वह उनके अपने रिश्तेदार ही क्यों न हों। यह हमारे लिए सबक़ है कि हक़ और सच की बात कहने में हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए।
- दुनिया और आख़िरत दोनों में जवाबदेही: अल्लाह तआला इंसान के कर्मों का हिसाब इस दुनिया में भी ले सकता है और आख़िरत में तो उसका हिसाब पक्का है। यह विश्वास इंसान को सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देता है और उसे बुराई से रोकता है।
- अल्लाह की तरफ़ रुजू करना: जब इंसान को यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह ही सब कुछ जानता है और वही सबसे बड़ा है, तो वह अपनी हर ज़रूरत और हर मुश्किल में सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ रुजू करता है। यही इंसान की कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 90-94 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 92
सूरा हूद आयत 92 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम क्या मेरे कबीले का…सूरा आयत 92/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 90–94. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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