यूसुफ · 110/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
حَتَّىٰ إِذَا اسْتَيْأَسَ الرُّسُلُ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ قَدْ كُذِبُوا جَاءَهُمْ نَصْرُنَا فَنُجِّيَ مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُنَا عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِمِينَ ۝١١٠
Hattaaa izas tai`asar Rusulu wa zannooo annahum qad kuziboo jaaa`ahum nas runaa fanujjiya man nashaaa`u wa laa yuraddu baasunna `anil qawmil mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
पहले के पैग़म्बरो ने तबलीग़े रिसालत यहाँ वक कि जब (क़ौम के ईमान लाने से) पैग़म्बर मायूस हो गए और उन लोगों ने समझ लिया कि वह झुठलाए गए तो उनके पास हमारी (ख़ास) मदद आ पहुँची तो जिसे हमने चाहा नजात दी और हमारा अज़ाब गुनेहगार लोगों के सर से तो टाला नहीं जाता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَيْأَسَ: निराश हो जाना, आशा छोड़ देना।
  • ظَنُّوا: यहाँ इसका अर्थ है "निश्चित जान लेना" या "यक़ीन कर लेना"।
  • كُذِبُوا: झुठलाए जाना (अर्थात् उनसे झूठ बोला गया या उन्हें झुठलाया गया)।
  • بَأْسُنَا: हमारी यातना, हमारा कठोर दंड।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! आप उन लोगों के लिए जल्दबाज़ी न करें जो आपको झुठला रहे हैं। अल्लाह की यही सुन्नत (रीति) रही है कि वह अपने रसूलों की मदद को कुछ देर के लिए टालता है, क्योंकि उसमें एक गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) होती है। जब रसूल अपनी क़ौम से पूरी तरह निराश हो जाते हैं और उन्हें यक़ीन हो जाता है कि उनकी क़ौम ने उन्हें झुठला दिया है और अब उनके ईमान लाने की कोई उम्मीद नहीं बची, और साथ ही काफ़िर यह समझने लगते हैं कि रसूलों ने जो सज़ा की धमकी दी थी वह झूठ थी, ठीक उसी सबसे कठिन समय में अल्लाह की मदद आती है। तब अल्लाह अपने रसूलों और उन पर ईमान लाने वालों को बचा लेता है, और जब अल्लाह की यातना आती है तो उसे किसी भी अपराधी क़ौम से टाला नहीं जा सकता। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी तसल्ली है जो अल्लाह के रास्ते में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की मदद में देरी उसकी हिकमत का हिस्सा है; वह सही समय पर ही मदद भेजता है, चाहे वह कितना भी देर से क्यों न आए। यह मुसलमानों को सब्र और भरोसे की शिक्षा देता है।
  2. यह आयत बताती है कि सबसे बड़ी मुश्किल के समय में ही अल्लाह की मदद आती है, इसलिए निराश होना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
  3. अल्लाह की यातना से बचना असंभव है जब वह किसी ज़ालिम क़ौम पर आती है, इसलिए इंसान को अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
  4. यह आयत नबी ﷺ और उनके साथियों के लिए एक बड़ी तसल्ली है कि जिस तरह पिछले रसूलों को सब्र का फल मिला, उसी तरह उन्हें भी अल्लाह की मदद ज़रूर मिलेगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 108-111 — यूसुफ

108قُلْ هَٰذِهِ سَبِيلِي أَدْعُو إِلَى اللَّهِ ۚ عَلَىٰ بَصِيرَةٍ أَنَا وَمَنِ اتَّبَعَنِي ۖ وَسُبْحَانَ اللَّهِ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ
109وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِم مِّنْ أَهْلِ الْقُرَىٰ ۗ أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۗ وَلَدَارُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ اتَّقَوْا ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे पहले भी हम गाँव ही के रहने वाले कुछ मर्दों को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा किए है कि हम उन पर वही नाज़िल करते थे तो क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि ग़ौर करते कि जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं उनका अन्जाम क्या हुआ और जिन लोगों ने परहेज़गारी एख्तेयार की उनके लिए आख़िरत का घर (दुनिया से) यक़ीनन कहीं ज्यादा बेहतर है क्या ये लोग नहीं समझते
110حَتَّىٰ إِذَا اسْتَيْأَسَ الرُّسُلُ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ قَدْ كُذِبُوا جَاءَهُمْ نَصْرُنَا فَنُجِّيَ مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُنَا عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِمِينَ
पहले के पैग़म्बरो ने तबलीग़े रिसालत यहाँ वक कि जब (क़ौम के ईमान लाने से) पैग़म्बर मायूस हो गए और उन लोगों ने समझ लिया कि वह झुठलाए गए तो उनके पास हमारी (ख़ास) मदद आ पहुँची तो जिसे हमने चाहा नजात दी और हमारा अज़ाब गुनेहगार लोगों के सर से तो टाला नहीं जाता
111لَقَدْ كَانَ فِي قَصَصِهِمْ عِبْرَةٌ لِّأُولِي الْأَلْبَابِ ۗ مَا كَانَ حَدِيثًا يُفْتَرَىٰ وَلَٰكِن تَصْدِيقَ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَتَفْصِيلَ كُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
इसमें शक़ नहीं कि उन लोगों के किस्सों में अक़लमन्दों के वास्ते (अच्छी ख़ासी) इबरत (व नसीहत) है ये (क़ुरान) कोई ऐसी बात नहीं है जो (ख्वाहामा ख्वाह) गढ़ ली जाए बल्कि (जो आसमानी किताबें) इसके पहले से मौजूद हैं उनकी तसदीक़ है और हर चीज़ की तफसील और ईमानदारों के वास्ते (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
110आयत

अनुवाद — यूसुफ 110

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Tuesday, August 18, 2026

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