यूसुफ · 19/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَجَاءَتْ سَيَّارَةٌ فَأَرْسَلُوا وَارِدَهُمْ فَأَدْلَىٰ دَلْوَهُ ۖ قَالَ يَا بُشْرَىٰ هَٰذَا غُلَامٌ ۚ وَأَسَرُّوهُ بِضَاعَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَعْمَلُونَ ۝١٩
Wa jaaa`at saiyaaratun fa-arsaloo waaridahum fa adlaa dalwah; qaala yaa bushraa haaza ghulaam; wa asarroohu bi-daa`ah; wallaahu `aleemum bimaa ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ख़ुदा की शान देखो) एक काफ़ला (वहाँ) आकर उतरा उन लोगों ने अपने सक्के (पानी भरने वाले) को (पानी भरने) भेजा ग़रज़ उसने अपना डोल डाला ही था (कि यूसुफ उसमें बैठे और उसने ख़ीचा तो निकल आए) वह पुकारा आहा ये तो लड़का है और काफला वालो ने यूसुफ को क़ीमती सरमाया समझकर छिपा रखा हालॉकि जो कुछ ये लोग करते थे ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफ था
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَيَّارَةٌ (सय्यारा): यात्रियों का क़ाफ़िला या कारवाँ।
  • وَارِدَهُمْ (वारिदहुम): उनका पानी लाने वाला व्यक्ति, जो पानी के स्रोत पर जाता है।
  • فَأَدْلَىٰ (फ़अद्ला): उसने अपनी डोल (बाल्टी) लटकाई।
  • يَا بُشْرَىٰ (या बुशरा): "मेरी ख़ुशख़बरी!" — यह खुशी का उद्गार है।
  • وَأَسَرُّوهُ (व असर्रूहु): उन्होंने उसे छिपा लिया।
  • بِضَاعَةً (बिदा'अतन): व्यापार का माल या सौदा।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को उनके भाइयों ने अंधेरे कुएँ में डाल दिया, तो अल्लाह ने उनकी हिफ़ाज़त का इंतज़ाम किया। कुछ समय बाद वहाँ से एक क़ाफ़िला गुज़रा। उन्होंने अपने पानी लाने वाले आदमी को पानी लाने के लिए भेजा। उसने अपनी बाल्टी कुएँ में लटकाई, तो यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) उस बाल्टी से चिमट गए। जब उसने बाल्टी खींची और देखा कि एक ख़ूबसूरत बच्चा उससे लिपटा हुआ है, तो वह खुशी से चिल्ला उठा: "वाह! क्या ख़ुशख़बरी है! यह तो एक लड़का है!"

उस आदमी और उसके साथियों ने यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) को बाक़ी क़ाफ़िले वालों से छिपा लिया, ताकि वे इस "कीमती माल" में उनके साथी न बनें। उन्होंने कहा कि यह हमारा व्यापारिक सामान (बिदा'अत) है जो हमें मिला है, और उन्होंने उसे मिस्र में बेचने का इरादा किया। कुछ रिवायात में आता है कि यूसuf़ के भाइयों ने भी आकर कहा कि यह हमारा भागा हुआ ग़ुलाम है, और उन्होंने उसे थोड़े से दामों पर बेच दिया। यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) ने डर के मारे कुछ नहीं कहा, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उन्हें मार न दिया जाए।

अल्लाह तआला को उन सबकी चालों और साज़िशों का पूरा इल्म था। वह जानता था कि ये लोग यूसuf़ के साथ क्या कर रहे हैं, और उसकी यही निगरानी और हिफ़ाज़त यूसuf़ के भविष्य की सफलता का ज़रिया बनी।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह की हिफ़ाज़त: जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्तों से निकालता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) अंधेरे कुएँ में थे, लेकिन अल्लाह ने उनके लिए क़ाफ़िले का रास्ता बनाया।
  2. मुसीबत में सब्र: यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) ने कुएँ में डाले जाने के बाद भी सब्र किया और अल्लाह पर भरोसा रखा। इसका नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें ऊँचा मुक़ाम अता किया।
  3. अल्लाह का इल्म: अल्लाह को हर चीज़ का इल्म है — चाहे वो छिपी हो या खुली। लोगों की साज़िशें और चालें अल्लाह से छिपी नहीं हैं, और वह सही वक़्त पर अपना फ़ैसला सुनाता है।
  4. दुनिया की बेहक़ीक़त: यह घटना हमें सिखाती है कि दुनिया के लोग किसी को "माल" या "सौदा" समझ सकते हैं, लेकिन अल्लाह की नज़र में हर इंसान इज़्ज़त वाला है। हमें किसी को नीची नज़र से नहीं देखना चाहिए।
  5. अल्लाह की तदबीर: इंसान चाहे जितनी चालें चले, अल्लाह की तदबीर (योजना) सबसे ऊपर होती है। यूसuf़ (अलैहिस्सलाम) की कहानी का हर पहलू इसी हक़ीक़त की गवाही देता है।
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📜 आयत 17-21 — यूसुफ

17قَالُوا يَا أَبَانَا إِنَّا ذَهَبْنَا نَسْتَبِقُ وَتَرَكْنَا يُوسُفَ عِندَ مَتَاعِنَا فَأَكَلَهُ الذِّئْبُ ۖ وَمَا أَنتَ بِمُؤْمِنٍ لَّنَا وَلَوْ كُنَّا صَادِقِينَ
और कहने लगे ऐ अब्बा हम लोग तो जाकर दौड़ने लगे और यूसुफ को अपने असबाब के पास छोड़ दिया इतने में भेड़िया आकर उसे खा गया हम लोग अगर सच्चे भी हो मगर आपको तो हमारी बात का यक़ीन आने का नहीं
18وَجَاءُوا عَلَىٰ قَمِيصِهِ بِدَمٍ كَذِبٍ ۚ قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ وَاللَّهُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ
और ये लोग यूसुफ के कुरते पर झूठ मूठ (भेड़) का खून भी (लगा के) लाए थे, याक़ूब ने कहा (भेड़िया ने ही खाया (बल्कि) तुम्हारे दिल ने तुम्हारे बचाओ के लिए एक बात गढ़ी वरना कुर्ता फटा हुआ ज़रुर होता फिर सब्र व शुक्र है और जो कुछ तुम बयान करते हो उस पर ख़ुदा ही से मदद माँगी जाती है
19وَجَاءَتْ سَيَّارَةٌ فَأَرْسَلُوا وَارِدَهُمْ فَأَدْلَىٰ دَلْوَهُ ۖ قَالَ يَا بُشْرَىٰ هَٰذَا غُلَامٌ ۚ وَأَسَرُّوهُ بِضَاعَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और (ख़ुदा की शान देखो) एक काफ़ला (वहाँ) आकर उतरा उन लोगों ने अपने सक्के (पानी भरने वाले) को (पानी भरने) भेजा ग़रज़ उसने अपना डोल डाला ही था (कि यूसुफ उसमें बैठे और उसने ख़ीचा तो निकल आए) वह पुकारा आहा ये तो लड़का है और काफला वालो ने यूसुफ को क़ीमती सरमाया समझकर छिपा रखा हालॉकि जो कुछ ये लोग करते थे ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफ था
20وَشَرَوْهُ بِثَمَنٍ بَخْسٍ دَرَاهِمَ مَعْدُودَةٍ وَكَانُوا فِيهِ مِنَ الزَّاهِدِينَ
(जब यूसुफ के भाइयों को ख़बर लगी तो आ पहुँचे और उनको अपना ग़ुलाम बताया और उन लोगों ने यूसुफ को गिनती के खोटे चन्द दरहम (बहुत थोड़े दाम पर बेच डाला) और वह लोग तो यूसुफ से बेज़ार हो ही रहे थे
21وَقَالَ الَّذِي اشْتَرَاهُ مِن مِّصْرَ لِامْرَأَتِهِ أَكْرِمِي مَثْوَاهُ عَسَىٰ أَن يَنفَعَنَا أَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًا ۚ وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ وَلِنُعَلِّمَهُ مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ ۚ وَاللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰ أَمْرِهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(यूसुफ को लेकर मिस्र पहुँचे और वहाँ उसे बड़े नफे में बेच डाला) और मिस्र के लोगों से (अज़ीजे मिस्र) जिसने (उनको ख़रीदा था अपनी बीवी (ज़ुलेख़ा) से कहने लगा इसको इज्ज़त व आबरु से रखो अजब नहीं ये हमें कुछ नफा पहुँचाए या (शायद) इसको अपना बेटा ही बना लें और यू हमने यूसुफ को मुल्क (मिस्र) में (जगह देकर) क़ाबिज़ बनाया और ग़रज़ ये थी कि हमने उसे ख्वाब की बातों की ताबीर सिखायी और ख़ुदा तो अपने काम पर (हर तरह के) ग़ालिब व क़ादिर है मगर बहुतेरे लोग (उसको) नहीं जानते
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अनुवाद — यूसुफ 19

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Tuesday, August 18, 2026

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