Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَمِيصِهِ (क़मीस): कुर्ता या कमीज़।
- بِدَمٍ كَذِبٍ (बिदमिन कज़िब): झूठा खून, यानी वह खून जो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का नहीं था, बल्कि किसी और जानवर का था।
- سَوَّلَتْ (सव्वलत): सुशोभित किया, बहकाया, मन में अच्छा दिखाया।
- فَصَبْرٌ جَمِيلٌ (फ़सब्रुन जमील): तो (मेरा काम) सुंदर धैर्य है, यानी ऐसा धैर्य जिसमें कोई शिकायत न हो।
- الْمُسْتَعَانُ (अल-मुस्तआन): वह जिससे सहायता माँगी जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उन्हें कुएँ में डाल दिया, तो वे अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के पास रोते-धोते आए और झूठा दावा किया कि भेड़िये ने यूसुफ़ को खा लिया। अपने इस झूठ को सच साबित करने के लिए वे यूसुफ़ की कमीज़ को किसी दूसरे जानवर के खून से रंगकर लाए, ताकि यह सबूत बने कि यूसुफ़ पर भेड़िये ने हमला किया था। लेकिन अल्लाह की कुदरत देखिए कि यही कमीज़ उनके झूठ को उजागर करने वाली बन गई, क्योंकि कमीज़ बिल्कुल सलामत थी और उसमें कहीं से भी फटने या नोचने का कोई निशान नहीं था। अगर भेड़िये ने सच में हमला किया होता तो कमीज़ ज़रूर फटी हुई होती।
याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने यह देखते ही उनके झूठ को भाँप लिया और फ़रमाया: "बात वैसी नहीं है जैसा तुम कह रहे हो। बल्कि तुम्हारे नफ़्स (मन) ने तुम्हारे लिए एक बुरा काम सुंदर बनाकर पेश किया, और तुमने उसे कर डाला। अब मेरे लिए केवल सुंदर धैर्य ही उचित है — ऐसा धैर्य जिसमें न तो शिकायत हो और न ही बेचैनी। और अल्लाह ही से मैं सहायता माँगता हूँ उस बात पर जो तुम बयान कर रहे हो।"
याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों के इस जघन्य कृत्य के बावजूद न तो उन्हें कोसा, न ही अल्लाह से शिकायत की, बल्कि पूरे धैर्य और भरोसे के साथ अल्लाह की ओर रुजू किया। यह उनके सब्र और अल्लाह पर भरोसे की सबसे बड़ी मिसाल है।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- झूठ का सबूत भी झूठ होता है: अल्लाह की कुदरत है कि झूठे लोग चाहे कितनी भी चालाकी कर लें, उनका झूठ किसी न किसी तरह ज़रूर पकड़ा जाता है। सच्चाई हमेशा ऊपर रहती है।
- सब्र का सुंदर तरीक़ा: मुसीबत में सब्र करने का मतलब यह नहीं कि इंसान बेचैन हो या शिकायत करे, बल्कि सुंदर सब्र वह है जिसमें इंसान अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहे और उसी से मदद माँगे।
- अल्लाह पर भरोसा: जब इंसान पर कोई मुसीबत आए, तो उसे लोगों से शिकायत करने के बजाय अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए। याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने यही सिखाया।
- बुराई के बाद भी अच्छा व्यवहार: याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों के साथ नरमी से बात की और उन्हें बुरा-भला नहीं कहा। यह हमें सिखाता है कि गुस्से में भी हमें अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखना चाहिए।
- मुसीबत में अल्लाह की मदद: जो इंसान सब्र और अल्लाह पर भरोसे के साथ मुसीबत का सामना करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता और उसके लिए राह निकालता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का अंजाम इसका सबसे बड़ा सबूत है।
📜 आयत 16-20 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 18
सूरा यूसुफ आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग यूसुफ के कुरते पर झूठ मूठ (भेड़)…सूरा आयत 18/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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