Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- السِّجْنُ: क़ैदख़ाना, जेल।
- أَحَبُّ إِلَيَّ: मुझे अधिक पसंद है।
- تَصْرِفْ: तुम दूर कर दो, हटा दो।
- كَيْدَهُنَّ: उन (स्त्रियों) का चाल-चक्र, धोखा और जाल।
- أَصْبُ: मैं झुक जाऊँ, मेरा दिल माइल हो जाए।
- الْجَاهِلِينَ: अज्ञानी, वे लोग जो अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करते हैं।
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जब देखा कि उनके सामने दो ही रास्ते हैं—या तो उन स्त्रियों की बुरी चाल में फँसकर गुनाह करें, या फिर जेल की ज़िंदगी बर्दाश्त करें—तो उन्होंने अल्लाह की पनाह माँगते हुए कहा: "ऐ मेरे रब! जेल मुझे उस चीज़ से कहीं ज़्यादा पसंद है, जिसकी तरफ़ ये स्त्रियाँ मुझे बुला रही हैं।" यानी उन्होंने गुनाह और अल्लाह की नाफ़रमानी की बजाय जेल की तकलीफ़ को चुना।
फिर उन्होंने अल्लाह से दुआ की: "और अगर तूने मुझसे उनके मक्र (चाल-चक्र) को न हटाया, तो मैं उनकी तरफ़ झुक जाऊँगा और उन अज्ञानियों में से हो जाऊँगा जो अल्लाह के आदेशों को नहीं समझते।" यह उनकी तरफ़ से अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी और लाचारी का इज़हार था, और साथ ही यह सबक भी था कि इंसान भले ही नेक हो, लेकिन उसे हमेशा अल्लाह ही से मदद माँगनी चाहिए।
यह दुआ दरअसल अल्लाह पर पूरा भरोसा और उसके सामने अपनी बेबसी ज़ाहिर करने की सबसे खूबसूरत मिसाल है। हज़रत यूसुफ़ ने साफ़ कहा कि मैं अपनी ताक़त से इनके जाल से नहीं बच सकता, मुझे तेरी ही मदद चाहिए। अगर तूने मुझे न बचाया, तो मैं गुनाह में पड़ जाऊँगा। इससे पता चलता है कि इंसान को अपनी नेकी पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा अल्लाह से हिफ़ाज़त की दुआ माँगते रहना चाहिए।
फ़ायदे (सबक़):
- गुनाह से बचने के लिए तकलीफ़ उठाना बेहतर है: हज़रत यूसुफ़ ने जेल को चुना, ताकि अल्लाह की नाफ़रमानी से बच सकें। यह सिखाता है कि दुनिया की किसी भी तकलीफ़ से गुज़रना गुनाह में पड़ने से कहीं बेहतर है।
- अल्लाह से मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, बल्कि समझदारी है: इंसान चाहे कितना भी नेक हो, उसे हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उससे हिफ़ाज़त की दुआ करनी चाहिए। यही सच्ची तौहीद (एकेश्वरवाद) है।
- बुरे माहौल से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए: जब इंसान देखे कि उसके आस-पास का माहौल गुनाह की तरफ़ ले जा रहा है, तो उसे उस माहौल से निकलने की कोशिश करनी चाहिए, भले ही उसके लिए कुछ क़ुर्बानी देनी पड़े।
- अपनी कमज़ोरी का एहसास अल्लाह से रिश्ता मज़बूत करता है: जब बंदा अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी ज़ाहिर करता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे बुराई से बचाता है। हज़रत यूसुफ़ की यह दुआ अल्लाह ने क़ुबूल की और उन्हें बुराई से महफ़ूज़ रखा।
- पाकीज़गी और इज़्ज़त अल्लाह के पास सबसे बड़ी है: दुनिया की चीज़ें और लज़्ज़तें चाहे कितनी भी आकर्षक हों, लेकिन अल्लाह की रज़ा और पाकीज़गी ही असली कामयाबी है। यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने इसी को चुना और अल्लाह ने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों की इज़्ज़त अता की।
📜 आयत 31-35 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 33
सूरा यूसुफ आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरे पालने वाले जिस बात की ये औरते मुझ…सूरा आयत 33/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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