Wattab`tu millata aabaaa`eee Ibraaheema wa Ishaaqa wa Ya`qoob; maa kaana lanaaa an nushrika billaahi min shai` zaalikamin fadlil laahi `alainaa wa `alan naasi wa laakinna aksaran naasi laa yashkuroon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और मैं तो अपने बाप दादा इबराहीम व इसहाक़ व याक़ूब के मज़हब पर चलने वाला हूँ मुनासिब नहीं कि हम ख़ुदा के साथ किसी चीज़ को (उसका) शरीक बनाएँ ये भी ख़ुदा की एक बड़ी मेहरबानी है हम पर भी और तमाम लोगों पर मगर बहुतेरे लोग उसका शुक्रिया (भी) अदा नहीं करते
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اور اپنے باپ دادا ابراہیم اور اسحاق اور یعقوب کے مذہب پر چلتا ہوں۔ ہمیں شایاں نہیں ہے کہ کسی چیز کو خدا کے ساتھ شریک بنائیں۔ یہ خدا کا فضل ہے ہم پر بھی اور لوگوں پر بھی ہے لیکن اکثر لوگ شکر نہیں کرتے
और मैं तो अपने बाप दादा इबराहीम व इसहाक़ व याक़ूब के मज़हब पर चलने वाला हूँ मुनासिब नहीं कि हम ख़ुदा के साथ किसी चीज़ को (उसका) शरीक बनाएँ ये भी ख़ुदा की एक बड़ी मेहरबानी है हम पर भी और तमाम लोगों पर मगर बहुतेरे लोग उसका शुक्रिया (भी) अदा नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
مِلَّةَ: धर्म, पद्धति, मार्ग।
آبَائِي: मेरे पूर्वज, बाप-दादा।
مَا كَانَ لَنَا: हमारे लिए उचित नहीं, हमें शोभा नहीं देता।
مِن شَيْءٍ: किसी भी प्रकार की (शिर्क)।
فَضْلِ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और अनुग्रह।
तफसीर (व्याख्या):
हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उस समय यह बात कही जब वे मिस्र के अज़ीज़ (शासक) के दरबार में थे और वहाँ के लोगों ने उन्हें बड़ा पद दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैंने अपने पूर्वजों — इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब (अलैहिमुस्सलाम) — के धर्म का अनुसरण किया है, जो पूर्ण एकेश्वरवाद (तौहीद) का धर्म है। मैंने उन्हीं के मार्ग को अपनाया है, जो अल्लाह की इबादत में किसी को भी उसका साझी नहीं बनाता।
यह हमारे लिए कभी उचित नहीं था कि हम अल्लाह के साथ किसी चीज़ को साझी ठहराएँ। यह बात हमारे परिवार की पहचान रही है — नबियों की संतान होने के नाते हम शिर्क से पाक और मासूम रहे हैं। यह तौहीद और ईमान, जो हमें प्राप्त है, अल्लाह की ओर से हम पर और सभी लोगों पर एक बड़ी कृपा है। उसने हमें यह मार्ग दिखाया और अपने नबियों के माध्यम से लोगों तक यही संदेश पहुँचाया। लेकिन अधिकांश लोग इस कृपा का शुक्र अदा नहीं करते — वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं और उसकी इबादत के बजाय दूसरों की ओर मुड़ जाते हैं।
फ़ायदे (सबक):
तौहीद ही सच्चा धर्म है: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की एकता (तौहीद) ही वह मूल सिद्धांत है जिस पर सभी नबियों का धर्म टिका है। इब्राहीम से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी नबियों का संदेश एक ही था — केवल अल्लाह की इबादत करो।
नबियों की संतान होना गर्व की बात नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी है: हज़रत यूसुफ़ ने अपने पूर्वजों का ज़िक्र करके यह नहीं दिखाया कि हम बड़े ख़ानदान से हैं, बल्कि यह बताया कि हमारा परिवार हमेशा से शिर्क से दूर रहा है। यह हमें सिखाता है कि अच्छे ख़ानदान की पहचान अमल से होती है, सिर्फ़ नाम से नहीं।
शुक्रगुज़ारी की कमी: अधिकांश लोग अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं। यह आयत हमें याद दिलाती है कि ईमान और तौहीद की नेमत सबसे बड़ी नेमत है, और हमें इसका शुक्र अदा करना चाहिए — न केवल ज़ुबान से, बल्कि अमल से भी।
हर हाल में अल्लाह पर भरोसा: जब हज़रत यूसुफ़ जेल से निकलकर शाही दरबार में पहुँचे, तब भी उन्होंने अपनी पहचान अल्लाह के धर्म से जोड़ी। यह सिखाता है कि कठिनाई और आसानी — हर हाल में हमें अपने ईमान पर क़ायम रहना चाहिए और उसे छिपाना नहीं चाहिए।
कि कुछ मियाद के लिए उनको क़ैद ही करे दें और यूसुफ के साथ और भी दो जवान आदमी (क़ैद ख़ाने) में दाख़िल हुए (चन्द दिन के बाद) उनमें से एक ने कहा कि मैने ख्वाब में देखा है कि मै (शराब बनाने के वास्ते अंगूर) निचोड़ रहा हूँ और दूसरे ने कहा (मै ने भी ख्वाब में) अपने को देखा कि मै अपने सर पर रोटिया उठाए हुए हूँ और चिड़ियाँ उसे खा रही हैं (यूसुफ) हमको उसकी ताबीर (मतलब) बताओ क्योंकि हम तुमको यक़ीनन नेकी कारों से समझते हैं
यूसुफ ने कहा जो खाना तुम्हें (क़ैद ख़ाने से) दिया जाता है वह आने भी न पाएगा कि मै उसके तुम्हारे पास आने के क़ब्ल ही तुम्हे उसकी ताबीर बताऊँगा ये ताबीरे ख्वाब भी उन बातों के साथ है जो मेरे परवरदिगार ने मुझे तालीम फरमाई है मैं उन लोगों का मज़हब छोड़ बैठा हूँ जो ख़ुदा पर ईमान नहीं लाते और वह लोग आख़िरत के भी मुन्किर है
और मैं तो अपने बाप दादा इबराहीम व इसहाक़ व याक़ूब के मज़हब पर चलने वाला हूँ मुनासिब नहीं कि हम ख़ुदा के साथ किसी चीज़ को (उसका) शरीक बनाएँ ये भी ख़ुदा की एक बड़ी मेहरबानी है हम पर भी और तमाम लोगों पर मगर बहुतेरे लोग उसका शुक्रिया (भी) अदा नहीं करते
तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर बस उन चन्द नामों ही को परसतिश करते हो जिन को तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिया है ख़ुदा ने उनके लिए कोई दलील नहीं नाज़िल की हुकूमत तो बस ख़ुदा ही के वास्ते ख़ास है उसने तो हुक्म दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो यही साीधा दीन है मगर (अफसोस) बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
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