अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آثَرَكَ: तुम्हें हम पर श्रेष्ठता दी, तुम्हें हमसे बढ़कर सम्मानित किया।
- لَخَاطِئِينَ: निश्चय ही हम गलती करने वाले, कसूरवार और पापी थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के सामने अपनी पहचान प्रकट कर दी और उन्हें क्षमा कर दिया, तो भाइयों ने अपने किए पर पछतावे और शर्मिंदगी के साथ कहा: "अल्लाह की क़सम! अल्लाह ने तुम्हें हम पर श्रेष्ठता दी है और तुम्हें ऐसे गुणों से नवाज़ा है—ज्ञान, धैर्य, सहनशीलता, क्षमा और उच्च चरित्र—जो हममें नहीं हैं। हम तुम्हारे साथ जो कुछ भी करते रहे, वह हमारी भूल, हमारी गलती और हमारा जानबूझकर किया गया पाप था। हम तुम्हारे और तुम्हारे भाई (बिन्यामीन) के साथ अत्याचार और बुराई करने वाले थे।"
यह उनका इक़रार (स्वीकारोक्ति) था—उन्होंने अपनी गलती मानी, अपने किए पर पछताया, और यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बड़ाई और उनके अल्लाह द्वारा दिए गए सम्मान को स्वीकार किया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनका किया हुआ काम जानबूझकर किया गया था, न कि भूल से।
फ़ायदे (सबक):
- गलती मानना और पछताना: इंसान को चाहिए कि जब उससे कोई गलती हो जाए, तो उसे खुलकर स्वीकार करे और अल्लाह से माफ़ी माँगे। यही इंसान की इज़्ज़त को बढ़ाता है, जैसे यूसुफ़ के भाइयों ने अपनी गलती मानकर दिल की सफ़ाई दिखाई।
- क्षमा की महानता: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों को माफ़ कर दिया, जिससे हमें सीख मिलती है कि क्षमा करना सबसे बड़ा गुण है। क्षमा करने से दिलों में मोहब्बत पैदा होती है और रिश्ते सुधरते हैं।
- अल्लाह की श्रेष्ठता का स्वीकार: जब अल्लाह किसी को कोई ख़ूबी या सम्मान देता है, तो हमें उसे स्वीकार करना चाहिए और उस पर ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। भाइयों ने यूसुफ़ की श्रेष्ठता को स्वीकार किया, जो उनके दिल की पाकीज़गी की निशानी थी।
- पश्चाताप का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे इंसान कितनी भी बड़ी गलती कर ले, अगर वह सच्चे दिल से तौबा करे और अल्लाह से माफ़ी माँगे, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत की निशानी है।
- इस्लाम में इंसाफ़ और सच्चाई: इस्लाम सिखाता है कि इंसान को सच बोलना चाहिए और अपनी गलती को छिपाना नहीं चाहिए। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की मोहब्बत और माफ़ी के क़रीब ले जाता है।
📜 आयत 89-93 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 91
सूरा यूसुफ आयत 91 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे ख़ुदा की क़सम तुम्हें ख़ुदा ने…सूरा आयत 91/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 89–93. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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