अर-राद · 9/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْكَبِيرُ الْمُتَعَالِ ۝٩
Aalimul Ghaibi wash shahaadatil Kaabeerul Muta`aal
📖 हिंदी अर्थ
(वही) बातिन (छुपे हुवे) व ज़ाहिर का जानने वाला (सब से) बड़ा और आलीशान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَالِمُ الْغَيْبِ: वह (अल्लाह) जो छिपी हुई चीज़ों को जानता है, जो आँखों से ओझल हैं।
  • وَالشَّهَادَةِ: और जो प्रत्यक्ष और देखी जाने वाली चीज़ें हैं।
  • الْكَبِيرُ: महान, जिसकी ज़ात, नाम और सिफ़ात (गुण) सबसे बड़े हैं।
  • الْمُتَعَالِ: सर्वोच्च, जो अपनी मख़लूक़ (सृष्टि) से बिल्कुल ऊपर और बरतर है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की ज़ात के उन गुणों को बयान करती है जो हमारे ईमान की बुनियाद हैं। अल्लाह तआला उस हर चीज़ का इल्म रखता है जो हमारी निगाहों से छिपी है—चाहे वह ज़मीन की गहराइयों में हो, आसमानों की बुलंदियों में, दिलों के राज़ हों या भविष्य के हादसे। साथ ही वह उस हर चीज़ को भी जानता है जो हमारे सामने प्रत्यक्ष है, जिसे हम देखते और महसूस करते हैं। उसके इल्म से कोई चीज़ छोटी या बड़ी, छिपी या खुली, पोशीदा या आश्कारा—कुछ भी बाहर नहीं है।

वह الْكَبِيرُ (महान) है—उसकी ज़ात, उसके नाम और उसकी सिफ़ात सबसे बड़ी हैं। उसकी महानता के आगे हर चीज़ छोटी और हक़ीर है। वह الْمُتَعَالِ (सर्वोच्च) है—अपनी ज़ात, अपनी क़ुदरत और अपने ग़लबे (प्रभुत्व) के साथ अपनी सारी मख़लूक़ से ऊपर है। वह मख़लूक़ की सिफ़ात से पाक है, और उन झूठी बातों से भी पाक है जो मुशरिकीन उसके बारे में कहते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा रब हर चीज़ पर निगरान रखने वाला है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे छिपे और खुले हर अमल को जानता है, तो हमारे दिल में उसकी मोहब्बत और ख़ौफ़ दोनों पैदा होते हैं। यही ईमान हमें गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ रग़बत देता है। अल्लाह की महानता और सर्वोच्चता पर ग़ौर करने से इंसान का दिल उसके सामने झुक जाता है, और वह अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की कामयाबी और आख़िरत की नजात तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अर-राद

7وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ إِنَّمَا أَنتَ مُنذِرٌ ۖ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
8اللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ الْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُ ۖ وَكُلُّ شَيْءٍ عِندَهُ بِمِقْدَارٍ
और हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको ख़ुदा ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना (भी वही जानता है) और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे से है
9عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْكَبِيرُ الْمُتَعَالِ
(वही) बातिन (छुपे हुवे) व ज़ाहिर का जानने वाला (सब से) बड़ा और आलीशान है
10سَوَاءٌ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्श ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्श रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्श दिन दहाडें चला जा रहा हो
11لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِّن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَالٍ
(उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो मगर) उस अकेले के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान (फरिश्ते) मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म ख़ुदा से हिफाज़त करते हैं जो (नेअमत) किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें ख़ुदा हरगिज़ तग्य्युर नहीं डाला करता और जब ख़ुदा किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली और (सरपरस्त) है
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अनुवाद — अर-राद 9

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Tuesday, August 18, 2026

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