Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَنُخْرِجَنَّكُمْ: हम तुम्हें अवश्य निकाल देंगे।
- أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَا: या तुम हमारे धर्म में अवश्य लौट आओगे (अर्थात हमारे धर्म को अपना लोगे)।
- لَنُهْلِكَنَّ الظَّالِمِينَ: हम अत्याचारियों को अवश्य नष्ट कर देंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह के रसूल अपनी क़ौम के लोगों को सच्चाई और एकेश्वरवाद का संदेश देते रहे, तो काफ़िरों का धैर्य टूट गया। वे रसूलों से बहस और तर्क में हार चुके थे, इसलिए उन्होंने धमकी और दबाव का रास्ता अपनाया। उन्होंने अपने रसूलों से कहा: "हम तुम्हें अपनी धरती से अवश्य निकाल देंगे, या फिर तुम्हें हमारे धर्म में लौटना ही पड़ेगा।" यानी उन्होंने कसम खाकर कहा कि दो में से एक ही रास्ता है—या तो तुम जाओ या हमारे धर्म को अपनाओ। उनका यह कहना "लौट आओगे" इसलिए था क्योंकि वे चाहते थे कि रसूल उनके पूर्वजों के धर्म को अपना लें, हालाँकि रसूल कभी उस धर्म पर नहीं थे।
इस कठिन परिस्थिति में अल्लाह ने अपने रसूलों को सांत्वना और सहारा देने के लिए वह़्य (प्रकाशना) भेजी: "हम अत्याचारियों को अवश्य नष्ट कर देंगे।" यह अल्लाह की ओर से एक पक्का वादा था कि जिन लोगों ने सत्य का विरोध किया और रसूलों को धमकाया, उनका अंत विनाश ही होगा। यह वादा उन सभी काफ़िरों के लिए था जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र (इनकार) किया और ज़ुल्म (अत्याचार) किया।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह अपने नबियों और रसूलों को कभी अकेला नहीं छोड़ता; जब वे सबसे कठिन परिस्थितियों में होते हैं, तो अल्लाह उन्हें सहारा देता है और उनके दिलों को मज़बूत करता है।
- काफ़िरों की धमकियाँ और साज़िशें अल्लाह की योजना के आगे कुछ भी नहीं हैं; अल्लाह का वादा सच्चा है कि वह अत्याचारियों को नष्ट करेगा।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जब वे सत्य पर हों, तो उन्हें किसी की धमकी से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह उनके साथ है और अंतिम विजय सत्य का ही होता है।
- ज़ुल्म और कुफ़्र का अंजाम हमेशा विनाश होता है, जबकि सब्र और ईमान का अंजाम कामयाबी और इज़्ज़त है। यह हमें सिखाता है कि हमेशा सत्य और न्याय के साथ खड़े रहना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ।
📜 आयत 11-15 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 13
सूरा इब्राहीम आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों नें कुफ्र एख्तियार किया था अपने (वक्त…सूरा आयत 13/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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