इब्राहीम · 14/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْأَرْضَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ ۝١٤
Wa lanuskinan nakumul arda mim ba`dihim; zaalika liman khaafa maqaamee wa khaafa wa`eed
📖 हिंदी अर्थ
और उनकी हलाकत के बाद ज़रुर तुम्ही को इस सरज़मीन में बसाएगें ये (वायदा) महज़ उस शख़्श से जो हमारी बारगाह में (आमाल की जवाब देही में) खड़े होने से डरे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَقَامِي (मक़ामी): मेरे समक्ष खड़े होने का स्थान, अर्थात् क़ियामत के दिन हिसाब के लिए प्रस्तुत होना।
  • وَعِيدِ (वईद): मेरी धमकी, अर्थात् अवज्ञा करने वालों के लिए अल्लाह की ओर से सुनाई गई यातना की चेतावनी।

व्याख्या:

अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बरों और उनके अनुयायियों को वायदा किया है कि जब वे काफ़िरों और झुठलाने वालों को हलाक कर देंगे, तो उनकी ज़मीन को उन पैग़म्बरों और ईमान वालों के क़ब्ज़े में दे देंगे। यह वायदा अल्लाह का अटल और सुनिश्चित है। यह इनाम और यह सफलता उन्हीं लोगों के लिए है जो अल्लाह के समक्ष खड़े होने से डरते हैं, जो उसके हिसाब और उसकी पकड़ को याद रखते हैं, और जो उसकी धमकी और यातना की चेतावनी से सचमुच खौफ़ खाते हैं। यही लोग हैं जो अल्लाह के वायदे के हक़दार बनते हैं, क्योंकि उनका डर उन्हें नेक कामों पर अमल करने और बुराइयों से बचने पर मजबूर करता है। जो व्यक्ति अल्लाह की निगरानी और उसके सामने हाज़िर होने का एहसास रखता है, वही सच्चा मोमिन है और उसी के लिए दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह का वायदा सच्चा है—वह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें ज़मीन का वारिस बनाता है, चाहे काफ़िर कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।
  2. अल्लाह का ख़ौफ़ (डर) ही कामयाबी की कुंजी है; जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
  3. यह आयत मोमिनों को सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) पर प्रोत्साहित करती है—मुश्किलें चाहे कितनी भी हों, अंजाम नेक लोगों का ही होता है।
  4. क़ियामत के दिन हिसाब पर ईमान रखना इंसान को गुनाहों से रोकता है और उसे नेक रास्ते पर चलने की ताक़त देता है।
  5. यह आयत बताती है कि अल्लाह की धमकी को हल्का नहीं समझना चाहिए; जो उसकी चेतावनी से डरता है, वही हिदायत पाता है और अल्लाह की रहमत का हक़दार बनता है।


📜 आयत 12-16 — इब्राहीम

12وَمَا لَنَا أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اللَّهِ وَقَدْ هَدَانَا سُبُلَنَا ۚ وَلَنَصْبِرَنَّ عَلَىٰ مَا آذَيْتُمُونَا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُونَ
और हमें (आख़िर) क्या है कि हम उस पर भरोसा न करें हालॉकि हमे (निजात की) आसान राहें दिखाई और जो तूने अज़ियतें हमें पहुँचाइ (उन पर हमने सब्र किया और आइन्दा भी सब्र करेगें और तवक्कल भरोसा करने वालो को ख़ुदा ही पर तवक्कल करना चाहिए
13وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُم مِّنْ أَرْضِنَا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَا ۖ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों नें कुफ्र एख्तियार किया था अपने (वक्त क़े) पैग़म्बरों से कहने लगे हम तो तुमको अपनी सरज़मीन से ज़रुर निकाल बाहर कर देगें यहाँ तक कि तुम फिर हमारे मज़हब की तरफ पलट आओ-तो उनके परवरदिगार ने उनकी तरफ वही भेजी कि तुम घबराओं नहीं हम उन सरकश लोगों को ज़रुर बर्बाद करेगें
14وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْأَرْضَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और उनकी हलाकत के बाद ज़रुर तुम्ही को इस सरज़मीन में बसाएगें ये (वायदा) महज़ उस शख़्श से जो हमारी बारगाह में (आमाल की जवाब देही में) खड़े होने से डरे
15وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
और हमारे अज़ाब से ख़ौफ खाए और उन पैग़म्बरों हम से अपनी फतेह की दुआ माँगी (आख़िर वह पूरी हुई)
16مِّن وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِن مَّاءٍ صَدِيدٍ
और हर एक सरकश अदावत रखने वाला हलाक हुआ (ये तो उनकी सज़ा थी और उसके पीछे ही पीछे जहन्नुम है और उसमें) से पीप लहू भरा हुआ पानी पीने को दिया जाएगा
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अनुवाद — इब्राहीम 14

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Tuesday, August 18, 2026

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