इब्राहीम · 15/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ ۝١٥
Wastaftahoo wa khaaba kullu jabbaarin `aneed
📖 हिंदी अर्थ
और हमारे अज़ाब से ख़ौफ खाए और उन पैग़म्बरों हम से अपनी फतेह की दुआ माँगी (आख़िर वह पूरी हुई)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاسْتَفْتَحُوا: अर्थात नबियों ने अल्लाह से अपने शत्रुओं पर विजय और सहायता की प्रार्थना की।
  • خَابَ: अर्थात असफल हुआ, घाटे में रहा, नष्ट हुआ।
  • جَبَّارٍ: वह जो लोगों को अपनी इच्छा के अनुसार चलने पर विवश करे, अत्याचारी और सरकश।
  • عَنِيدٍ: हठीला, जो सत्य स्पष्ट हो जाने के बाद भी उसे स्वीकार न करे और उसका विरोध करता रहे।

तफसीर (व्याख्या):

जब नबियों को अपनी क़ौम की ओर से अत्याचार, इनकार और मुक़ाबले का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने अल्लाह की दरगाह में फ़रियाद की और उससे अपने दुश्मनों पर फ़तह और फ़ैसले की दुआ मांगी। अल्लाह ने उनकी यह दुआ क़बूल की और उन्हें नस्र (विजय) अता की। इसके विपरीत, हर वह व्यक्ति जो अत्याचारी था, जो लोगों को अपनी मनमानी पर चलाने के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती करता था, और जो सत्य के सामने आने के बाद भी उसका विरोध करता रहा और उसे क़बूल नहीं किया, वह घाटे में रहा और उसका सर्वनाश हो गया। उसका घमंड, उसकी ताक़त और उसका विरोध उसके किसी काम न आया, और वह अल्लाह की यात्रा से नहीं बच सका।

फ़ायदे (लाभ):

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जब भी सच्चाई के दावेदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़े, तो उन्हें अल्लाह ही से मदद मांगनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सच्ची मदद करने वाला है। अल्लाह अपने नेक बंदों की दुआ ज़रूर सुनता है और उन्हें विजय प्रदान करता है। साथ ही, यह आयत हमें चेतावनी देती है कि घमंड, अत्याचार और सत्य का विरोध करने वालों का अंजाम बुरा होता है। चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अल्लाह की शक्ति के आगे उनकी कोई नहीं चल सकती। यह हमें सिखाता है कि हमें हमेशा नम्रता, विनम्रता और सत्य की पैरवी करनी चाहिए, और कभी भी अल्लाह की नाराज़गी का कारण बनने वाले कामों से दूर रहना चाहिए।



📜 आयत 13-17 — इब्राहीम

13وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُم مِّنْ أَرْضِنَا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَا ۖ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों नें कुफ्र एख्तियार किया था अपने (वक्त क़े) पैग़म्बरों से कहने लगे हम तो तुमको अपनी सरज़मीन से ज़रुर निकाल बाहर कर देगें यहाँ तक कि तुम फिर हमारे मज़हब की तरफ पलट आओ-तो उनके परवरदिगार ने उनकी तरफ वही भेजी कि तुम घबराओं नहीं हम उन सरकश लोगों को ज़रुर बर्बाद करेगें
14وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْأَرْضَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और उनकी हलाकत के बाद ज़रुर तुम्ही को इस सरज़मीन में बसाएगें ये (वायदा) महज़ उस शख़्श से जो हमारी बारगाह में (आमाल की जवाब देही में) खड़े होने से डरे
15وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
और हमारे अज़ाब से ख़ौफ खाए और उन पैग़म्बरों हम से अपनी फतेह की दुआ माँगी (आख़िर वह पूरी हुई)
16مِّن وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِن مَّاءٍ صَدِيدٍ
और हर एक सरकश अदावत रखने वाला हलाक हुआ (ये तो उनकी सज़ा थी और उसके पीछे ही पीछे जहन्नुम है और उसमें) से पीप लहू भरा हुआ पानी पीने को दिया जाएगा
17يَتَجَرَّعُهُ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُ وَيَأْتِيهِ الْمَوْتُ مِن كُلِّ مَكَانٍ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍ ۖ وَمِن وَرَائِهِ عَذَابٌ غَلِيظٌ
(ज़बरदस्ती) उसे घूँट घँट करके पीना पड़ेगा और उसे हलक़ से आसानी से न उतार सकेगा और (वह मुसीबत है कि) उसे हर तरफ से मौत ही मौत आती दिखाई देती है हालॉकि वह मारे न मर सकेगा-और फिर उसके पीछे अज़ाब सख्त होगा
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अनुवाद — इब्राहीम 15

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Tuesday, August 18, 2026

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