अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُهْطِعِينَ (मुहति'ईन): तेज़ी से दौड़ते हुए, डर के मारे भागते हुए।
- مُقْنِعِي رُءُوسِهِمْ (मुक़्नि'ई रुऊसिहिम): अपने सिर ऊपर उठाए हुए।
- لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ (ला यरतद्दु इलैहिम तरफ़ुहुम): उनकी आँखें उनकी ओर वापस नहीं लौटतीं, अर्थात उनकी निगाहें जमी रहती हैं और पलकें नहीं झपकतीं।
- وَأَفْئِدَتُهُمْ هَوَاءٌ (व अफ़'इदतुहुम हवा): उनके दिल खाली और सुन्न हैं, उनमें कोई समझ या विचार नहीं रहता।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अत्याचारी और काफ़िर लोग अपनी क़ब्रों से उठेंगे। वे उस पुकारने वाले (इसराफील के सूर) की ओर तेज़ी से दौड़ेंगे, डर और घबराहट के कारण उनके सिर ऊपर उठे होंगे और वे आसमान की ओर टकटकी लगाए देख रहे होंगे। उनकी आँखें इतनी शक्तिहीन और स्तब्ध हो जाएँगी कि पलकें भी नहीं झपकेंगी, और निगाहें किसी ओर नहीं मुड़ेंगी। उनके दिल खाली हो जाएँगे—न उनमें कोई समझ होगी, न कोई विचार, न कोई भावना; क्योंकि उस महाविपत्ति के भय ने उनके होश-हवास उड़ा दिए होंगे। उनके दिल ऐसे होंगे जैसे खोखला बर्तन जिसमें हवा के सिवा कुछ न हो।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें उस महान दिन की गंभीरता और भयावहता की याद दिलाती है, ताकि हम उसकी तैयारी करें और अच्छे कर्मों में लगे रहें।
- यह बताती है कि अत्याचार और कुकर्मों का अंजाम कितना भयानक होगा, इसलिए हमें हर हाल में अत्याचार से बचना चाहिए और सीधे रास्ते पर चलना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की परेशानियाँ और दुख उस दिन की घबराहट के सामने कुछ भी नहीं हैं, इसलिए हमें दुनिया की चिंताओं में डूबकर आख़िरत को नहीं भूलना चाहिए।
- यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का सहारा लें, क्योंकि जो लोग उस दिन अल्लाह की रहमत से दूर होंगे, उनकी हालत बहुत बुरी होगी।
📜 आयत 41-45 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 43
सूरा इब्राहीम आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और अपने अपने सर उठाए भागे चले जा रहे हैं…सूरा आयत 43/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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