इब्राहीम · 43/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
مُهْطِعِينَ مُقْنِعِي رُءُوسِهِمْ لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ ۖ وَأَفْئِدَتُهُمْ هَوَاءٌ ۝٤٣
Muhti`eena muqni`ee ru`oosihim laa yartaddu ilaihim tarfuhum wa af`idatuhum hawaaa
📖 हिंदी अर्थ
(और अपने अपने सर उठाए भागे चले जा रहे हैं (टकटकी बँधी है कि) उनकी तरफ उनकी नज़र नहीं लौटती (जिधर देख रहे हैं) और उनके दिल हवा हवा हो रहे हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُهْطِعِينَ (मुहति'ईन): तेज़ी से दौड़ते हुए, डर के मारे भागते हुए।
  • مُقْنِعِي رُءُوسِهِمْ (मुक़्नि'ई रुऊसिहिम): अपने सिर ऊपर उठाए हुए।
  • لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ (ला यरतद्दु इलैहिम तरफ़ुहुम): उनकी आँखें उनकी ओर वापस नहीं लौटतीं, अर्थात उनकी निगाहें जमी रहती हैं और पलकें नहीं झपकतीं।
  • وَأَفْئِدَتُهُمْ هَوَاءٌ (व अफ़'इदतुहुम हवा): उनके दिल खाली और सुन्न हैं, उनमें कोई समझ या विचार नहीं रहता।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अत्याचारी और काफ़िर लोग अपनी क़ब्रों से उठेंगे। वे उस पुकारने वाले (इसराफील के सूर) की ओर तेज़ी से दौड़ेंगे, डर और घबराहट के कारण उनके सिर ऊपर उठे होंगे और वे आसमान की ओर टकटकी लगाए देख रहे होंगे। उनकी आँखें इतनी शक्तिहीन और स्तब्ध हो जाएँगी कि पलकें भी नहीं झपकेंगी, और निगाहें किसी ओर नहीं मुड़ेंगी। उनके दिल खाली हो जाएँगे—न उनमें कोई समझ होगी, न कोई विचार, न कोई भावना; क्योंकि उस महाविपत्ति के भय ने उनके होश-हवास उड़ा दिए होंगे। उनके दिल ऐसे होंगे जैसे खोखला बर्तन जिसमें हवा के सिवा कुछ न हो।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें उस महान दिन की गंभीरता और भयावहता की याद दिलाती है, ताकि हम उसकी तैयारी करें और अच्छे कर्मों में लगे रहें।
  2. यह बताती है कि अत्याचार और कुकर्मों का अंजाम कितना भयानक होगा, इसलिए हमें हर हाल में अत्याचार से बचना चाहिए और सीधे रास्ते पर चलना चाहिए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की परेशानियाँ और दुख उस दिन की घबराहट के सामने कुछ भी नहीं हैं, इसलिए हमें दुनिया की चिंताओं में डूबकर आख़िरत को नहीं भूलना चाहिए।
  4. यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का सहारा लें, क्योंकि जो लोग उस दिन अल्लाह की रहमत से दूर होंगे, उनकी हालत बहुत बुरी होगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 41-45 — इब्राहीम

41رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ
ऐ हमारे पालने वाले जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे
42وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَ ۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍ تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें
43مُهْطِعِينَ مُقْنِعِي رُءُوسِهِمْ لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ ۖ وَأَفْئِدَتُهُمْ هَوَاءٌ
(और अपने अपने सर उठाए भागे चले जा रहे हैं (टकटकी बँधी है कि) उनकी तरफ उनकी नज़र नहीं लौटती (जिधर देख रहे हैं) और उनके दिल हवा हवा हो रहे हैं
44وَأَنذِرِ النَّاسَ يَوْمَ يَأْتِيهِمُ الْعَذَابُ فَيَقُولُ الَّذِينَ ظَلَمُوا رَبَّنَا أَخِّرْنَا إِلَىٰ أَجَلٍ قَرِيبٍ نُّجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ الرُّسُلَ ۗ أَوَلَمْ تَكُونُوا أَقْسَمْتُم مِّن قَبْلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٍ
और (ऐ रसूल) लोगों को उस दिन से डराओ (जिस दिन) उन पर अज़ाब नाज़िल होगा तो जिन लोगों ने नाफरमानी की थी (गिड़गिड़ा कर) अर्ज़ करेगें कि ऐ हमारे पालने वाले हम को थोड़ी सी मोहलत और दे दे (अबकी बार) हम तेरे बुलाने पर ज़रुर उठ खड़े होगें और सब रसूलों की पैरवी करेगें (तो उनको जवाब मिलेगा) क्या तुम वह लोग नहीं हो जो उसके पहले (उस पर) क़समें खाया करते थे कि तुम को किसी तरह का ज़व्वाल (नुक्सान) नहीं
45وَسَكَنتُمْ فِي مَسَاكِنِ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ وَتَبَيَّنَ لَكُمْ كَيْفَ فَعَلْنَا بِهِمْ وَضَرَبْنَا لَكُمُ الْأَمْثَالَ
(और क्या तुम वह लोग नहीं कि) जिन लोगों ने (हमारी नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर जुल्म किया उन्हीं के घरों में तुम भी रहे हालॉकि तुम पर ये भी ज़ाहिर हो चुका था कि हमने उनके साथ क्या (बरताओ) किया और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) मसले भी बयान कर दी थीं
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मक्कीRevelation
43आयत

अनुवाद — इब्राहीम 43

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सूरा आयत 43/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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