इब्राहीम · 42/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा इब्राहीम
وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَ ۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍ تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ ۝٤٢
Wa laa tahsabannal laaha ghaafilan `ammaa ya`maluz zaalimoon; innamaa yu`akh khiruhum li Yawmin tashkhasu feehil absaar
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَافِلًا: बेखबर, जो किसी चीज़ से अनजान हो।
  • الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, ज़ालिम लोग।
  • يُؤَخِّرُهُمْ: उन्हें टालता है, उनकी सज़ा को मुल्तवी करता है।
  • تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ: जिस दिन आँखें खुली की खुली रह जाएँगी, पलकें न झपकेंगी, और निगाहें स्तब्ध रह जाएँगी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप यह कभी न समझें कि अल्लाह उन अत्याचारियों के कर्मों से बेखबर है जो आपको और दूसरे रसूलों को झुठलाते हैं, ईमानवालों को तकलीफ़ देते हैं, और अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं। अल्लाह उनके हर अमल को जानता है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह उन्हें सज़ा देने में जल्दी नहीं करता, बल्कि उनकी सज़ा को एक निश्चित दिन के लिए टाल रहा है — वह दिन जो बेहद सख्त और भयावह होगा। उस दिन की हौलनाकी से लोगों की आँखें खुली की खुली रह जाएँगी, पलकें नहीं झपकेंगी, और निगाहें हैरत और खौफ़ से स्तब्ध हो जाएँगी। यह टालना उनके लिए राहत नहीं, बल्कि सज़ा की शिद्दत को बढ़ाने का ज़रिया है। इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी और मोमिनों को तसल्ली दी है कि ज़ालिमों की मोहलत से दिल टूटे नहीं, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और वह किसी को भूलने वाला नहीं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत मज़लूमों (पीड़ितों) के दिलों को तसल्ली देती है कि अल्लाह उनके साथ है और ज़ालिमों की हर करतूत उसकी निगरानी में है — इंसाफ़ का वादा ज़रूर पूरा होगा।
  2. ज़ालिमों के लिए यह सख्त चेतावनी है कि उनकी मोहलत उन्हें धोखे में न डाले; अल्लाह की सज़ा अटल है और उसका दिन बेहद भयानक होगा।
  3. यह हमें सिखाती है कि दुनिया में कुछ लोग बुराई करते हुए दिखते हैं और उन्हें सज़ा नहीं मिलती, लेकिन यह अल्लाह की बेखबरी नहीं, बल्कि उसकी हिकमत है — वह सब कुछ अपने वक़्त पर करता है।
  4. आख़िरत के उस दिन की याद दिलाकर यह आयत हमें ज़ुल्म से बचने और अल्लाह के सामने जवाबदेही का एहसास दिलाती है, जिससे इंसान की ज़िंदगी में सीधाई और परहेज़गारी आती है।
  5. यह मोमिनों को सब्र और भरोसे की तालीम देती है कि अल्लाह पर यक़ीन रखें, क्योंकि उसका वादा सच्चा है और उसकी मदद ज़रूर आती है।


📜 आयत 40-44 — सूरा इब्राहीम

40رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ
(ऐ मेरे पालने वाले मुझे और मेरी औलाद को (भी) नमाज़ का पाबन्द बना दे और ऐ मेरे पालने वाले मेरी दुआ क़ुबूल फरमा
41رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ
ऐ हमारे पालने वाले जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे
42وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَ ۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍ تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें
43مُهْطِعِينَ مُقْنِعِي رُءُوسِهِمْ لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ ۖ وَأَفْئِدَتُهُمْ هَوَاءٌ
(और अपने अपने सर उठाए भागे चले जा रहे हैं (टकटकी बँधी है कि) उनकी तरफ उनकी नज़र नहीं लौटती (जिधर देख रहे हैं) और उनके दिल हवा हवा हो रहे हैं
44وَأَنذِرِ النَّاسَ يَوْمَ يَأْتِيهِمُ الْعَذَابُ فَيَقُولُ الَّذِينَ ظَلَمُوا رَبَّنَا أَخِّرْنَا إِلَىٰ أَجَلٍ قَرِيبٍ نُّجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ الرُّسُلَ ۗ أَوَلَمْ تَكُونُوا أَقْسَمْتُم مِّن قَبْلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٍ
और (ऐ रसूल) लोगों को उस दिन से डराओ (जिस दिन) उन पर अज़ाब नाज़िल होगा तो जिन लोगों ने नाफरमानी की थी (गिड़गिड़ा कर) अर्ज़ करेगें कि ऐ हमारे पालने वाले हम को थोड़ी सी मोहलत और दे दे (अबकी बार) हम तेरे बुलाने पर ज़रुर उठ खड़े होगें और सब रसूलों की पैरवी करेगें (तो उनको जवाब मिलेगा) क्या तुम वह लोग नहीं हो जो उसके पहले (उस पर) क़समें खाया करते थे कि तुम को किसी तरह का ज़व्वाल (नुक्सान) नहीं
इब्राहीमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
42आयत

अनुवाद — इब्राहीम 42

सूरा इब्राहीम आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं…

सूरा आयत 42/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.





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Sunday, October 4, 2026

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