Wa laa tahsabannal laaha ghaafilan `ammaa ya`maluz zaalimoon; innamaa yu`akh khiruhum li Yawmin tashkhasu feehil absaar
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें
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اور (مومنو) مت خیال کرنا کہ یہ ظالم جو عمل کر رہے ہیں خدا ان سے بےخبر ہے۔ وہ ان کو اس دن تک مہلت دے رہا ہے جب کہ (دہشت کے سبب) آنکھیں کھلی کی کھلی رہ جائیں گی
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
غَافِلًا: बेखबर, जो किसी चीज़ से अनजान हो।
الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, ज़ालिम लोग।
يُؤَخِّرُهُمْ: उन्हें टालता है, उनकी सज़ा को मुल्तवी करता है।
تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ: जिस दिन आँखें खुली की खुली रह जाएँगी, पलकें न झपकेंगी, और निगाहें स्तब्ध रह जाएँगी।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप यह कभी न समझें कि अल्लाह उन अत्याचारियों के कर्मों से बेखबर है जो आपको और दूसरे रसूलों को झुठलाते हैं, ईमानवालों को तकलीफ़ देते हैं, और अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं। अल्लाह उनके हर अमल को जानता है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह उन्हें सज़ा देने में जल्दी नहीं करता, बल्कि उनकी सज़ा को एक निश्चित दिन के लिए टाल रहा है — वह दिन जो बेहद सख्त और भयावह होगा। उस दिन की हौलनाकी से लोगों की आँखें खुली की खुली रह जाएँगी, पलकें नहीं झपकेंगी, और निगाहें हैरत और खौफ़ से स्तब्ध हो जाएँगी। यह टालना उनके लिए राहत नहीं, बल्कि सज़ा की शिद्दत को बढ़ाने का ज़रिया है। इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी और मोमिनों को तसल्ली दी है कि ज़ालिमों की मोहलत से दिल टूटे नहीं, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और वह किसी को भूलने वाला नहीं।
फ़ायदे (सबक़):
यह आयत मज़लूमों (पीड़ितों) के दिलों को तसल्ली देती है कि अल्लाह उनके साथ है और ज़ालिमों की हर करतूत उसकी निगरानी में है — इंसाफ़ का वादा ज़रूर पूरा होगा।
ज़ालिमों के लिए यह सख्त चेतावनी है कि उनकी मोहलत उन्हें धोखे में न डाले; अल्लाह की सज़ा अटल है और उसका दिन बेहद भयानक होगा।
यह हमें सिखाती है कि दुनिया में कुछ लोग बुराई करते हुए दिखते हैं और उन्हें सज़ा नहीं मिलती, लेकिन यह अल्लाह की बेखबरी नहीं, बल्कि उसकी हिकमत है — वह सब कुछ अपने वक़्त पर करता है।
आख़िरत के उस दिन की याद दिलाकर यह आयत हमें ज़ुल्म से बचने और अल्लाह के सामने जवाबदेही का एहसास दिलाती है, जिससे इंसान की ज़िंदगी में सीधाई और परहेज़गारी आती है।
यह मोमिनों को सब्र और भरोसे की तालीम देती है कि अल्लाह पर यक़ीन रखें, क्योंकि उसका वादा सच्चा है और उसकी मदद ज़रूर आती है।
और जो कुछ ये कुफ्फ़ार (कुफ्फ़ारे मक्का) किया करते हैं उनसे ख़ुदा को ग़ाफिल न समझना (और उन पर फौरन अज़ाब न करने की) सिर्फ ये वजह है कि उस दिन तक की मोहलत देता है जिस दिन लोगों की ऑंखों के ढेले (ख़ौफ के मारे) पथरा जाएँगें
और (ऐ रसूल) लोगों को उस दिन से डराओ (जिस दिन) उन पर अज़ाब नाज़िल होगा तो जिन लोगों ने नाफरमानी की थी (गिड़गिड़ा कर) अर्ज़ करेगें कि ऐ हमारे पालने वाले हम को थोड़ी सी मोहलत और दे दे (अबकी बार) हम तेरे बुलाने पर ज़रुर उठ खड़े होगें और सब रसूलों की पैरवी करेगें (तो उनको जवाब मिलेगा) क्या तुम वह लोग नहीं हो जो उसके पहले (उस पर) क़समें खाया करते थे कि तुम को किसी तरह का ज़व्वाल (नुक्सान) नहीं
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