अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ: अर्थात एक स्थायी और स्थिर मार्ग पर है, जो कभी समाप्त नहीं होता और जिससे लोग गुजरते रहते हैं।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़ौमे-लूत (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम) की बस्तियाँ (सदूम और अमूरा) एक ऐसे स्थायी मार्ग पर स्थित हैं जो कभी उजड़ा नहीं और आज भी लोगों के आने-जाने का रास्ता है। यह वही रास्ता है जिससे अरब के क़ाफ़िले (व्यापारिक कारवाँ) शाम (सीरिया) की ओर जाते समय गुज़रते थे। यानी यह बस्तियाँ उस रास्ते पर थीं जो हमेशा आबाद रहा और लोग उनके खंडहरों को देखते हुए गुज़रते रहे। यह उन लोगों के लिए एक खुली निशानी और सबक़ है जो आँखों से देखकर सीखना चाहते हैं। जब क़ुरैश के लोग व्यापार के सिलसिले में शाम जाते थे, तो वे इन खंडहरों को अपनी आँखों से देखते थे, फिर भी वे अल्लाह के अज़ाब से डरते नहीं थे। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि उसने उन्हें हलाक करने के बाद भी उनके खंडहरों को बाक़ी रखा ताकि आने वाली नस्लें उनसे इबरत हासिल करें।
फ़ायदे:
- अल्लाह तआला अपने अज़ाब की निशानियों को बाक़ी रखता है ताकि लोग उनसे सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी में ग़लत रास्तों से बचें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इतिहास से सीखना चाहिए; जो क़ौमें अल्लाह की नाफ़रमानी करती हैं, उनका अंजाम बुरा होता है, और उनके खंडहर हमारे लिए नसीहत हैं।
- इस्लाम हमें दावत देता है कि हम अपने आस-पास की निशानियों पर ग़ौर करें, क्योंकि ये हमें अल्लाह की ताक़त और उसके इंसाफ़ की याद दिलाती हैं।
- यह आयत बताती है कि अल्लाह का दीन (इस्लाम) हमेशा क़ायम रहने वाला है, और उसकी निशानियाँ ज़मीन पर मौजूद हैं ताकि लोग सीधे रास्ते पर चलें।
📜 आयत 74-78 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 76
सूरा अल-हिज्र आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : के रास्ते पर हैसूरा आयत 76/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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