अल-हिज्र · 77/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ ۝٧٧
Inna fee zaalika la Aayatal lilmu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
इसमें तो शक हीं नहीं कि इसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً: निशानी, सबक, सीख लेने की जगह।
  • لِلْمُؤْمِنِينَ: उन लोगों के लिए जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि निश्चय ही उस घटना में — जो पिछली क़ौमों (जैसे क़ौमे-लूत) के साथ हुई, उनका सत्यानाश, उनके शहरों का उलट दिया जाना और उन पर पत्थरों की बारिश — ईमान लाने वालों के लिए एक बड़ी निशानी और सबक है। यह घटना उन लोगों के लिए स्पष्ट प्रमाण है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखते हैं, कि अल्लाह का वादा सच्चा है, उसकी पकड़ बहुत सख्त है, और वह अपने नबियों की मदद करता है और उनके विरोधियों को तबाह कर देता है। यह आयत उन लोगों को संबोधित करती है जो दिल से ईमान रखते हैं और अपने ईमान के मुताबिक अमल करते हैं, क्योंकि वही लोग इन निशानियों से सीख लेते हैं और उनसे सबक हासिल करते हैं। यह निशानी रास्ते में स्थित है, जिसे यात्री आते-जाते देखते हैं, ताकि वे सोचें और समझें कि अल्लाह की शक्ति और उसके अज़ाब से बचने का रास्ता उसकी आज्ञा का पालन करना है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इतिहास की घटनाएँ सिर्फ़ कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हैं जिनसे हमें सीख लेनी चाहिए।
  2. ईमान वालों की पहचान यह है कि वे अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करते हैं और उनसे सबक लेते हैं, जबकि ग़ाफ़िल लोग उन्हें देखकर भी अनदेखा कर देते हैं।
  3. अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती — जो उसके नबियों को झुठलाते हैं, वे तबाह होते हैं, और यह ईमान वालों के लिए तसल्ली का बाइस है कि सच्चाई हमेशा बुलंद रहती है।
  4. यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डरने और उसकी रहमत की उम्मीद रखने की तरग़ीब देती है, क्योंकि ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह की पनाह में ले आती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — अल-हिज्र

75إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّلْمُتَوَسِّمِينَ
और वह उलटी हुई बस्ती हमेशा (की आमदरफ्त)
76وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ
के रास्ते पर है
77إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ
इसमें तो शक हीं नहीं कि इसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
78وَإِن كَانَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ لَظَالِمِينَ
और एैका के रहने वाले (क़ौमे शुएब की तरह बड़े सरकश थे)
79فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ
तो उन से भी हमने (नाफरमानी का) बदला लिया और ये दो बस्तियाँ (क़ौमे लूत व शुएब की) एक खुली हुई यह राह पर (अभी तक मौजूद) हैं
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीRevelation
77आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 77

सूरा अल-हिज्र आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक हीं नहीं कि इसमें ईमानदारों के वास्ते…

सूरा आयत 77/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए