अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नुत्फ़ा (نُّطْفَةٍ): तुच्छ और कमज़ोर पानी, अर्थात् पुरुष का वीर्य।
- ख़सीम (خَصِيمٌ): बहुत अधिक झगड़ालू, विवाद करने वाला।
- मुबीन (مُبِين): स्पष्ट और प्रत्यक्ष, जिसका झगड़ा और हठधर्मिता खुली हुई हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने मनुष्य को एक अत्यंत तुच्छ और कमज़ोर बूंद (वीर्य) से पैदा किया। यह वही नुत्फ़ा है जिसकी ओर संकेत करते हुए अल्लाह ने बताया कि उसकी रचना की शुरुआत कितनी साधारण और हक़ीर चीज़ से हुई। फिर अल्लाह ने उसे क्रमशः विकसित किया—खून के थक्के से, फिर गोश्त के टुकड़े से, फिर हड्डियों और मांस से, यहाँ तक कि उसे एक पूर्ण मनुष्य बना दिया।
इसके बावजूद, जब यही इंसान ताक़त और समझ प्राप्त कर लेता है, तो वह अपने रब के सामने खड़ा होकर झगड़ने लगता है। वह अल्लाह की क़ुदरत को नकारता है, पुनरुत्थान (आख़िरत में दोबारा जीवित होने) का इन्कार करता है, और कहता है: "हड्डियों को कौन जीवित करेगा जबकि वे चूर-चूर हो चुकी हों?" (यासीन: 78)। वह भूल जाता है कि जिस अल्लाह ने उसे पहली बार शून्य से पैदा किया, वही उसे दोबारा जीवित करने पर पूर्ण रूप से सक्षम है।
यह मनुष्य की अजीबोग़रीब स्थिति है—वह एक तुच्छ बूंद से बना, फिर भी अपने ख़ालिक़ (रचयिता) से उद्दंडता और हठधर्मी के साथ विवाद करता है। उसका झगड़ा स्पष्ट और प्रत्यक्ष है, क्योंकि वह अपनी रचना के आरंभिक साक्ष्य को देखते हुए भी अल्लाह की क़ुदरत को नहीं मानता।
फ़ायदे और सबक:
- अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी रचना पर विचार करना चाहिए। जिस अल्लाह ने उसे एक कमज़ोर बूंद से इंसान बनाया, वह निश्चित रूप से मृत्यु के बाद दोबारा जीवित करने पर भी क़ादिर है। यह ईमान को मज़बूत करने का सबसे बड़ा सबब है।
- अकड़ और घमंड से बचाव: इंसान को अपनी औकात याद रखनी चाहिए—उसकी शुरुआत तुच्छ पानी से हुई थी। यह सोच उसे अल्लाह के सामने झुकने और विनम्र होने में मदद करती है, न कि उससे झगड़ने और उसकी आयतों को नकारने में।
- विवाद और हठधर्मिता से बचना: यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के सामने झुकना चाहिए, न कि हठधर्मिता और झूठे विवाद में पड़ना। इंसान को चाहिए कि वह अपने रब के सामने सजदा करे और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करे।
- पुनरुत्थान पर ईमान: यह आयत क़यामत के दिन के पुनरुत्थान की सच्चाई को साबित करती है। जो इंसान अपनी पहली रचना को देखता है, उसे दूसरी रचना पर विश्वास करने में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। यह विश्वास इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
📜 आयत 2-6 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 4
सूरा अन-नहल आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसने इन्सान को नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक…सूरा आयत 4/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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