और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से निकाला (जब) तुम बिल्कुल नासमझ थे और तुम को कान दिए और ऑंखें (अता की) दिल (इनायत किए) ताकि तुम शुक्र करो
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اور خدا ہی نے تم کو تمہاری ماؤں کے شکم سے پیدا کیا کہ تم کچھ نہیں جانتے تھے۔ اور اس نے تم کو کان اور آنکھیں اور دل (اور اُن کے علاوہ اور) اعضا بخشے تاکہ تم شکر کرو
अफ़िदा (الأَفْئِدَةَ): दिल (बहुवचन), जिन्हें समझने और विचार करने का साधन बनाया गया है।
ला तअ्लमून (لَا تَعْلَمُونَ): तुम कुछ नहीं जानते थे।
तश्कुरून (تَشْكُرُونَ): तुम आभार प्रकट करो।
व्याख्या:
अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और कृपा का स्मरण कराते हुए फ़रमाता है कि उसी ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से निकाला, जबकि उस समय तुम कुछ भी नहीं जानते थे—न देखना था, न सुनना था, न समझना था। तुम बिल्कुल अनजान और लाचार थे। फिर अल्लाह ने तुम्हें सुनने के लिए कान, देखने के लिए आँखें और समझने के लिए दिल (दिमाग़) प्रदान किए। ये वे साधन हैं जिनके द्वारा तुम ज्ञान प्राप्त करते हो, सत्य को पहचानते हो और अपने जीवन के मार्ग को समझते हो। यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि तुम अल्लाह के इन अनगिनत उपहारों पर उसका आभार प्रकट करो, उसे पहचानो और केवल उसी की इबादत करो। यह आभार केवल ज़ुबान से नहीं, बल्कि इन नेमतों को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार उपयोग करके प्रकट करना है।
शिक्षाएँ और लाभ:
यह आयत मनुष्य को अपनी कमज़ोर शुरुआत की याद दिलाती है कि वह कुछ नहीं जानता था, और यह ज्ञान और समझ जो उसे मिली है, वह अल्लाह की देन है। इससे विनम्रता और कृतज्ञता पैदा होती है।
अल्लाह ने मनुष्य को सुनने, देखने और सोचने की शक्तियाँ दी हैं, इसलिए इनका सही उपयोग करना चाहिए—सत्य को सुनना, अच्छाई को देखना और विचार करके सही रास्ता अपनाना।
यह आयत हमें सिखाती है कि इन नेमतों का सबसे बड़ा शुक्र यह है कि हम इन्हें अल्लाह की रज़ा के लिए इस्तेमाल करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें।
अल्लाह की कृपा और दया का यह प्रमाण है कि उसने हमें ज्ञान और समझ जैसी महान नेमतें दीं, जो हमें अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ बनाती हैं। इससे अल्लाह के प्रति प्रेम और उसकी इबादत में रुचि बढ़ती है।
और ख़ुदा एक दूसरी मसल बयान फरमाता है दो आदमी हैं कि एक उनमें से बिल्कुल गूँगा उस पर गुलाम जो कुछ भी (बात वग़ैरह की) कुदरत नहीं रखता और (इस वजह से) वह अपने मालिक को दूभर हो रहा है कि उसको जिधर भेजता है (ख़ैर से) कभी भलाई नहीं लाता क्या ऐसा ग़ुलाम और वह शख़्श जो (लोगों को) अदल व मियाना रवी का हुक्म करता है वह खुद भी ठीक सीधी राह पर क़ायम है (दोनों बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं)
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
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