अन-नहल · 78/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَاللَّهُ أَخْرَجَكُم مِّن بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۙ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٧٨
Wallaahu akhrajakum mim butooni ummahaatikum laa ta`lamoona shai`anw wa ja`ala lakumus sam`a wal absaara wal af`idata la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से निकाला (जब) तुम बिल्कुल नासमझ थे और तुम को कान दिए और ऑंखें (अता की) दिल (इनायत किए) ताकि तुम शुक्र करो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अफ़िदा (الأَفْئِدَةَ): दिल (बहुवचन), जिन्हें समझने और विचार करने का साधन बनाया गया है।
  • ला तअ्लमून (لَا تَعْلَمُونَ): तुम कुछ नहीं जानते थे।
  • तश्कुरून (تَشْكُرُونَ): तुम आभार प्रकट करो।

व्याख्या:

अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और कृपा का स्मरण कराते हुए फ़रमाता है कि उसी ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से निकाला, जबकि उस समय तुम कुछ भी नहीं जानते थे—न देखना था, न सुनना था, न समझना था। तुम बिल्कुल अनजान और लाचार थे। फिर अल्लाह ने तुम्हें सुनने के लिए कान, देखने के लिए आँखें और समझने के लिए दिल (दिमाग़) प्रदान किए। ये वे साधन हैं जिनके द्वारा तुम ज्ञान प्राप्त करते हो, सत्य को पहचानते हो और अपने जीवन के मार्ग को समझते हो। यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि तुम अल्लाह के इन अनगिनत उपहारों पर उसका आभार प्रकट करो, उसे पहचानो और केवल उसी की इबादत करो। यह आभार केवल ज़ुबान से नहीं, बल्कि इन नेमतों को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार उपयोग करके प्रकट करना है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  • यह आयत मनुष्य को अपनी कमज़ोर शुरुआत की याद दिलाती है कि वह कुछ नहीं जानता था, और यह ज्ञान और समझ जो उसे मिली है, वह अल्लाह की देन है। इससे विनम्रता और कृतज्ञता पैदा होती है।
  • अल्लाह ने मनुष्य को सुनने, देखने और सोचने की शक्तियाँ दी हैं, इसलिए इनका सही उपयोग करना चाहिए—सत्य को सुनना, अच्छाई को देखना और विचार करके सही रास्ता अपनाना।
  • यह आयत हमें सिखाती है कि इन नेमतों का सबसे बड़ा शुक्र यह है कि हम इन्हें अल्लाह की रज़ा के लिए इस्तेमाल करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें।
  • अल्लाह की कृपा और दया का यह प्रमाण है कि उसने हमें ज्ञान और समझ जैसी महान नेमतें दीं, जो हमें अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ बनाती हैं। इससे अल्लाह के प्रति प्रेम और उसकी इबादत में रुचि बढ़ती है।


📜 आयत 76-80 — अन-नहल

76وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَّجُلَيْنِ أَحَدُهُمَا أَبْكَمُ لَا يَقْدِرُ عَلَىٰ شَيْءٍ وَهُوَ كَلٌّ عَلَىٰ مَوْلَاهُ أَيْنَمَا يُوَجِّههُّ لَا يَأْتِ بِخَيْرٍ ۖ هَلْ يَسْتَوِي هُوَ وَمَن يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ ۙ وَهُوَ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और ख़ुदा एक दूसरी मसल बयान फरमाता है दो आदमी हैं कि एक उनमें से बिल्कुल गूँगा उस पर गुलाम जो कुछ भी (बात वग़ैरह की) कुदरत नहीं रखता और (इस वजह से) वह अपने मालिक को दूभर हो रहा है कि उसको जिधर भेजता है (ख़ैर से) कभी भलाई नहीं लाता क्या ऐसा ग़ुलाम और वह शख़्श जो (लोगों को) अदल व मियाना रवी का हुक्म करता है वह खुद भी ठीक सीधी राह पर क़ायम है (दोनों बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं)
77وَلِلَّهِ غَيْبُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَا أَمْرُ السَّاعَةِ إِلَّا كَلَمْحِ الْبَصَرِ أَوْ هُوَ أَقْرَبُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
78وَاللَّهُ أَخْرَجَكُم مِّن بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۙ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से निकाला (जब) तुम बिल्कुल नासमझ थे और तुम को कान दिए और ऑंखें (अता की) दिल (इनायत किए) ताकि तुम शुक्र करो
79أَلَمْ يَرَوْا إِلَى الطَّيْرِ مُسَخَّرَاتٍ فِي جَوِّ السَّمَاءِ مَا يُمْسِكُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
80وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّن بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ الْأَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَا أَثَاثًا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
78आयत

अनुवाद — अन-नहल 78

सूरा अन-नहल आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से…

सूरा आयत 78/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए