Wa lillaahi ghaibus samaawaati wal ard; wa maaa amrus Saa`ati illaa kalamhil basari aw huwa aqrab; innal laaha `alaaa kulli shai`in Qadeer
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
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اور آسمانوں اور زمین کا علم خدا ہی کو ہے اور (خدا کے نزدیک) قیامت کا آنا یوں ہے جیسے آنکھ کا جھپکنا بلکہ اس سے بھی جلد تر۔ کچھ شک نہیں کہ خدا ہر چیز پر قادر ہے
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
غَيْبُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों और धरती की छिपी हुई बातें, जो किसी सृष्टि को ज्ञात नहीं।
أَمْرُ السَّاعَةِ: क़ियामत के आने का मामला।
كَلَمْحِ الْبَصَرِ: आँख के झपकने जितनी तेज़ी से, यानी पलक झपकने की अवधि में।
أَقْرَبُ: उससे भी अधिक निकट।
तफ़सीर:
यह आयत अल्लाह तआला के असीम ज्ञान और उसकी पूर्ण शक्ति को बयान करती है। अल्लाह ही अकेला है जो आकाशों और धरती के सारे छिपे रहस्यों और अनदेखी चीज़ों का ज्ञान रखता है। उसके सिवा कोई भी इन ग़ैबी बातों को नहीं जानता। फिर अल्लाह तआला क़ियामत के आने के मामले का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि जब वह क़ियामत लाने का इरादा करता है, तो उसका आना आँख के झपकने जितनी तेज़ी से होता है, बल्कि उससे भी ज़्यादा तेज़ और निकट होता है। यानी जिस पल अल्लाह चाहे, क़ियामत आ जाएगी; उसमें कोई देरी या रुकावट नहीं। यह बात इसलिए कही गई कि लोग क़ियामत के आने को दूर और असंभव समझते थे, जबकि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ मुमकिन है। अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है; जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो उससे कहता है "हो जा", और वह हो जाती है। यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब लोगों ने रसूलुल्लाह ﷺ से क़ियामत के समय के बारे में पूछा, तो अल्लाह ने बताया कि उसका ज्ञान केवल अल्लाह के पास है, और उसका आना अल्लाह के लिए बेहद आसान है।
फ़ायदे:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का ज्ञान असीमित है; वह हर छिपी चीज़ से वाक़िफ़ है, इसलिए हमें उसी पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से डरना चाहिए।
क़ियामत का आना अल्लाह के लिए बेहद आसान है, इसलिए हमें हर वक़्त उसके लिए तैयार रहना चाहिए और अपने आख़िरत को संवारने की कोशिश करनी चाहिए।
अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है; जब वह कुछ चाहता है, तो वह तुरंत हो जाता है। इससे मुसलमान के दिल में अल्लाह की अज़मत और उसकी ताक़त का एहसास बढ़ता है और वह अपने जीवन को उसकी रज़ा के अनुसार ढालने की कोशिश करता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह को है, इसलिए हमें उन बातों में नहीं पड़ना चाहिए जो हमारे इल्म से बाहर हैं, बल्कि अपने कर्तव्यों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।
एक मसल ख़ुदा ने बयान फरमाई कि एक ग़ुलाम है जो दूसरे के कब्जे में है (और) कुछ भी एख्तियार नहीं रखता और एक शख़्श वह है कि हमने उसे अपनी बारगाह से अच्छी (खासी) रोज़ी दे रखी है तो वह उसमें से छिपा के दिखा के (ग़रज़ हर तरह ख़ुदा की राह में) ख़र्च करता है क्या ये दोनो बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं) अल्हमदोलिल्लाह (कि वह भी उसके मुक़र्रर हैं) मगर उनके बहुतेरे (इतना भी) नहीं जानते
और ख़ुदा एक दूसरी मसल बयान फरमाता है दो आदमी हैं कि एक उनमें से बिल्कुल गूँगा उस पर गुलाम जो कुछ भी (बात वग़ैरह की) कुदरत नहीं रखता और (इस वजह से) वह अपने मालिक को दूभर हो रहा है कि उसको जिधर भेजता है (ख़ैर से) कभी भलाई नहीं लाता क्या ऐसा ग़ुलाम और वह शख़्श जो (लोगों को) अदल व मियाना रवी का हुक्म करता है वह खुद भी ठीक सीधी राह पर क़ायम है (दोनों बराबर हो सकते हैं (हरगिज़ नहीं)
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
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