अन-नहल · 84/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ ۝٨٤
Wa yawma nab`asu min kulli ummatin shaheedan summa laa yu`zanu lillazeena kafaroo wa laa hum yusta`taboon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَهِيدًا (शहीदन): गवाह, यानी हर उम्मत का नबी जो अपनी कौम पर गवाही देगा।
  • لَا يُؤْذَنُ (ला यूज़न): अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • يُسْتَعْتَبُونَ (युस्ता'तबून): उनसे यह नहीं कहा जाएगा कि वे (अल्लाह को) राज़ी करने की कोशिश करें, यानी उन्हें तौबा या माफ़ी माँगने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उन लोगों को उस दिन की याद दिलाइए जब हम हर उम्मत में से उसके नबी को गवाह बनाकर खड़ा करेंगे, और वह अपनी कौम के ईमानदार लोगों के ईमान और काफ़िरों के कुफ़्र पर गवाही देगा। उसके बाद काफ़िरों को कोई अनुमति नहीं दी जाएगी कि वे अपने बहाने पेश करें या माफ़ी माँगें। उनसे यह भी नहीं कहा जाएगा कि वे (अल्लाह की) नाराज़गी दूर करने की कोशिश करें, क्योंकि आख़िरत का दिन काम करने का नहीं, बल्कि हिसाब और बदला पाने का दिन है। दुनिया ही वह जगह थी जहाँ उन्हें तौबा और अच्छे कामों का मौक़ा दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। अब वह मौक़ा खत्म हो चुका है, और उनके लिए सिर्फ़ अज़ाब बाकी है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला ने हर उम्मत में नबी भेजे, और क़यामत के दिन वे नबी अपनी उम्मत के गवाह होंगे। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है कि उसने बिना चेतावनी दिए किसी को सज़ा देने का फ़ैसला नहीं किया।
  2. यह आयत हमें दुनिया की क़द्र करना सिखाती है कि यही वह मौक़ा है जहाँ तौबा, नेकी और अल्लाह की रज़ा हासिल की जा सकती है। आख़िरत में यह दरवाज़ा बंद हो जाएगा।
  3. इससे मुसलमान को यह चेतावनी मिलती है कि वह अपने नबी ﷺ की गवाही का ख़्याल रखे, और अपने ईमान और अमल को सही रखे ताकि उस दिन उसके लिए गवाही बेहतर हो।
  4. यह आयत अल्लाह के इंसाफ़ को भी दिखाती है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा, बल्कि हर उम्मत के पास उसका नबी गवाह होगा, और फिर उसके बाद कोई बहाना क़बूल नहीं होगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 82-86 — अन-नहल

82فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग (ईमान से) मुँह फेरे तो तुम्हारा फर्ज सिर्फ (एहकाम का) साफ पहुँचा देना है
83يَعْرِفُونَ نِعْمَتَ اللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكْثَرُهُمُ الْكَافِرُونَ
(बस) ये लोग ख़ुदा की नेअमतों को पहचानते हैं फिर (जानबुझ कर) उनसे मुकर जाते हैं और इन्हीं में से बहुतेरे नाशुक्रे हैं
84وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
85وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ ظَلَمُوا الْعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और जिन लोगों ने (दुनिया में) शरारतें की थी जब वह अज़ाब को देख लेगें तो उनके अज़ाब ही में तख़फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत ही दी जाएगी
86وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ أَشْرَكُوا شُرَكَاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ شُرَكَاؤُنَا الَّذِينَ كُنَّا نَدْعُو مِن دُونِكَ ۖ فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ إِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَ
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो
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अनुवाद — अन-नहल 84

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Tuesday, August 18, 2026

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