Wa yawma nab`asu min kulli ummatin shaheedan summa laa yu`zanu lillazeena kafaroo wa laa hum yusta`taboon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور جس دن ہم ہر اُمت میں سے گواہ (یعنی پیغمبر) کھڑا کریں گے تو نہ تو کفار کو (بولنے کی) اجازت ملے گی اور نہ اُن کے عذر قبول کئے جائیں گے
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
شَهِيدًا (शहीदन): गवाह, यानी हर उम्मत का नबी जो अपनी कौम पर गवाही देगा।
لَا يُؤْذَنُ (ला यूज़न): अनुमति नहीं दी जाएगी।
يُسْتَعْتَبُونَ (युस्ता'तबून): उनसे यह नहीं कहा जाएगा कि वे (अल्लाह को) राज़ी करने की कोशिश करें, यानी उन्हें तौबा या माफ़ी माँगने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप उन लोगों को उस दिन की याद दिलाइए जब हम हर उम्मत में से उसके नबी को गवाह बनाकर खड़ा करेंगे, और वह अपनी कौम के ईमानदार लोगों के ईमान और काफ़िरों के कुफ़्र पर गवाही देगा। उसके बाद काफ़िरों को कोई अनुमति नहीं दी जाएगी कि वे अपने बहाने पेश करें या माफ़ी माँगें। उनसे यह भी नहीं कहा जाएगा कि वे (अल्लाह की) नाराज़गी दूर करने की कोशिश करें, क्योंकि आख़िरत का दिन काम करने का नहीं, बल्कि हिसाब और बदला पाने का दिन है। दुनिया ही वह जगह थी जहाँ उन्हें तौबा और अच्छे कामों का मौक़ा दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। अब वह मौक़ा खत्म हो चुका है, और उनके लिए सिर्फ़ अज़ाब बाकी है।
फ़ायदे:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला ने हर उम्मत में नबी भेजे, और क़यामत के दिन वे नबी अपनी उम्मत के गवाह होंगे। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है कि उसने बिना चेतावनी दिए किसी को सज़ा देने का फ़ैसला नहीं किया।
यह आयत हमें दुनिया की क़द्र करना सिखाती है कि यही वह मौक़ा है जहाँ तौबा, नेकी और अल्लाह की रज़ा हासिल की जा सकती है। आख़िरत में यह दरवाज़ा बंद हो जाएगा।
इससे मुसलमान को यह चेतावनी मिलती है कि वह अपने नबी ﷺ की गवाही का ख़्याल रखे, और अपने ईमान और अमल को सही रखे ताकि उस दिन उसके लिए गवाही बेहतर हो।
यह आयत अल्लाह के इंसाफ़ को भी दिखाती है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा, बल्कि हर उम्मत के पास उसका नबी गवाह होगा, और फिर उसके बाद कोई बहाना क़बूल नहीं होगा।
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।