अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَيَسْتَفِزُّونَكَ – अर्थात तुम्हें जल्दी से उखाड़ फेंकना, यानी तुम्हें बेचैन करके निकाल देना।
- مِنَ الْأَرْضِ – यहाँ "ज़मीन" से मुराद मक्का या फिर मदीना है, जहाँ से काफ़िर तुम्हें निकालना चाहते थे।
- خِلَافَكَ – अर्थात तुम्हारे बाद, तुम्हारे निकल जाने के पश्चात।
- لَا يَلْبَثُونَ – वे ठहरेंगे नहीं, यानी ज़्यादा दिन नहीं टिकेंगे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाते हैं कि ऐ मेरे रसूल! ये काफ़िर तुम्हें इस ज़मीन (मक्का) से निकालने के लिए हर हथकंडा अपना रहे थे, तुम्हें तंग करने और बेचैन करने की कोशिशें कर रहे थे, ताकि तुम यहाँ से चले जाओ। लेकिन अल्लाह ने उन्हें ऐसा करने से रोके रखा, और तुम्हारी हिफ़ाज़त की, यहाँ तक कि तुम्हारी हिजरत उनके इरादों के ख़िलाफ़ अल्लाह के हुक्म से हुई, न कि उनके दबाव से।
और अल्लाह फ़रमाता है कि अगर वे तुम्हें इस ज़मीन से निकाल भी देते, तो उसके बाद वे ख़ुद वहाँ ज़्यादा दिन नहीं टिक पाते। यानी उनकी इस हरकत की सज़ा में अल्लाह उन्हें जल्द ही पकड़ लेता, और वे तबाह कर दिए जाते। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई क़ौम अपने नबी को निकालती है, तो उस पर अल्लाह का अज़ाब आता है। यही वजह है कि मक्का के काफ़िरों को भी यदि वे रसूलुल्लाह ﷺ को निकाल देते, तो उनका विनाश सुनिश्चित था, लेकिन अल्लाह ने अपने नबी की इज़्ज़त और हिकमत से उन्हें यह मौका नहीं दिया।
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि दुश्मन चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, वे तुम्हें बेइज़्ज़त नहीं कर सकते, और तुम्हारा दीन क़ायम रहेगा। साथ ही, यह भी सबक़ है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर मुश्किल में उनका हाथ पकड़ता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मदद उसके नबियों और नेक बंदों के साथ हमेशा रहती है। जब हम किसी मुश्किल में हों, तो यक़ीन रखें कि अल्लाह की तदबीर हमारी समझ से बेहतर होती है। वह कभी अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता। इसलिए हमें सब्र और भरोसे के साथ अपने काम पर डटे रहना चाहिए, और यह समझना चाहिए कि दुनिया की कोई ताक़त अल्लाह की मर्ज़ी के बग़ैर हमें नुक़सान नहीं पहुँचा सकती। यही वह यक़ीन है जो एक मुसलमान के दिल को मज़बूत करता है और उसे हर हाल में शुक्रगुज़ार बनाता है।
📜 आयत 74-78 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 76
सूरा अल-इसरा आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग तो तुम्हें (सर ज़मीन मक्के) से दिल…सूरा आयत 76/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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