अल-कहफ · 99/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
۞ وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ فِي بَعْضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا ۝٩٩
Wa taraknaa ba`dahum Yawma`iziny yamooju fee ba`dinw wa nufikha fis Soori fajama`naahum jam`aa
📖 हिंदी अर्थ
और हम उस दिन (उन्हें उनकी हालत पर) छोड़ देंगे कि एक दूसरे में (टकरा के दरिया की) लहरों की तरह गुड़मुड़ हो जाएँ और सूर फूँका जाएगा तो हम सब को इकट्ठा करेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمُوجُ (यमूज): उथल-पुथल करना, इधर-उधर टकराना, बेचैन होकर लहरों की तरह हिलना।
  • الصُّور (अस-सूर): वह नरसिंगा (सींग) जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँक मारेंगे, जो क़ियामत की एक बड़ी निशानी है।
  • فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا (फ़जम'नाहुम जम'अन): हमने सबको एक साथ इकट्ठा कर दिया, बिना किसी को छोड़े।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें उस वक्त की भयावह तस्वीर दिखाती है जब अल्लाह तआला का वादा पूरा होगा और या'जूज-मा'जूज (गोग और मागोग) की क़ैद से रिहाई होगी। उस दिन अल्लाह उन्हें इस हालत में छोड़ देगा कि वे अपनी बेहद तादाद की वजह से एक-दूसरे से टकराते और उथल-पुथल मचाते हुए निकलेंगे। वे समंदर की लहरों की तरह मौज करेंगे, हर तरफ फैल जाएँगे और ज़मीन पर तबाही मचा देंगे। यह उन लोगों के लिए एक अज़ीम इम्तिहान होगा जो उस वक्त ज़िंदा होंगे।

लेकिन यह सिर्फ़ शुरुआत है। इसके तुरंत बाद अल्लाह तआला फरमाते हैं कि "नफ़्ख़-ए-सूर" (सींग में फूँक) होगी। यह वह पल है जब पूरी कायनात दहल जाएगी, और हर ज़िंदा चीज़ मर जाएगी। फिर दूसरी फूँक के बाद सभी इंसान—पहले वाले और बाद वाले—अपनी क़ब्रों से उठ खड़े होंगे। अल्लाह तआला फरमाता है कि हमने उन सबको एक जगह इकट्ठा कर लिया, बिल्कुल बिना किसी कमी के। यह जमा होना महशर (हश्र के मैदान) में होगा, जहाँ हर इंसान से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा।

इस आयत में दो बड़ी निशानियाँ हैं: पहली या'जूज-मा'जूज का निकलना, और दूसरी क़ियामत का आना। यह हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी। जो लोग आज अल्लाह की नाफ़रमानी में मगन हैं, वे उस दिन पछताएँगे। लेकिन जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है। अल्लाह तआला ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़रिए हमें इन निशानियों से आगाह किया ताकि हम उस दिन के लिए तैयारी करें। यह आयत हमें दावत देती है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, तौबा करें, और उस दिन के हिसाब से पहले अपना हिसाब खुद कर लें। क़ियामत का दिन जितना भयानक है, उतना ही रहमत का दिन भी है—उनके लिए जो अल्लाह की रहमत के तले पनाह लें।

🎧 सुनें

📜 आयत 97-101 — अल-कहफ

97فَمَا اسْطَاعُوا أَن يَظْهَرُوهُ وَمَا اسْتَطَاعُوا لَهُ نَقْبًا
तो कहा कि अब हमको ताँबा दो कि इसको पिघलाकर इस दीवार पर उँडेल दें (ग़रज़) वह ऐसी ऊँची मज़बूत दीवार बनी कि न तो याजूज व माजूज उस पर चढ़ ही सकते थे और न उसमें नक़ब लगा सकते थे
98قَالَ هَٰذَا رَحْمَةٌ مِّن رَّبِّي ۖ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ رَبِّي جَعَلَهُ دَكَّاءَ ۖ وَكَانَ وَعْدُ رَبِّي حَقًّا
जुलक़रनैन ने (दीवार को देखकर) कहा ये मेरे परवरदिगार की मेहरबानी है मगर जब मेरे परवरदिगार का वायदा (क़यामत) आयेगा तो इसे ढहा कर हमवार कर देगा और मेरे परवरदिगार का वायदा सच्चा है
99۞ وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ فِي بَعْضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا
और हम उस दिन (उन्हें उनकी हालत पर) छोड़ देंगे कि एक दूसरे में (टकरा के दरिया की) लहरों की तरह गुड़मुड़ हो जाएँ और सूर फूँका जाएगा तो हम सब को इकट्ठा करेंगे
100وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِّلْكَافِرِينَ عَرْضًا
और उसी दिन जहन्नुम को उन काफिरों के सामने खुल्लम खुल्ला पेश करेंगे
101الَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِي غِطَاءٍ عَن ذِكْرِي وَكَانُوا لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا
और उसी (रसूल की दुश्मनी की सच्ची बात) कुछ भी सुन ही न सकते थे
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अनुवाद — अल-कहफ 99

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Tuesday, August 18, 2026

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