अनुवाद — Tafsir
ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब की आयतों (निशानियों) और उससे मिलने (आख़िरत में हाज़िर होने) का इनकार किया। अतः उनके सारे अच्छे कर्म अकारथ हो गए, क्योंकि उनका आधार ही ईमान नहीं था। क़यामत के दिन हम उन्हें कोई वज़न (महत्व) नहीं देंगे — यानी उनकी कोई हैसियत नहीं होगी, वे बिल्कुल बेक़दर होंगे।
शब्दों के अर्थ:
- آيَاتِ رَبِّهِمْ: उनके रब की निशानियाँ — जिनमें क़ुरआन, पैग़म्बरों के मोजिज़े और क़ुदरत के नज़ारे शामिल हैं।
- لِقَائِهِ: उससे मिलना — यानी मौत के बाद दोबारा जी उठना और अल्लाह के सामने हाज़िर होना।
- حَبِطَتْ: बेकार हो गईं, मिट गईं — जैसे राख को हवा उड़ा ले जाए।
- وَزْنًا: वज़न, तोल, क़द्र-ओ-मंज़िलत।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों का हाल बयान कर रही है जिनके कर्म दुनिया में भले दिखते हैं, लेकिन उनकी जड़ें कुफ़्र पर टिकी हैं। उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया — चाहे वो क़ुरआन हो, चाहे क़ुदरत के नज़ारे हों, चाहे पैग़म्बरों के मोजिज़े — और आख़िरत में अल्लाह से मिलने को भी नहीं माना। उनका दिल इस हक़ीक़त से अंधा था कि एक दिन उन्हें अपने रब के सामने खड़ा होना है।
जब ये दोनों चीज़ें नहीं मानीं — रब की आयतें और रब से मुलाक़ात — तो उनके नेक अमल भी बेकार हो गए। क्योंकि नेक अमल की क़बूलियत का दारोमदार ईमान पर है। जिसने अल्लाह को नहीं पहचाना, उसकी इबादत किसके लिए? और जिसने आख़िरत को नहीं माना, उसकी मेहनत का सिला कहाँ? इसलिए उनकी सारी कोशिशें धूल में मिल गईं।
क़यामत के दिन अल्लाह तआला फ़रमाएँगा कि हम उनके लिए कोई तराज़ू नहीं रखेंगे — यानी उनके अमल का कोई वज़न नहीं होगा, उनकी कोई अहमियत नहीं होगी। जिस दिन मोमिनों के नेक अमल तराज़ू में भारी होंगे, उस दिन ये लोग बिल्कुल हल्के और बेक़दर होंगे। यह उनकी सबसे बड़ी रुसवाई और निहायती नुक़सान होगा।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयो! यह आयत हमें सबक़ देती है कि अमल की क़ीमत उसके ज़ाहिरी हुस्न से नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद से है। अगर नींव ही कमज़ोर हो — यानी ईमान न हो — तो ऊपर से कितनी ही ख़ूबसूरत इमारत खड़ी कर लो, वो गिर जाएगी। अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करो, क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाओ, और उस दिन की तैयारी करो जब तुम्हें अपने रब के सामने पेश होना है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह से मिलने की तमन्ना नहीं रखते, वो आख़िरत में सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले होंगे। मगर जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए ख़ुशख़बरी है — उनके अमल कभी ज़ाया नहीं होंगे, और उनका वज़न उस दिन भारी होगा। अल्लाह हम सबको सच्चा ईमान और अमल-ए-सालिह की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 103-107 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 105
सूरा अल-कहफ आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयातों से…सूरा आयत 105/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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