Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَلَوْلَا – काश! ऐसा क्यों न हुआ?
- مَا شَاءَ اللَّهُ – जो अल्लाह ने चाहा (वही हुआ)।
- لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ – अल्लाह के बिना कोई ताक़त नहीं।
- إِن تَرَنِ – अगर तू मुझे देखता है।
- أَقَلَّ مِنكَ مَالًا وَوَلَدًا – धन और संतान में तुझसे कम।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उस ईमानवाले व्यक्ति की नसीहत को बयान कर रहा है जो अपने घमंडी और काफ़िर दोस्त को समझा रहा था। जब वह ईमानवाला अपने दोस्त के बाग़ में दाख़िल हुआ, तो उसने उसे नसीहत दी कि तूने अपने बाग़ में क़दम रखते ही अल्लाह की तारीफ़ और उसका ज़िक्र क्यों नहीं किया? तुझे चाहिए था कि तू कहता: "मा शाअल्लाह" – यानी जो कुछ अल्लाह ने चाहा, वही हुआ, और यह नेमत अल्लाह ही की तरफ़ से है। और साथ ही यह भी कहता: "ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" – यानी मुझमें और किसी इंसान में कोई ताक़त नहीं, सारी ताक़त सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। यह कहना उसकी तरफ़ से अल्लाह की नेमत का शुक्रिया अदा करना और अपनी कमज़ोरी का इक़रार करना था।
फिर उस ईमानवाले ने उस घमंडी दोस्त से कहा: अगर तू मुझे अपने से कम धन और कम संतान वाला देखता है, तो यह घमंड और तकब्बुर की वजह नहीं बननी चाहिए। क्योंकि दौलत और औलाद अल्लाह की देन हैं, वह जिसे चाहे दे और जिससे चाहे छीन ले। यह नेमतें किसी की इज़्ज़त या अल्लाह की नज़दीकी की पैमाना नहीं हैं। असली इज़्ज़त तो अल्लाह की इताअत और उसके ज़िक्र में है।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि जब भी अल्लाह हमें कोई नेमत दे – चाहे वह दौलत हो, औलाद हो, मकान हो, या कोई और चीज़ – तो हमें फ़ौरन "मा शाअल्लाह" और "ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" कहना चाहिए। यह कलिमात हमारे दिल को घमंड से पाक रखते हैं और अल्लाह की नेमतों में बरकत का ज़रिया बनते हैं। याद रखिए, जो इंसान अल्लाह की नेमत देखकर उसका शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। और जो घमंड करता है, उससे नेमतें छीन ली जाती हैं। इसलिए हमेशा अल्लाह के आगे अपनी बेबसी और कमज़ोरी का इज़हार करें और हर नेमत पर उसका शुक्र अदा करें।
📜 आयत 37-41 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 39
सूरा अल-कहफ आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तू अपने बाग़ में आया तो (ये) क्यों…सूरा आयत 39/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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