अल-कहफ · 93/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ بَيْنَ السَّدَّيْنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوْمًا لَّا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا ۝٩٣
Hattaaa izaa balagha bainas saddaini wajada min doonihimaa qawmal laa yakaa doona yafqahoona qawlaa
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब चलते-चलते रोम में एक पहाड़ के (कंगुरों के) दीवारों के बीचो बीच पहुँच गया तो उन दोनों दीवारों के इस तरफ एक क़ौम को (आबाद) पाया तो बात चीत कुछ समझ ही नहीं सकती थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّدَّيْنِ (सद्दैन): दो पहाड़ या दो प्राकृतिक दीवारें जो आड़ बनती हैं।
  • مِن دُونِهِمَا (मिन दूनिहिमा): उन दोनों (पहाड़ों) के पार या उनके सामने।
  • لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا (ला यकादूना यफ़्क़हूना क़ौला): वे लोग किसी की बात को मुश्किल से समझ पाते थे, यानी उनकी भाषा बिल्कुल अलग थी और वे दूसरों की बोली को लगभग नहीं समझते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत ज़ुल-क़रनैन अलैहिस्सलाम अपने सफ़र में पूर्व की ओर बढ़ते रहे, यहाँ तक कि वे दो विशाल पहाड़ों के बीच पहुँच गए। ये पहाड़ एक प्राकृतिक दीवार की तरह थे, जो दोनों ओर फैले हुए थे और उनके बीच एक संकरा रास्ता था। जब वे इस स्थान पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि इन पहाड़ों के पार एक क़ौम (समुदाय) रहती है, जो बोलचाल की भाषा में बहुत कमज़ोर थी। वे लोग न तो दूसरों की बात अच्छी तरह समझ पाते थे और न ही अपनी बात स्पष्ट रूप से दूसरों को समझा पाते थे। उनकी भाषा बिल्कुल अलग और कठिन थी, जिससे आपसी संवाद में बड़ी दिक्कत होती थी।

यह दृश्य हमें सिखाता है कि अल्लाह ने दुनिया में अलग-अलग क़ौमें और भाषाएँ बनाई हैं, ताकि लोग एक-दूसरे को जानें-पहचानें और आपस में भलाई के कामों में सहयोग करें। हज़रत ज़ुल-क़रनैन ने इस कठिन परिस्थिति में भी हिम्मत नहीं हारी, बल्कि उन्होंने इन लोगों की मदद करने का फ़ैसला किया, जैसा कि आगे की आयातों में बयान होगा। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें हर हाल में दूसरों की भलाई के लिए आगे आना चाहिए, चाहे भाषा या संस्कृति का फ़र्क़ कितना ही बड़ा क्यों न हो। अल्लाह तआला ने ज़ुल-क़रनैन को यह शक्ति और अधिकार दिया था, और वे इसका इस्तेमाल इंसानियत की ख़िदमत में कर रहे थे। यही अल्लाह के नेक बंदों की पहचान है कि वे अपनी ताक़त और वरदानों को अल्लाह की मख़लूक़ (सृष्टि) की भलाई के लिए इस्तेमाल करते हैं। हमें भी चाहिए कि हम अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज की भलाई और लोगों की मदद में करें, ताकि अल्लाह की रहमत और मदद हमारे साथ रहे।



📜 आयत 91-95 — अल-कहफ

91كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا
और था भी ऐसा ही और जुलक़रनैन के पास वो कुछ भी था हमको उससे पूरी वाकफ़ियत थी
92ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
(ग़रज़) उसने फिर एक और राह एख्तियार की
93حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ بَيْنَ السَّدَّيْنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوْمًا لَّا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا
यहाँ तक कि जब चलते-चलते रोम में एक पहाड़ के (कंगुरों के) दीवारों के बीचो बीच पहुँच गया तो उन दोनों दीवारों के इस तरफ एक क़ौम को (आबाद) पाया तो बात चीत कुछ समझ ही नहीं सकती थी
94قَالُوا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ إِنَّ يَأْجُوجَ وَمَأْجُوجَ مُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ فَهَلْ نَجْعَلُ لَكَ خَرْجًا عَلَىٰ أَن تَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ سَدًّا
उन लोगों ने मुतरज्जिम के ज़रिए से अर्ज़ की ऐ ज़ुलकरनैन (इसी घाटी के उधर याजूज माजूज की क़ौम है जो) मुल्क में फ़साद फैलाया करते हैं तो अगर आप की इजाज़त हो तो हम लोग इस ग़र्ज़ से आपसे पास चन्दा जमा करें कि आप हमारे और उनके दरमियान कोई दीवार बना दें
95قَالَ مَا مَكَّنِّي فِيهِ رَبِّي خَيْرٌ فَأَعِينُونِي بِقُوَّةٍ أَجْعَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ رَدْمًا
जुलकरनैन ने कहा कि मेरे परवरदिगार ने ख़र्च की जो कुदरत मुझे दे रखी है वह (तुम्हारे चन्दे से) कहीं बेहतर है (माल की ज़रूरत नहीं) तुम फक़त मुझे क़ूवत से मदद दो तो मैं तुम्हारे और उनके दरमियान एक रोक बना दूँ
अल-कहफकुरान सूची
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मक्कीRevelation
93आयत

अनुवाद — अल-कहफ 93

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सूरा आयत 93/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 91–95. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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