मरियम · 36/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَإِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ ۝٣٦
Wa innal laaha Rabbee wa Rabbukum fa`budooh; haazaa Siraatum Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (ही) मेरा (भी) परवरदिगार है और तुम्हारा (भी) परवरदिगार है तो सब के सब उसी की इबादत करो यही (तौहीद) सीधा रास्ता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبِّي: मेरा पालनहार (जो मुझे पालता-पोसता है और मेरी देखभाल करता है)
  • رَبُّكُمْ: तुम सबका पालनहार
  • فَاعْبُدُوهُ: तो तुम उसी की इबादत करो (उसी की बंदगी करो)
  • صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ: सीधा रास्ता (जिसमें कोई टेढ़ापन न हो)

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "बेशक अल्लाह ही मेरा रब है और तुम्हारा रब भी।" यानी वही एकमात्र पालनहार है, जिसने मुझे पैदा किया और तुम्हें पैदा किया। वही रिज़्क़ देने वाला है, जीवन और मौत का मालिक है, और सारी कायनात का स्वामी है। इसलिए तुम सब उसी की इबादत करो, उसी के आगे सिर झुकाओ, और उसी की बंदगी में किसी को उसका साझी न बनाओ।

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने साफ़ तौर पर यह बता दिया कि मैं भी तुम्हारी तरह अल्लाह का बंदा हूं। मैं कोई खुदा नहीं हूं, न ही अल्लाह का बेटा हूं। मैं और तुम सब अल्लाह की बंदगी में बराबर हैं। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम था, जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को दिया।

फिर उन्होंने कहा: "यही सीधा रास्ता है।" यानी अल्लाह की इबादत और उसकी बंदगी ही वह सीधा रास्ता है जो इंसान को जन्नत तक पहुंचाता है। इस रास्ते में कोई टेढ़ापन नहीं, कोई गुमराही नहीं। यही वह रास्ता है जिस पर चलकर इंसान अल्लाह की रज़ा और मोहब्बत हासिल करता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में सबसे बड़ी बात तौहीद है — यानी अल्लाह को एक मानना और उसी की इबादत करना। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी ने खुद को अल्लाह का बंदा बताया और अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत दी। यही दावत हर नबी का पैग़ाम रही है। आज हमें भी इसी पैग़ाम को अपनाना है — अल्लाह को एक मानना, उसी की इबादत करना, और अपनी ज़िंदगी को उसके बताए हुए सीधे रास्ते पर चलाना। यही रास्ता हमें सुकून, सफलता और जन्नत तक पहुंचाएगा। अल्लाह हम सबको इस सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 34-38 — सूरा मरियम

34ذَٰلِكَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قَوْلَ الْحَقِّ الَّذِي فِيهِ يَمْتَرُونَ
ये है कि मरियम के बेटे ईसा का सच्चा (सच्चा) क़िस्सा जिसमें ये लोग (ख्वाहमख्वाह) शक किया करते हैं
35مَا كَانَ لِلَّهِ أَن يَتَّخِذَ مِن وَلَدٍ ۖ سُبْحَانَهُ ۚ إِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
खुदा कि लिए ये किसी तरह सज़ावार नहीं कि वह (किसी को) बेटा बनाए वह पाक व पकीज़ा है जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उसको कह देता है कि ''हो जा'' तो वह हो जाता है
36وَإِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (ही) मेरा (भी) परवरदिगार है और तुम्हारा (भी) परवरदिगार है तो सब के सब उसी की इबादत करो यही (तौहीद) सीधा रास्ता है
37فَاخْتَلَفَ الْأَحْزَابُ مِن بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن مَّشْهَدِ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(और यही दीन ईसा लेकर आए थे) फिर (काफिरों के) फ़िरकों ने बहम एख़तेलाफ किया तो जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तियार किया उनके लिए बड़े (सख्त दिन खुदा के हुज़ूर) हाज़िर होने से ख़राबी है
38أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
जिस दिन ये लोग हमारे हुज़ूर में हाज़िर होंगे क्या कुछ सुनते देखते होंगे मगर आज तो नफ़रमान लोग खुल्लम खुल्ला गुमराही में हैं
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — मरियम 36

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Friday, October 2, 2026

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