Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَرَاغِبٌ أَنتَ عَنْ آلِهَتِي: क्या तुम मेरे पूज्यों (देवताओं) से विमुख हो गए हो?
- لَئِن لَّمْ تَنتَهِ: यदि तुमने (इनकी बुराई करने से) नहीं रुके।
- لَأَرْجُمَنَّكَ: मैं तुम्हें पत्थरों से मार डालूँगा।
- وَاهْجُرْنِي مَلِيًّا: और मुझे लंबे समय तक छोड़ दो (मुझसे दूर रहो)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने पिता आज़र को सच्चाई और एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उन्हें मूर्तिपूजा से बचने की नसीहत दी, तो आज़र ने गुस्से और तिरस्कार के साथ जवाब दिया। उसने कहा: "क्या तुम मेरे देवताओं से विमुख हो गए हो, ऐ इब्राहीम? यदि तुमने इनकी बुराई करने से परहेज़ नहीं किया, तो मैं तुम्हें पत्थरों से मार डालूँगा। और मुझसे दूर रहो, लंबे समय तक मेरे सामने न आना।"
यह वह कठिन परीक्षा थी जब सच्चाई के दावेदार को अपने सबसे करीबी रिश्तेदार से कठोर शब्द सुनने पड़े। पिता ने अपने नेक बेटे को धमकी दी और उसे अपने जीवन से अलग कर दिया। लेकिन हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने इस कठिनाई पर सब्र किया और अपने पिता के लिए दुआ करते रहे, क्योंकि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि वे उनके लिए माफ़ी माँगते रहेंगे।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई पर क़ायम रहना और अल्लाह के दीन की दावत देना हर हाल में जारी रखना चाहिए, चाहे अपने ही घर के लोग विरोध करें। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने पिता की धमकी के बावजूद नरमी और अदब से काम लिया और उन्हें समझाते रहे। यह हमारे लिए एक आदर्श है कि हम अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से हमेशा अच्छे अख़लाक़ (शिष्टाचार) के साथ पेश आएं, भले ही वे हमारी बात न मानें।
यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की राह में आने वाली मुश्किलें और तकलीफें हमें कमज़ोर नहीं करनी चाहिए। जब हमारा मक़सद सिर्फ अल्लाह की रज़ा हो, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें कामयाबी देता है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को बाद में अल्लाह ने दुनिया में इमाम (नेता) बनाया और उनकी नस्ल में कई नबी पैदा किए। यही वह इनाम है जो अल्लाह अपने सब्र करने वाले बंदों को देता है।
📜 आयत 44-48 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 46
सूरा मरियम आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (आज़र ने) कहा (क्यों) इबराहीम क्या तू मेरे माबूदों को…सूरा आयत 46/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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