मरियम · 64/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا ۝٦٤
Wa maa natanazzalu illaa bi amri Rabbika lahoo maa baina aideenaa wa maa khalfanaa wa maa baina zaalik; wa maa kaana Rabbuka nasiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हम लोग फ़रिश्ते आप के परवरदिगार के हुक्म के बग़ैर (दुनिया में) नहीं नाज़िल होते जो कुछ हमारे सामने है और जो कुछ हमारे पीठ पीछे है और जो कुछ उनके दरमियान में है (ग़रज़ सबकुछ) उसी का है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَتَنَزَّلُ: हम (फ़रिश्ते) उतरते हैं
  • بِأَمْرِ رَبِّكَ: तुम्हारे रब के आदेश से
  • مَا بَيْنَ أَيْدِينَا: जो हमारे सामने है (आख़िरत के मामले)
  • مَا خَلْفَنَا: जो हमारे पीछे है (दुनिया के मामले)
  • نَسِيًّا: भूलने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम का वह कथन है जो उन्होंने नबी करीम ﷺ से कहा जब वह कुछ देर से तशरीफ़ लाए। आप ﷺ ने उनसे पूछा कि आपको किस चीज़ ने रोका? तो उन्होंने यह जवाब दिया।

हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं: "हम फ़रिश्ते अपनी मर्ज़ी से या अपनी तरफ़ से नहीं उतरते, बल्कि हम तो सिर्फ़ तुम्हारे रब के हुक्म से उतरते हैं। हम तो मामूर (आदेशित) बंदे हैं। हमारे सामने जो कुछ है — यानी आख़िरत के मामले, और हमारे पीछे जो कुछ है — यानी दुनिया के मामले, और इन दोनों के बीच जो कुछ है — यानी क़ब्र का जीवन और दोबारा उठाए जाने का समय, सब कुछ अल्लाह ही के इख़्तियार में है। वही सब कुछ जानता है और वही सब कुछ नियंत्रित करता है।"

फिर फ़रमाया: "और तुम्हारा रब कभी भूलने वाला नहीं है।" यानी अल्लाह तआला हर चीज़ को याद रखता है, उसकी निग़ाह में कोई चीज़ छोटी या बड़ी नहीं, वह अपने बंदों के हर अमल, हर दुआ, हर ज़रूरत को जानता है और उसे कभी भूलता नहीं। वह जब चाहता है अपने बंदों पर अपनी रहमत से फ़रिश्ते उतारता है, और जब चाहता है उन्हें रोक लेता है — यह सब उसी की हिकमत और मशीयत के मुताबिक़ होता है।


दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी तसल्ली और सबक़ है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह तआला कभी भूलता नहीं, तो हमें अपनी हर दुआ, हर ज़रूरत, हर तकलीफ़ में उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए। वह हमारी हर पुकार सुनता है और हर हाल में हमारे साथ है। फ़रिश्तों का उतरना भी उसी के हुक्म से होता है — यानी पूरी काइनात उसी के इशारे पर चलती है। जब हमें यह एहसास हो जाए कि हमारा रब हर चीज़ पर क़ादिर है और उसे कुछ भी भूलता नहीं, तो हमारा दिल उसकी रहमत से कभी मायूस नहीं होना चाहिए। चाहे जितनी भी मुश्किलें हों, अल्लाह की रहमत और उसका इल्म उससे कहीं बड़ा है। यही ईमान की मिठास है — कि बंदा अपने रब पर पूरा भरोसा रखे और जाने कि उसका रब उसे कभी भूलने वाला नहीं।

🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — मरियम

62لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا إِلَّا سَلَامًا ۖ وَلَهُمْ رِزْقُهُمْ فِيهَا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
वह लोग वहाँ सलाम के सिवा कोई बेहूदा बात सुनेंगे ही नहीं मगर हर तरफ से इस्लाम ही इस्लाम (की आवाज़ आएगी) और वहाँ उनका खाना सुबह व शाम (जिस वक्त चाहेंगे) उनके लिए (तैयार) रहेगा
63تِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي نُورِثُ مِنْ عِبَادِنَا مَن كَانَ تَقِيًّا
यही वह बेिहश्त है कि हमारे बन्दों में से जो परहेज़गार होगा हम उसे उसका वारिस बनायेगे
64وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا
और (ऐ रसूल) हम लोग फ़रिश्ते आप के परवरदिगार के हुक्म के बग़ैर (दुनिया में) नहीं नाज़िल होते जो कुछ हमारे सामने है और जो कुछ हमारे पीठ पीछे है और जो कुछ उनके दरमियान में है (ग़रज़ सबकुछ) उसी का है
65رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है
66وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा
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अनुवाद — मरियम 64

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Tuesday, August 18, 2026

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