अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نُورِثُ: हम विरासत में देते हैं, अर्थात हम उसे प्रदान करते हैं और उसका अधिकारी बनाते हैं।
- تَقِيًّا: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करे और उसकी मनाही से बचे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह वह जन्नत है जिसका वर्णन पिछली आयतों में किया गया है—वह जन्नत जिसके नीचे नहरें बहती हैं, जिसके फल हमेशा रहने वाले हैं, और जिसकी छाया स्थायी है। यह वह जन्नत है जिसे अल्लाह तआला अपने उन बंदों को विरासत में देता है जो परहेज़गार बन गए। यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो केवल इच्छा करने से मिल जाए, बल्कि यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपने जीवन को तक़वा (अल्लाह का डर और उसकी आज्ञाकारिता) पर स्थापित किया।
तक़वा का अर्थ है: अल्लाह के आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना। यह वह गुण है जो इंसान को जन्नत का हक़दार बनाता है। अल्लाह तआला ने यहाँ "نُورِثُ" (हम विरासत में देते हैं) का शब्द इस्तेमाल किया है, जो दर्शाता है कि जन्नत एक ऐसी नेमत है जो अल्लाह की ओर से उसके बंदों को बिना किसी कीमत के दी जाती है, बल्कि यह उनके ईमान और अच्छे कर्मों का फल है। यह अल्लाह का फज़ल और करम है कि वह अपने परहेज़गार बंदों को इस स्थायी नेमत का वारिस बनाता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जन्नत पाने का एकमात्र रास्ता तक़वा है। जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह से डरकर जीता है, उसकी निगाहें हमेशा अल्लाह की रज़ा पर रहती हैं, वह हर काम में अल्लाह की मरज़ी को मद्देनज़र रखता है—चाहे वह नमाज़ हो, रोज़ा हो, अच्छे आचरण हों, या दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत तैयार की है, जो हमेशा रहने वाली है।
इस आयत में एक बहुत बड़ी खुशखबरी है—अल्लाह अपने बंदों को याद दिला रहा है कि तक़वा अपनाओ, क्योंकि इसी का नतीजा जन्नत है। यहाँ अल्लाह ने यह भी बताया कि जन्नत कोई दूर की चीज़ नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए तैयार है जो आज ही अपने जीवन को सुधार लें। अल्लाह का दरवाज़ा हर उस बंदे के लिए खुला है जो उसकी ओर रुजू करे, तौबा करे, और अपने अंदर तक़वा पैदा करे।
इसलिए, हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा करे, अपने कर्मों को अच्छा बनाए, और उन चीज़ों से बचे जो अल्लाह ने मना की हैं। यही वह रास्ता है जो उसे उस स्थायी जन्नत तक पहुँचाएगा, जहाँ कोई दुख नहीं, कोई थकान नहीं, और कोई अंत नहीं। अल्लाह हम सभी को तक़वा अपनाने की तौफ़ीक़ दे और हमें अपनी जन्नत का वारिस बनाए। आमीन।
📜 आयत 61-65 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 63
सूरा मरियम आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही वह बेिहश्त है कि हमारे बन्दों में से जो…सूरा आयत 63/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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