मरियम · 63/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
تِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي نُورِثُ مِنْ عِبَادِنَا مَن كَانَ تَقِيًّا ۝٦٣
Tilkal jannatul latee oorisu min `ibaadinaa man kaana taqiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
यही वह बेिहश्त है कि हमारे बन्दों में से जो परहेज़गार होगा हम उसे उसका वारिस बनायेगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُورِثُ: हम विरासत में देते हैं, अर्थात हम उसे प्रदान करते हैं और उसका अधिकारी बनाते हैं।
  • تَقِيًّا: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करे और उसकी मनाही से बचे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह जन्नत है जिसका वर्णन पिछली आयतों में किया गया है—वह जन्नत जिसके नीचे नहरें बहती हैं, जिसके फल हमेशा रहने वाले हैं, और जिसकी छाया स्थायी है। यह वह जन्नत है जिसे अल्लाह तआला अपने उन बंदों को विरासत में देता है जो परहेज़गार बन गए। यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो केवल इच्छा करने से मिल जाए, बल्कि यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपने जीवन को तक़वा (अल्लाह का डर और उसकी आज्ञाकारिता) पर स्थापित किया।

तक़वा का अर्थ है: अल्लाह के आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना। यह वह गुण है जो इंसान को जन्नत का हक़दार बनाता है। अल्लाह तआला ने यहाँ "نُورِثُ" (हम विरासत में देते हैं) का शब्द इस्तेमाल किया है, जो दर्शाता है कि जन्नत एक ऐसी नेमत है जो अल्लाह की ओर से उसके बंदों को बिना किसी कीमत के दी जाती है, बल्कि यह उनके ईमान और अच्छे कर्मों का फल है। यह अल्लाह का फज़ल और करम है कि वह अपने परहेज़गार बंदों को इस स्थायी नेमत का वारिस बनाता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जन्नत पाने का एकमात्र रास्ता तक़वा है। जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह से डरकर जीता है, उसकी निगाहें हमेशा अल्लाह की रज़ा पर रहती हैं, वह हर काम में अल्लाह की मरज़ी को मद्देनज़र रखता है—चाहे वह नमाज़ हो, रोज़ा हो, अच्छे आचरण हों, या दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत तैयार की है, जो हमेशा रहने वाली है।

इस आयत में एक बहुत बड़ी खुशखबरी है—अल्लाह अपने बंदों को याद दिला रहा है कि तक़वा अपनाओ, क्योंकि इसी का नतीजा जन्नत है। यहाँ अल्लाह ने यह भी बताया कि जन्नत कोई दूर की चीज़ नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए तैयार है जो आज ही अपने जीवन को सुधार लें। अल्लाह का दरवाज़ा हर उस बंदे के लिए खुला है जो उसकी ओर रुजू करे, तौबा करे, और अपने अंदर तक़वा पैदा करे।

इसलिए, हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा करे, अपने कर्मों को अच्छा बनाए, और उन चीज़ों से बचे जो अल्लाह ने मना की हैं। यही वह रास्ता है जो उसे उस स्थायी जन्नत तक पहुँचाएगा, जहाँ कोई दुख नहीं, कोई थकान नहीं, और कोई अंत नहीं। अल्लाह हम सभी को तक़वा अपनाने की तौफ़ीक़ दे और हमें अपनी जन्नत का वारिस बनाए। आमीन।



📜 आयत 61-65 — सूरा मरियम

61جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ عِبَادَهُ بِالْغَيْبِ ۚ إِنَّهُ كَانَ وَعْدُهُ مَأْتِيًّا
जिनका खुदा ने अपने बन्दों से ग़ाएबाना वायदा कर लिया है बेशक उसका वायदा पूरा होने वाला है
62لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا إِلَّا سَلَامًا ۖ وَلَهُمْ رِزْقُهُمْ فِيهَا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
वह लोग वहाँ सलाम के सिवा कोई बेहूदा बात सुनेंगे ही नहीं मगर हर तरफ से इस्लाम ही इस्लाम (की आवाज़ आएगी) और वहाँ उनका खाना सुबह व शाम (जिस वक्त चाहेंगे) उनके लिए (तैयार) रहेगा
63تِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي نُورِثُ مِنْ عِبَادِنَا مَن كَانَ تَقِيًّا
यही वह बेिहश्त है कि हमारे बन्दों में से जो परहेज़गार होगा हम उसे उसका वारिस बनायेगे
64وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا
और (ऐ रसूल) हम लोग फ़रिश्ते आप के परवरदिगार के हुक्म के बग़ैर (दुनिया में) नहीं नाज़िल होते जो कुछ हमारे सामने है और जो कुछ हमारे पीठ पीछे है और जो कुछ उनके दरमियान में है (ग़रज़ सबकुछ) उसी का है
65رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
63आयत

अनुवाद — मरियम 63

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Thursday, October 1, 2026

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