मरियम · 65/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا ۝٦٥
Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa fa`bud hu wastabir li`ibaadatih; hal ta`lamu lahoo samiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَمِيًّا: समान, सदृश, नाम वाला या जैसा कोई हो। अर्थात कोई ऐसा जो उसके नाम, गुण या स्वरूप में उसका साझी या समकक्ष हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह तआला की महानता और उसकी एकता का एहसास कराती है। अल्लाह ही आसमानों और ज़मीन का रब है, यानी उसी ने उन्हें पैदा किया, वही उनका मालिक है, और वही उनके सारे मामलों का प्रबंधक है। आसमानों की बुलंदियाँ, ज़मीन की गहराइयाँ, और इन दोनों के बीच की हर चीज़ — चाहे वह तारे हों, पहाड़ हों, समुद्र हों, पेड़-पौधे हों, जानवर हों या इंसान — सब कुछ उसी की मल्कियत में है और सब कुछ उसी के इशारे पर चल रहा है।

जब यह सब कुछ उसी का है, तो इबादत (बंदगी) भी उसी की होनी चाहिए। इसलिए अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को हुक्म देता है कि केवल उसी की इबादत करो, और इस इबादत पर सब्र और स्थिरता से डटे रहो। इबादत में सब्र का मतलब है कि नमाज़, रोज़ा, ज़िक्र, दुआ और तमाम नेक कामों पर हमेशा कायम रहो, चाहे मुश्किलें आएँ, चाहे दिल उकताए, चाहे दुनिया के कामों में व्यस्तता हो — बंदगी में कोई कमी न आने पाए।

फिर अल्लाह तआला एक सवालिया अंदाज़ में फ़रमाता है: "क्या तुम उसके लिए कोई समान या साझी जानते हो?" यानी क्या उसके जैसा कोई है? क्या उसके नाम, उसके गुण, उसकी शान में कोई उसका हमसर हो सकता है? हरगिज़ नहीं! न आसमानों में, न ज़मीन में, न किसी और जगह — कोई भी उसका समकक्ष नहीं। यह एक ऐसा सवाल है जो हर इंसान के दिल को झिंझोड़ देता है कि जब कोई उसका जैसा नहीं, तो फिर हम किसी और की इबादत क्यों करें? किसी और के आगे सिर क्यों झुकाएँ?

यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की सबसे प्यारी और सबसे स्पष्ट शिक्षा देती है। यह हमें बताती है कि जिस रब ने यह पूरी कायनात बनाई है, वही हमारी परवरिश करने वाला है, वही हमें रिज़्क़ देता है, वही हमें बीमारी में शिफ़ा देता है, वही हमारी दुआएँ सुनता है। तो क्या हमें उसी की तरफ़ रुजू नहीं करना चाहिए? क्या हमें उसी से मदद नहीं माँगनी चाहिए?

और जब हम इबादत में सब्र करेंगे, तो अल्लाह हमें दुनिया में सुकून देगा और आख़िरत में जन्नत की नेमतें अता करेगा। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी तक पहुँचाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह को याद रखें, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, और उस पर स्थिर रहें — क्योंकि वही सब कुछ का मालिक है, और उसके जैसा कोई नहीं।



📜 आयत 63-67 — सूरा मरियम

63تِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي نُورِثُ مِنْ عِبَادِنَا مَن كَانَ تَقِيًّا
यही वह बेिहश्त है कि हमारे बन्दों में से जो परहेज़गार होगा हम उसे उसका वारिस बनायेगे
64وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا
और (ऐ रसूल) हम लोग फ़रिश्ते आप के परवरदिगार के हुक्म के बग़ैर (दुनिया में) नहीं नाज़िल होते जो कुछ हमारे सामने है और जो कुछ हमारे पीठ पीछे है और जो कुछ उनके दरमियान में है (ग़रज़ सबकुछ) उसी का है
65رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है
66وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा
67أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا
क्या वह (आदमी) उसको नहीं याद करता कि उसको इससे पहले जब वह कुछ भी न था पैदा किया था
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
65आयत

अनुवाद — मरियम 65

सूरा मरियम आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान…

सूरा आयत 65/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Sunday, October 11, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए