मरियम · 66/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا ۝٦٦
Wa yaqoolul insaanu `aizaa maa mittu lasawfa ukhraju haiyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الإِنسَانُ (इंसान): यहाँ से आशय काफ़िर इंसान से है, जो पुनरुत्थान (आख़िरत में दोबारा जीवित होने) का इन्कार करता है।
  • أَإِذَا مَا مِتُّ (क्या जब मैं मर जाऊँ): यानी जब मैं मृत्यु को प्राप्त हो जाऊँ और मेरी हड्डियाँ चूर-चूर हो जाएँ।
  • لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا (तो क्या मैं जीवित निकाला जाऊँगा): यानी क्या मुझे क़ब्र से दोबारा ज़िंदा होकर उठाया जाएगा?

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस काफ़िर इंसान की हालत बयान करती है जो मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होने पर विश्वास नहीं करता। वह हैरानी और इन्कार के साथ कहता है: "क्या जब मैं मर जाऊँगा और मेरा शरीर मिट्टी में मिल जाएगा, तो क्या मैं फिर से क़ब्र से जीवित निकाला जाऊँगा?" यह सवाल वह सच्चाई जानने के लिए नहीं पूछता, बल्कि मज़ाक़ उड़ाने और झुठलाने के लिए पूछता है।

इस आयत के शाने नुज़ूल (पृष्ठभूमि) में आता है कि उबय्य इब्न ख़लफ़ नामक एक काफ़िर ने पुनरुत्थान का इन्कार किया। उसने एक सड़ी हुई हड्डी को हाथ में लेकर उसे चूर-चूर किया और कहा: "क्या जब हम इस तरह मिट्टी में मिल जाएँगे तो दोबारा ज़िंदा किए जाएँगे?" तो अल्लाह ने यह आयत उतारी।

यह आयत उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते। वे अपनी समझ में इस बात को असंभव समझते हैं कि मरने के बाद इंसान दोबारा ज़िंदा होगा, लेकिन वे भूल जाते हैं कि जिस अल्लाह ने पहली बार उन्हें पैदा किया, वह उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। यह उनकी नादानी है कि वे अल्लाह की क़ुदरत को भूलकर अपनी अक़्ल को मापदंड बना लेते हैं।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि मृत्यु अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। जो लोग आज पुनरुत्थान को मज़ाक़ समझते हैं, वे उस दिन ज़रूर जान लेंगे कि अल्लाह का वादा सच्चा था। हमें चाहिए कि हम इस जीवन में अल्लाह की इबादत करें और उसके आदेशों का पालन करें, ताकि उस दिन हम क़ब्र से जीवित उठकर जन्नत की तरफ़ बढ़ें। याद रखें, अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई चीज़ असंभव नहीं है। जिसने हमें पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा। यही ईमान की निशानी है — कि हम उस दिन पर पूरा यक़ीन रखें और उसके लिए तैयारी करें।



📜 आयत 64-68 — मरियम

64وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا
और (ऐ रसूल) हम लोग फ़रिश्ते आप के परवरदिगार के हुक्म के बग़ैर (दुनिया में) नहीं नाज़िल होते जो कुछ हमारे सामने है और जो कुछ हमारे पीठ पीछे है और जो कुछ उनके दरमियान में है (ग़रज़ सबकुछ) उसी का है
65رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है
66وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा
67أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا
क्या वह (आदमी) उसको नहीं याद करता कि उसको इससे पहले जब वह कुछ भी न था पैदा किया था
68فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَالشَّيَاطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا
तो वह (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) क़िस्म हम उनको और शैतान को इकट्ठा करेगे फिर उन सब को जहन्नुम के गिर्दागिर्द घुटनों के बल हाज़िर करेंगे
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अनुवाद — मरियम 66

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Tuesday, August 18, 2026

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