Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَاهَدُوا عَهْدًا: उन्होंने कोई वचन या प्रतिज्ञा की।
- نَبَذَهُ: उसे तोड़ दिया, फेंक दिया, त्याग दिया।
- فَرِيقٌ: एक समूह, एक गिरोह।
- لَا يُؤْمِنُونَ: वे ईमान नहीं लाते, सच्चा विश्वास नहीं रखते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत बनी इस्राईल (यहूदियों) के उस बुरे चरित्र को उजागर करती है जो उनकी आदत बन चुकी थी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "क्या अजीब बात है! जब भी उन्होंने कोई वचन या अहद किया, तो उनमें से एक गिरोह ने उसे तोड़ दिया और उसे पीछे फेंक दिया।" यह उनकी पुरानी आदत थी—आज वचन देते, कल ही उसे भूल जाते या तोड़ देते।
यहूदियों ने अल्लाह से और उसके रसूलों से कई वचन लिए, जैसे तौरात में मुहम्मद ﷺ के आने की खबर थी और उनसे वचन लिया गया था कि जब वह अंतिम रसूल आएँ तो वे उन पर ईमान लाएँगे। लेकिन जब मुहम्मद ﷺ आए, तो उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया और उन पर ईमान नहीं लाए।
आयत में आगे कहा गया: "बल्कि उनमें से अधिकतर ईमान ही नहीं लाते।" यानी यह केवल एक छोटा समूह नहीं था जो वचन तोड़ता था, बल्कि उनकी अधिकांश जनता ही ईमान से वंचित थी। उनका ईमान सिर्फ ज़ुबानी था, दिल से नहीं। अगर उन्हें सच्चा ईमान होता, तो वे अपने वचनों पर कायम रहते, क्योंकि सच्चा ईमान इंसान को वफ़ादारी और अमानतदारी सिखाता है।
फ़ायदे (सबक):
- वचन तोड़ना मुनाफ़िक़ों की निशानी है: इस आयत से सीख मिलती है कि वचन को पूरा करना ईमान का हिस्सा है। जो लोग वचन तोड़ते हैं, उनका ईमान कमज़ोर या अधूरा है। एक सच्चा मुसलमान अपने वादे का पक्का होता है, चाहे वह अल्लाह से हो या इंसानों से।
- अल्लाह के दीन पर स्थिर रहना: यहूदियों की तरह हमें भी अपने अहद (प्रतिज्ञा) पर कायम रहना चाहिए जो हमने अल्लाह से किया है—कि हम उसकी इबादत करेंगे, उसके हुक्म मानेंगे और उसके रसूल ﷺ की पैरवी करेंगे।
- ईमान का असर अमल पर पड़ता है: सच्चा ईमान सिर्फ दिल का दावा नहीं, बल्कि अमल में नज़र आता है। जिसके दिल में सच्चा ईमान होता है, उसके अमल सुधर जाते हैं और वह अल्लाह के हुक्मों का पालन करता है।
- अल्लाह की नेमतों की क़द्र करना: बनी इस्राईल को अल्लाह ने बहुत नेमतें दीं, लेकिन उन्होंने अहद तोड़कर उन नेमतों को गंवा दिया। यह हमारे लिए सबक है कि अल्लाह की नेमतों की क़द्र करें और उसके हुक्मों पर चलें, वरना नेमतें छीन ली जाती हैं।
- कुरआन और रसूल ﷺ पर ईमान लाना: यह आयत हमें बताती है कि जो लोग रसूल ﷺ पर ईमान नहीं लाते, वे अल्लाह की किताबों पर सच्चा ईमान नहीं रखते। इसलिए हमें रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाना चाहिए और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए।
📜 आयत 98-102 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 100
सूरा अल-बकरा आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद…सूरा आयत 100/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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