अल-बकरा · 99/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَلَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۖ وَمَا يَكْفُرُ بِهَا إِلَّا الْفَاسِقُونَ ۝٩٩
Wa laqad anzalnaaa ilaika Aayaatim baiyinaatinw wa maa yakfuru bihaaa illal faasiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाज़िल की हैं जो वाजेए और रौशन हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष निशानियाँ तथा प्रमाण।
  • يَكْفُرُ بِهَا: उन्हें झुठलाए या उनका इनकार करे।
  • الْفَاسِقُونَ: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अल्लाह के दीन से बाहर निकल जाने वाले।

तफसीर:

ऐ नबी! हमने आपकी ओर स्पष्ट निशानियाँ और खुले प्रमाण उतारे हैं, जो आपके सच्चे नबी होने और आपके द्वारा लाए गए वही (प्रकाशना) की सच्चाई पर गवाही देते हैं। ये आयतें हलाल-हराम, सीमाओं (हुदूद) और अहकाम (आदेशों) को विस्तार से बयान करती हैं, ताकि लोगों के लिए सत्य स्पष्ट हो जाए। इन आयतों के इतने उज्ज्वल और प्रत्यक्ष होने के बावजूद, उन्हें केवल वही लोग झुठलाते हैं या उनका इनकार करते हैं जो अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल चुके हैं, अर्थात फासिक (अवज्ञाकारी) लोग। यह उनकी हठधर्मिता और सत्य से विमुखता का प्रमाण है, क्योंकि जिसके पास सत्य स्पष्ट हो जाए और वह उसे अस्वीकार करे, वही वास्तव में फासिक है।

फायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन की आयतें स्पष्ट और प्रमाणित हैं; इनमें कोई धुंधलापन या संदेह नहीं है, इसलिए हर समझदार व्यक्ति को इन्हें स्वीकार करना चाहिए।
  2. यह बताती है कि सत्य को जानने के बाद उसका इनकार करना बड़ा पाप है, और यही इनकार व्यक्ति को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
  3. यह हमें चेतावनी देती है कि हम अपने दिलों को अहंकार और हठ से पाक रखें, ताकि हम उन फासिक लोगों में शामिल न हों जो स्पष्ट सत्य को देखकर भी उसे नकार देते हैं।
  4. यह मुसलमानों के लिए खुशखबरी है कि उनके पास ऐसी किताब है जिसकी आयतें स्वयं अपनी सच्चाई का सबूत हैं, और यह अल्लाह की ओर से एक महान उपहार है।


📜 आयत 97-101 — सूरा अल-बकरा

97قُلْ مَن كَانَ عَدُوًّا لِّجِبْرِيلَ فَإِنَّهُ نَزَّلَهُ عَلَىٰ قَلْبِكَ بِإِذْنِ اللَّهِ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدًى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
98مَن كَانَ عَدُوًّا لِّلَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَالَ فَإِنَّ اللَّهَ عَدُوٌّ لِّلْكَافِرِينَ
जो शख्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खुदा भी (ऐसे) काफ़िरों का दुश्मन है
99وَلَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۖ وَمَا يَكْفُرُ بِهَا إِلَّا الْفَاسِقُونَ
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाज़िल की हैं जो वाजेए और रौशन हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता
100أَوَكُلَّمَا عَاهَدُوا عَهْدًا نَّبَذَهُ فَرِيقٌ مِّنْهُم ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला बल्कि उनमें से अक्सर तो ईमान ही नहीं रखते
101وَلَمَّا جَاءَهُمْ رَسُولٌ مِّنْ عِندِ اللَّهِ مُصَدِّقٌ لِّمَا مَعَهُمْ نَبَذَ فَرِيقٌ مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ كِتَابَ اللَّهِ وَرَاءَ ظُهُورِهِمْ كَأَنَّهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और जब उनके पास खुदा की तरफ से रसूल (मोहम्मद) आया और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़ भी करता है तो उन अहले किताब के एक गिरोह ने किताबे खुदा को अपने पसे पुश्त फेंक दिया गोया वह लोग कुछ जानते ही नहीं और उस मंत्र के पीछे पड़ गए
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
99आयत

अनुवाद — अल-बकरा 99

सूरा अल-बकरा आयत 99 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाज़िल की…

सूरा आयत 99/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 97–101. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Monday, September 7, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए