Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَقَاتِلُوا: और लड़ो (जिहाद करो)
- فِي سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह के मार्ग में (अल्लाह की राह में)
- وَاعْلَمُوا: और जान लो
- سَمِيعٌ: सब कुछ सुनने वाला
- عَلِيمٌ: सब कुछ जानने वाला
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने मोमिन बंदों को आदेश देता है कि वे उसके मार्ग में जिहाद करें—यानी अल्लाह के दीन की मदद के लिए, उसके कलिमे (बोल) को बुलंद करने के लिए और उसके दुश्मनों के मुकाबले में लड़ें। यह लड़ाई सिर्फ अल्लाह की राह में होनी चाहिए, न कि किसी दुनियावी मकसद या जातीय जुनून के लिए। इस आदेश का मकसद दीन की सरबुलंदी और अल्लाह के दीन को गालिब बनाना है।
इसके बाद अल्लाह तआला अपने बंदों को यह याद दिलाता है कि वह सब कुछ सुनने वाला है—तुम्हारी जुबान से निकलने वाले हर कलिमे को सुनता है, और सब कुछ जानने वाला है—तुम्हारे दिलों के राज़, तुम्हारी नीयतें और तुम्हारे सारे आमाल उससे छिपे नहीं हैं। वह तुम्हारी नीयतों और अमल के मुताबिक तुम्हें बदला देगा। यहाँ यह बात ज़ोर देकर कही गई है कि जिहाद में सिर्फ ज़ाहिरी अमल ही नहीं, बल्कि दिल की नीयत भी अल्लाह के सामने पेश होती है। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उनका अज्र अल्लाह के पास महफूज़ है, और जो दिखावे के लिए या दुनियावी मकसद से लड़ते हैं, उनका अंजाम अल्लाह के इल्म में है। अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है और हर अमल का सही हिसाब रखने वाला है।
फ़ायदे (सबक):
- जिहाद की अहमियत: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अल्लाह के दीन की हिफाज़त और सरबुलंदी के लिए कुर्बानी देना ज़रूरी है। यह सिर्फ लड़ाई तक महदूद नहीं, बल्कि हर वो कोशिश है जो अल्लाह के दीन को गालिब बनाने के लिए की जाए—चाहे वह इल्म हो, माल हो या जान।
- नीयत की पाकीज़गी: अल्लाह सुनने और जानने वाला है, इसलिए हर अमल में नीयत की सच्चाई ज़रूरी है। दिखावे का अमल अल्लाह के यहाँ क़ुबूल नहीं होता।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: जब इंसान को यकीन हो जाए कि अल्लाह उसकी हर बात सुन रहा है और उसकी हर नीयत जानता है, तो वह अपने अमल में सच्चाई और ईमानदारी अपनाता है और गुनाह से बचता है।
- जिहाद का असली मकसद: जिहाद का मकसद किसी जाति या वतन की मुहब्बत नहीं, बल्कि सिर्फ अल्लाह की राह और उसके दीन की सरबुलंदी है। यही वो नीयत है जो मुजाहिद को अल्लाह के यहाँ बुलंद दर्जा दिलाती है।
- अल्लाह पर भरोसा: जो लोग अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उन्हें यकीन होना चाहिए कि अल्लाह उनके साथ है, उनकी कुर्बानियाँ बेकार नहीं जाएँगी, और वह उन्हें उनके अमल का पूरा बदला देगा।
📜 आयत 242-246 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 244
सूरा अल-बकरा आयत 244 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान…सूरा आयत 244/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 242–246. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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