अल-बकरा · 244/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝٢٤٤
Wa qaatiloo fee sabeelil laahi wa`lamooo annal laaha Samee`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقَاتِلُوا: और लड़ो (जिहाद करो)
  • فِي سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह के मार्ग में (अल्लाह की राह में)
  • وَاعْلَمُوا: और जान लो
  • سَمِيعٌ: सब कुछ सुनने वाला
  • عَلِيمٌ: सब कुछ जानने वाला

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने मोमिन बंदों को आदेश देता है कि वे उसके मार्ग में जिहाद करें—यानी अल्लाह के दीन की मदद के लिए, उसके कलिमे (बोल) को बुलंद करने के लिए और उसके दुश्मनों के मुकाबले में लड़ें। यह लड़ाई सिर्फ अल्लाह की राह में होनी चाहिए, न कि किसी दुनियावी मकसद या जातीय जुनून के लिए। इस आदेश का मकसद दीन की सरबुलंदी और अल्लाह के दीन को गालिब बनाना है।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने बंदों को यह याद दिलाता है कि वह सब कुछ सुनने वाला है—तुम्हारी जुबान से निकलने वाले हर कलिमे को सुनता है, और सब कुछ जानने वाला है—तुम्हारे दिलों के राज़, तुम्हारी नीयतें और तुम्हारे सारे आमाल उससे छिपे नहीं हैं। वह तुम्हारी नीयतों और अमल के मुताबिक तुम्हें बदला देगा। यहाँ यह बात ज़ोर देकर कही गई है कि जिहाद में सिर्फ ज़ाहिरी अमल ही नहीं, बल्कि दिल की नीयत भी अल्लाह के सामने पेश होती है। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उनका अज्र अल्लाह के पास महफूज़ है, और जो दिखावे के लिए या दुनियावी मकसद से लड़ते हैं, उनका अंजाम अल्लाह के इल्म में है। अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है और हर अमल का सही हिसाब रखने वाला है।

फ़ायदे (सबक):

  1. जिहाद की अहमियत: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अल्लाह के दीन की हिफाज़त और सरबुलंदी के लिए कुर्बानी देना ज़रूरी है। यह सिर्फ लड़ाई तक महदूद नहीं, बल्कि हर वो कोशिश है जो अल्लाह के दीन को गालिब बनाने के लिए की जाए—चाहे वह इल्म हो, माल हो या जान।
  2. नीयत की पाकीज़गी: अल्लाह सुनने और जानने वाला है, इसलिए हर अमल में नीयत की सच्चाई ज़रूरी है। दिखावे का अमल अल्लाह के यहाँ क़ुबूल नहीं होता।
  3. अल्लाह की निगरानी का एहसास: जब इंसान को यकीन हो जाए कि अल्लाह उसकी हर बात सुन रहा है और उसकी हर नीयत जानता है, तो वह अपने अमल में सच्चाई और ईमानदारी अपनाता है और गुनाह से बचता है।
  4. जिहाद का असली मकसद: जिहाद का मकसद किसी जाति या वतन की मुहब्बत नहीं, बल्कि सिर्फ अल्लाह की राह और उसके दीन की सरबुलंदी है। यही वो नीयत है जो मुजाहिद को अल्लाह के यहाँ बुलंद दर्जा दिलाती है।
  5. अल्लाह पर भरोसा: जो लोग अल्लाह की राह में लड़ते हैं, उन्हें यकीन होना चाहिए कि अल्लाह उनके साथ है, उनकी कुर्बानियाँ बेकार नहीं जाएँगी, और वह उन्हें उनके अमल का पूरा बदला देगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 242-246 — अल-बकरा

242كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है उसी तरह ख़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है
243۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ الْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ اللَّهُ مُوتُوا ثُمَّ أَحْيَاهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते
244وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है
245مَّن ذَا الَّذِي يُقْرِضُ اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا فَيُضَاعِفَهُ لَهُ أَضْعَافًا كَثِيرَةً ۚ وَاللَّهُ يَقْبِضُ وَيَبْسُطُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
है कोई जो ख़ुदा को क़र्ज़ ए हुस्ना दे ताकि ख़ुदा उसके माल को इस के लिए कई गुना बढ़ा दे और ख़ुदा ही तंगदस्त करता है और वही कशायश देता है और उसकी तरफ सब के सब लौटा दिये जाओगे
246أَلَمْ تَرَ إِلَى الْمَلَإِ مِن بَنِي إِسْرَائِيلَ مِن بَعْدِ مُوسَىٰ إِذْ قَالُوا لِنَبِيٍّ لَّهُمُ ابْعَثْ لَنَا مَلِكًا نُّقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ قَالَ هَلْ عَسَيْتُمْ إِن كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِتَالُ أَلَّا تُقَاتِلُوا ۖ قَالُوا وَمَا لَنَا أَلَّا نُقَاتِلَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَقَدْ أُخْرِجْنَا مِن دِيَارِنَا وَأَبْنَائِنَا ۖ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقِتَالُ تَوَلَّوْا إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुमने मूसा के बाद बनी इसराइल के सरदारों की हालत पर नज़र नही की जब उन्होंने अपने नबी (शमूयेल) से कहा कि हमारे वास्ते एक बादशाह मुक़र्रर कीजिए ताकि हम राहे ख़ुदा में जिहाद करें (पैग़म्बर ने) फ़रमाया कहीं ऐसा तो न हो कि जब तुम पर जिहाद वाजिब किया जाए तो तुम न लड़ो कहने लगे जब हम अपने घरों और अपने बाल बच्चों से निकाले जा चुके तो फिर हमे कौन सा उज़्र बाक़ी है कि हम ख़ुदा की राह में जिहाद न करें फिर जब उन पर जिहाद वाजिब किया गया तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा सब के सब ने लड़ने से मुँह फेरा और ख़ुदा तो ज़ालिमों को खूब जानता है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
244आयत

अनुवाद — अल-बकरा 244

सूरा अल-बकरा आयत 244 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान…

सूरा आयत 244/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 242–246. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए