Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْحَقُ: घटाना, नष्ट करना, बरकत (वृद्धि) छीन लेना।
- الرِّبَا: सूद (ब्याज), जो इस्लाम में सख्त हराम है।
- يُرْبِي: बढ़ाना, बरकत देना, वृद्धि करना।
- الصَّدَقَاتِ: दान, खैरात, जो अल्लाह की राह में दी जाए।
- كَفَّارٍ: बहुत अधिक कुफ्र करने वाला, नाशुक्रा, हठीला इनकार करने वाला।
- أَثِيمٍ: पापी, गुनाहगार, जो हद से आगे बढ़कर पापों में डूबा हो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला सूद (ब्याज) को नष्ट कर देता है और उसकी बरकत छीन लेता है। यानी सूद का धन चाहे जितना भी बढ़ता दिखे, वास्तव में वह घटता है—या तो वह धन तबाह हो जाता है, या उसमें से बरकत उठा ली जाती है, जिससे उसका मालिक उससे कोई वास्तविक लाभ नहीं उठा पाता। दूसरी ओर, अल्लाह सदक़ा (दान) को बढ़ाता है और उसमें बरकत डालता है। वह दान के बदले अच्छाई को कई गुना बढ़ाकर देता है—एक नेकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक, और उससे भी अधिक देता है। साथ ही, वह दान करने वाले के बाकी माल में भी बरकत डालता है, जिससे उसका धन घटने के बावजूद असल में बढ़ता है।
अल्लाह उस व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो कुफ्र पर हठ करने वाला हो, सूद को हलाल समझने वाला हो, और लगातार पापों और गुनाहों में डूबा रहे। ऐसा व्यक्ति अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है और उसका अंजाम बुरा होता है।
फ़ायदे (उपदेश):
- सूद का विनाश: यह आयत साफ़ करती है कि सूद का धन चाहे दुनिया में कितना ही बढ़ता दिखे, अल्लाह उसे घटाता और नष्ट करता है। यह एक चेतावनी है कि हराम कमाई में बरकत नहीं होती।
- दान की बरकत: सदक़ा देने से माल घटता नहीं, बल्कि अल्लाह उसमें बरकत डालता है और उसे बढ़ाता है। यह मुसलमानों को दान और खैरात की तरफ प्रोत्साहित करता है।
- अल्लाह की मुहब्बत का मापदंड: अल्लाह उन्हीं को पसंद करता है जो उसकी आज्ञा मानते हैं और हराम से बचते हैं। जो लोग हठपूर्वक कुफ्र और पाप पर डटे रहते हैं, वे अल्लाह की नज़रों में नापसंद हैं।
- पाक और हलाल कमाई की अहमियत: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि हलाल कमाई ही असली कमाई है, और हराम कमाई का अंजाम तबाही है। इससे इंसान का दिल पाक रहता है और उसकी दुआएँ कबूल होती हैं।
- उम्मीद और डर का पैगाम: एक तरफ दान की बरकत की खुशखबरी है, तो दूसरी तरफ सूद के विनाश की चेतावनी। यह इंसान को नेकी की तरफ रग़बत देता है और गुनाह से डराता है।
📜 आयत 274-278 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 276
सूरा अल-बकरा आयत 276 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है…सूरा आयत 276/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 274–278. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 11, 2026
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