अल-बकरा · 276/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
يَمْحَقُ اللَّهُ الرِّبَا وَيُرْبِي الصَّدَقَاتِ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ أَثِيمٍ ۝٢٧٦
Yamhaqul laahur ribaa wa yurbis sadaqaat; wallaahu laa yuhibbu kulla kaffaarin aseem
📖 हिंदी अर्थ
खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है और जितने नाशुक्रे गुनाहगार हैं खुदा उन्हें दोस्त नहीं रखता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمْحَقُ: घटाना, नष्ट करना, बरकत (वृद्धि) छीन लेना।
  • الرِّبَا: सूद (ब्याज), जो इस्लाम में सख्त हराम है।
  • يُرْبِي: बढ़ाना, बरकत देना, वृद्धि करना।
  • الصَّدَقَاتِ: दान, खैरात, जो अल्लाह की राह में दी जाए।
  • كَفَّارٍ: बहुत अधिक कुफ्र करने वाला, नाशुक्रा, हठीला इनकार करने वाला।
  • أَثِيمٍ: पापी, गुनाहगार, जो हद से आगे बढ़कर पापों में डूबा हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला सूद (ब्याज) को नष्ट कर देता है और उसकी बरकत छीन लेता है। यानी सूद का धन चाहे जितना भी बढ़ता दिखे, वास्तव में वह घटता है—या तो वह धन तबाह हो जाता है, या उसमें से बरकत उठा ली जाती है, जिससे उसका मालिक उससे कोई वास्तविक लाभ नहीं उठा पाता। दूसरी ओर, अल्लाह सदक़ा (दान) को बढ़ाता है और उसमें बरकत डालता है। वह दान के बदले अच्छाई को कई गुना बढ़ाकर देता है—एक नेकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक, और उससे भी अधिक देता है। साथ ही, वह दान करने वाले के बाकी माल में भी बरकत डालता है, जिससे उसका धन घटने के बावजूद असल में बढ़ता है।

अल्लाह उस व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो कुफ्र पर हठ करने वाला हो, सूद को हलाल समझने वाला हो, और लगातार पापों और गुनाहों में डूबा रहे। ऐसा व्यक्ति अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है और उसका अंजाम बुरा होता है।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. सूद का विनाश: यह आयत साफ़ करती है कि सूद का धन चाहे दुनिया में कितना ही बढ़ता दिखे, अल्लाह उसे घटाता और नष्ट करता है। यह एक चेतावनी है कि हराम कमाई में बरकत नहीं होती।
  2. दान की बरकत: सदक़ा देने से माल घटता नहीं, बल्कि अल्लाह उसमें बरकत डालता है और उसे बढ़ाता है। यह मुसलमानों को दान और खैरात की तरफ प्रोत्साहित करता है।
  3. अल्लाह की मुहब्बत का मापदंड: अल्लाह उन्हीं को पसंद करता है जो उसकी आज्ञा मानते हैं और हराम से बचते हैं। जो लोग हठपूर्वक कुफ्र और पाप पर डटे रहते हैं, वे अल्लाह की नज़रों में नापसंद हैं।
  4. पाक और हलाल कमाई की अहमियत: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि हलाल कमाई ही असली कमाई है, और हराम कमाई का अंजाम तबाही है। इससे इंसान का दिल पाक रहता है और उसकी दुआएँ कबूल होती हैं।
  5. उम्मीद और डर का पैगाम: एक तरफ दान की बरकत की खुशखबरी है, तो दूसरी तरफ सूद के विनाश की चेतावनी। यह इंसान को नेकी की तरफ रग़बत देता है और गुनाह से डराता है।


📜 आयत 274-278 — अल-बकरा

274الَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ سِرًّا وَعَلَانِيَةً فَلَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
जो लोग रात को या दिन को छिपा कर या दिखा कर (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करते हैं तो उनके लिए उनका अज्र व सवाब उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न उन पर किसी क़िस्म का ख़ौफ़ होगा और न वह आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
275الَّذِينَ يَأْكُلُونَ الرِّبَا لَا يَقُومُونَ إِلَّا كَمَا يَقُومُ الَّذِي يَتَخَبَّطُهُ الشَّيْطَانُ مِنَ الْمَسِّ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا إِنَّمَا الْبَيْعُ مِثْلُ الرِّبَا ۗ وَأَحَلَّ اللَّهُ الْبَيْعَ وَحَرَّمَ الرِّبَا ۚ فَمَن جَاءَهُ مَوْعِظَةٌ مِّن رَّبِّهِ فَانتَهَىٰ فَلَهُ مَا سَلَفَ وَأَمْرُهُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَمَنْ عَادَ فَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जो लोग सूद खाते हैं वह (क़यामत में) खड़े न हो सकेंगे मगर उस शख्स की तरह खड़े होंगे जिस को शैतान ने लिपट कर मख़बूतुल हवास (पागल) बना दिया है ये इस वजह से कि वह उसके क़ायल हो गए कि जैसा बिक्री का मामला वैसा ही सूद का मामला हालॉकि बिक्री को तो खुदा ने हलाल और सूद को हराम कर दिया बस जिस शख्स के पास उसके परवरदिगार की तरफ़ से नसीहत (मुमानियत) आये और वह बाज़ आ गया तो इस हुक्म के नाज़िल होने से पहले जो सूद ले चुका वह तो उस का हो चुका और उसका अम्र (मामला) ख़ुदा के हवाले है और जो मनाही के बाद फिर सूद ले (या बिक्री के माले को यकसा बताए जाए) तो ऐसे ही लोग जहन्नुम में रहेंगे
276يَمْحَقُ اللَّهُ الرِّبَا وَيُرْبِي الصَّدَقَاتِ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ أَثِيمٍ
खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है और जितने नाशुक्रे गुनाहगार हैं खुदा उन्हें दोस्त नहीं रखता
277إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
(हॉ) जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ी और ज़कात दिया किये उनके लिए अलबत्ता उनका अज्र व (सवाब) उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न तो उन पर किसी क़िस्म का ख़ौफ़ होगा और न वह रन्जीदा दिल होंगे
278يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَذَرُوا مَا بَقِيَ مِنَ الرِّبَا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और जो सूद लोगों के ज़िम्मे बाक़ी रह गया है अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो छोड़ दो
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अनुवाद — अल-बकरा 276

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Wednesday, August 19, 2026

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