Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاعَدْنَا: हमने वादा किया / समय निर्धारित किया
- أَرْبَعِينَ لَيْلَةً: चालीस रातें (अर्थात चालीस दिन)
- اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ: तुमने बछड़े को (पूज्य) बना लिया
- مِن بَعْدِهِ: उसके (मूसा के जाने के) बाद
- ظَالِمُونَ: अत्याचारी / अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनकी उन नेअमतों की याद दिला रहा है जो उसने उन पर कीं, ताकि वे कृतज्ञता दिखाएँ और उसकी इबादत पर स्थिर रहें। उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि जब हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) से चालीस रातों के लिए वादा किया — ताकि वे तौरात के उतरने के लिए तूर (पहाड़) पर जाएँ और वहाँ अल्लाह से कलाम करें — तो तुमने उनकी अनुपस्थिति का फ़ायदा उठाया। तुमने सामरी के बनाए हुए बछड़े को अपना माबूद बना लिया और उसकी पूजा करने लगे। यह तुम्हारा सबसे बड़ा अत्याचार था कि तुमने अल्लाह की इबादत छोड़कर एक बेजान बछड़े की पूजा शुरू कर दी, जबकि तुम जानते थे कि अल्लाह ही सच्चा माबूद है। यह कृत्य न केवल शिर्क था, बल्कि अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म भी था, क्योंकि तुमने अपने आपको अल्लाह के क्रोध और अज़ाब का हक़दार बना लिया।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की नेअमतों को याद करना और उन पर शुक्र अदा करना ईमान की निशानी है, और नेअमतों की याद दिलाना अल्लाह की ओर से एक एहसान है ताकि लोग उसकी इबादत की ओर लौटें।
- नबियों की बात मानना और उनकी अनुपस्थिति में भी दीन पर स्थिर रहना आवश्यक है; उनकी ग़ैरमौजूदगी में बिदअत और गुमराही फैलाना बड़ा ज़ुल्म है।
- शिर्क सबसे बड़ा अत्याचार है, क्योंकि यह अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराता है, और इंसान अपने ही नुक़्सान का कारण बनता है।
- अल्लाह की इबादत में जल्दबाज़ी और सब्र का दामन नहीं छोड़ना चाहिए; मूसा (अलैहिस्सलाम) के चालीस दिनों के लिए जाने पर भी बनी इस्राईल सब्र न कर सके और गुमराह हो गए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी उन लोगों के लिए है जो अपनी ग़लती पर पश्चाताप करें और सच्चे दिल से तौबा करें, जैसा कि बनी इस्राईल ने बाद में किया और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया।
📜 आयत 49-53 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 51
सूरा अल-बकरा आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और…सूरा आयत 51/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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