अल-बकरा · 51/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَإِذْ وَاعَدْنَا مُوسَىٰ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً ثُمَّ اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ مِن بَعْدِهِ وَأَنتُمْ ظَالِمُونَ ۝٥١
Wa iz waa`adnaa Moosaaa arba`eena lailatan summattakhaztumul `ijla mim ba`dihee wa antum zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खुदा) बना लिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاعَدْنَا: हमने वादा किया / समय निर्धारित किया
  • أَرْبَعِينَ لَيْلَةً: चालीस रातें (अर्थात चालीस दिन)
  • اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ: तुमने बछड़े को (पूज्य) बना लिया
  • مِن بَعْدِهِ: उसके (मूसा के जाने के) बाद
  • ظَالِمُونَ: अत्याचारी / अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनकी उन नेअमतों की याद दिला रहा है जो उसने उन पर कीं, ताकि वे कृतज्ञता दिखाएँ और उसकी इबादत पर स्थिर रहें। उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि जब हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) से चालीस रातों के लिए वादा किया — ताकि वे तौरात के उतरने के लिए तूर (पहाड़) पर जाएँ और वहाँ अल्लाह से कलाम करें — तो तुमने उनकी अनुपस्थिति का फ़ायदा उठाया। तुमने सामरी के बनाए हुए बछड़े को अपना माबूद बना लिया और उसकी पूजा करने लगे। यह तुम्हारा सबसे बड़ा अत्याचार था कि तुमने अल्लाह की इबादत छोड़कर एक बेजान बछड़े की पूजा शुरू कर दी, जबकि तुम जानते थे कि अल्लाह ही सच्चा माबूद है। यह कृत्य न केवल शिर्क था, बल्कि अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म भी था, क्योंकि तुमने अपने आपको अल्लाह के क्रोध और अज़ाब का हक़दार बना लिया।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह की नेअमतों को याद करना और उन पर शुक्र अदा करना ईमान की निशानी है, और नेअमतों की याद दिलाना अल्लाह की ओर से एक एहसान है ताकि लोग उसकी इबादत की ओर लौटें।
  2. नबियों की बात मानना और उनकी अनुपस्थिति में भी दीन पर स्थिर रहना आवश्यक है; उनकी ग़ैरमौजूदगी में बिदअत और गुमराही फैलाना बड़ा ज़ुल्म है।
  3. शिर्क सबसे बड़ा अत्याचार है, क्योंकि यह अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराता है, और इंसान अपने ही नुक़्सान का कारण बनता है।
  4. अल्लाह की इबादत में जल्दबाज़ी और सब्र का दामन नहीं छोड़ना चाहिए; मूसा (अलैहिस्सलाम) के चालीस दिनों के लिए जाने पर भी बनी इस्राईल सब्र न कर सके और गुमराह हो गए।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी उन लोगों के लिए है जो अपनी ग़लती पर पश्चाताप करें और सच्चे दिल से तौबा करें, जैसा कि बनी इस्राईल ने बाद में किया और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया।


📜 आयत 49-53 — अल-बकरा

49وَإِذْ نَجَّيْنَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और (उस वक्त क़ो याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुर्ज़गो को) फिरऔन (के पन्जे) से छुड़ाया जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के लिए) ज़िन्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारे सब्र की) सख्त आज़माइश थी
50وَإِذْ فَرَقْنَا بِكُمُ الْبَحْرَ فَأَنجَيْنَاكُمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरिया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया
51وَإِذْ وَاعَدْنَا مُوسَىٰ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً ثُمَّ اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ مِن بَعْدِهِ وَأَنتُمْ ظَالِمُونَ
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खुदा) बना लिया
52ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो
53وَإِذْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَالْفُرْقَانَ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा को (तौरेत) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून (इनायत किया) ताके तुम हिदायत पाओ
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
51आयत

अनुवाद — अल-बकरा 51

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Tuesday, August 18, 2026

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