अल-बकरा · 52/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٥٢
Summa `afawnaa `ankum mim ba`di zaalika la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم: फिर हमने तुम्हें माफ कर दिया, तुम्हारे गुनाह मिटा दिए।
  • مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ: उसके बाद, यानी बछड़े की पूजा करने और उस अपराध के बाद।
  • لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ: ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो, यानी अल्लाह की नेमतों के प्रति आभारी रहो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल को याद दिलाया कि जब उन्होंने बछड़े की पूजा करके बहुत बड़ा गुनाह किया, और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) लौटकर आए और उन्होंने अपनी क़ौम को समझाया, तो उन्होंने तौबा की। अल्लाह ने अपनी रहमत और करम से उनकी उस तौबा को क़ुबूल किया और उनके उस भारी गुनाह को माफ कर दिया। यह माफी उनके लिए अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी थी, क्योंकि वह गुनाह ऐसा था जिसकी सज़ा दुनिया और आख़िरत दोनों में मिल सकती थी। अल्लाह ने उन्हें इसलिए माफ किया ताकि वे उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें, उसकी नाफ़रमानी से बचें और अपनी ज़िंदगी में उसके हुक्मों का पालन करें। यह माफी उनके लिए एक इम्तिहान भी थी कि वे इस एहसान के बाद सीधे रास्ते पर चलें और अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला बहुत माफ करने वाला है। जब बंदा सच्चे दिल से तौबा करता है, तो अल्लाह उसके बड़े से बड़े गुनाह भी माफ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत की वसीअत (विस्तार) को दिखाता है।
  2. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाह कर ले, अगर वह सच्चे दिल से पलट आए, तो अल्लाह उसे माफ कर देता है।
  3. अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। शुक्र का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अल्लाह की नेमत पाने के बाद उसकी नाफ़रमानी न की जाए और उसकी इबादत में जुटे रहें।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की माफी के बाद हमें अपने अंदर शुक्र का जज़्बा पैदा करना चाहिए, ताकि हमारा ईमान मज़बूत हो और हम अल्लाह के करीब आएं।
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📜 आयत 50-54 — अल-बकरा

50وَإِذْ فَرَقْنَا بِكُمُ الْبَحْرَ فَأَنجَيْنَاكُمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरिया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया
51وَإِذْ وَاعَدْنَا مُوسَىٰ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً ثُمَّ اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ مِن بَعْدِهِ وَأَنتُمْ ظَالِمُونَ
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खुदा) बना लिया
52ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो
53وَإِذْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَالْفُرْقَانَ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा को (तौरेत) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून (इनायत किया) ताके तुम हिदायत पाओ
54وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِاتِّخَاذِكُمُ الْعِجْلَ فَتُوبُوا إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَاقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ऐ मेरी क़ौम तुमने बछड़े को (ख़ुदा) बना के अपने ऊपर बड़ा सख्त जुल्म किया तो अब (इसके सिवा कोई चारा नहीं कि) तुम अपने ख़ालिक की बारगाह में तौबा करो और वह ये है कि अपने को क़त्ल कर डालो तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है, फिर जब तुमने ऐसा किया तो खुदा ने तुम्हारी तौबा क़ुबूल कर ली बेशक वह बड़ा मेहरबान माफ़ करने वाला है
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अनुवाद — अल-बकरा 52

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Tuesday, August 18, 2026

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