अल-बकरा · 50/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَإِذْ فَرَقْنَا بِكُمُ الْبَحْرَ فَأَنجَيْنَاكُمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ ۝٥٠
Wa iz faraqnaa bikumul bahra fa anjainaakum wa agh-raqnaaa Aala Fir`awna wa antum tanzuroon
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरिया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرَقْنَا: हमने अलग किया, चीरा।
  • بِكُمُ الْبَحْرَ: तुम्हारे कारण समुद्र को (या तुम्हारे लिए समुद्र को चीरकर रास्ता बनाया)।
  • فَأَنجَيْنَاكُمْ: तो हमने तुम्हें बचा लिया।
  • آلَ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन के लोग, उसकी सेना और उसके साथी।
  • تَنظُرُونَ: तुम देख रहे थे (अपनी आँखों से)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला बनी इसराईल को उनकी उन महान नेअमतों की याद दिला रहा है जो उसने उन पर कीं, ताकि वे उसकी इबादत करें और उसका शुक्र अदा करें। जब वे मिस्र से निकले और फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया, तो वे समुद्र के किनारे पहुँचे। आगे समुद्र था और पीछे फ़िरऔन की सेना। उस विकट घड़ी में अल्लाह ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) के हाथ पर अपनी लाठी से समुद्र पर वार करने का आदेश दिया, तो समुद्र चीरकर बारह रास्ते बन गए, जो सूखी ज़मीन की तरह थे। पानी दोनों तरफ़ पहाड़ों की तरह खड़ा रहा। बनी इसराईल उन रास्तों से सही-सलामत गुज़र गए। जब फ़िरऔन और उसकी सेना उन्हीं रास्तों पर चढ़ी, तो अल्लाह ने पानी को उन पर बंद कर दिया और उन सबको डुबो दिया। यह सब कुछ बनी इसराईल की आँखों के सामने हुआ, वे देख रहे थे कि कैसे उनका सबसे बड़ा दुश्मन और उसकी पूरी ताक़त पानी में ग़र्क हो गई। यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेअमतों में से एक थी, जिसने उन्हें दुश्मन के अत्याचार से और डूबने के ख़तरे से निजात दी।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की मदद करता है, चाहे मुश्किलें कितनी ही बड़ी क्यों न हों। जब बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसके लिए वहाँ से रास्ता निकालता है जहाँ से उसे उम्मीद भी नहीं होती।
  2. अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) असीम है। वह समुद्र जैसी चीज़ को भी अपने हुक्म से रास्ता बना सकता है। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
  3. ज़ालिमों का अंजाम हमेशा बुरा होता है। फ़िरऔन जैसा ताक़तवर बादशाह भी जब अल्लाह के मुक़ाबले में आया, तो उसे डुबो दिया गया। यह हर ज़ालिम के लिए सबक है।
  4. अल्लाह की नेअमतों को याद करना और उन पर शुक्र करना चाहिए। नेअमतों की याद दिलाने से अल्लाह की मुहब्बत और इबादत में दिल लगता है।
  5. यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नबियों और उनके साथियों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें कामयाबी देता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।


📜 आयत 48-52 — अल-बकरा

48وَاتَّقُوا يَوْمًا لَّا تَجْزِي نَفْسٌ عَن نَّفْسٍ شَيْئًا وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا شَفَاعَةٌ وَلَا يُؤْخَذُ مِنْهَا عَدْلٌ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और उस दिन से डरो (जिस दिन) कोई शख्स किसी की तरफ से न फिदिया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई सिफारिश मानी जाएगी और न उसका कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न वह मदद पहुँचाए जाएँगे
49وَإِذْ نَجَّيْنَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और (उस वक्त क़ो याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुर्ज़गो को) फिरऔन (के पन्जे) से छुड़ाया जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के लिए) ज़िन्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारे सब्र की) सख्त आज़माइश थी
50وَإِذْ فَرَقْنَا بِكُمُ الْبَحْرَ فَأَنجَيْنَاكُمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरिया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया
51وَإِذْ وَاعَدْنَا مُوسَىٰ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً ثُمَّ اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ مِن بَعْدِهِ وَأَنتُمْ ظَالِمُونَ
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खुदा) बना लिया
52ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो
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अनुवाद — अल-बकरा 50

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Tuesday, August 18, 2026

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